समग्र शिक्षा, 2022 (Samagra Shiksha, 2022) | RPSC First Grade Special Education Notes
समग्र शिक्षा, 2022 (Samagra Shiksha, 2022)
परिचय
समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (पूर्व में मानव संसाधन विकास मंत्रालय) की एक समेकित (Integrated) विद्यालयी शिक्षा योजना है। इसका उद्देश्य पूर्व-प्राथमिक (Pre-School) से लेकर कक्षा 12 तक सभी बच्चों को समान, गुणवत्तापूर्ण, समावेशी (Inclusive) तथा न्यायसंगत शिक्षा उपलब्ध कराना है।
वर्ष 2022 में समग्र शिक्षा योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाया गया। इस संशोधित योजना में विशेष रूप से समावेशी शिक्षा (Inclusive Education), दिव्यांग बच्चों (Children with Special Needs – CWSN), आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy), डिजिटल शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विशेष बल दिया गया।
समग्र शिक्षा योजना का मुख्य उद्देश्य केवल विद्यालय खोलना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा विद्यालय में प्रवेश करे, नियमित रूप से पढ़े, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे तथा अपनी क्षमता के अनुसार पूर्ण विकास कर सके।
समग्र शिक्षा का विकास
भारत में विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में पहले अनेक अलग-अलग योजनाएँ संचालित की जाती थीं, जिनमें प्रमुख थीं—
- सर्व शिक्षा अभियान (SSA)
- राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA)
- शिक्षक शिक्षा (Teacher Education Scheme)
इन योजनाओं को अलग-अलग चलाने से कई प्रशासनिक एवं वित्तीय कठिनाइयाँ उत्पन्न होती थीं। इन्हें दूर करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2018-19 से इन तीनों योजनाओं का एकीकरण कर समग्र शिक्षा प्रारम्भ की।
इसके बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 लागू होने के पश्चात वर्ष 2022 में इस योजना में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए, ताकि शिक्षा व्यवस्था को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बनाया जा सके।
समग्र शिक्षा, 2022 की आवश्यकता
समग्र शिक्षा योजना में संशोधन निम्न कारणों से आवश्यक हुआ—
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के प्रावधानों को लागू करना।
- सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं समान शिक्षा उपलब्ध कराना।
- दिव्यांग बच्चों को सामान्य विद्यालयों में शिक्षा के अवसर प्रदान करना।
- डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना।
- विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों (Dropout) की संख्या कम करना।
- आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करना।
- विद्यालयों के आधारभूत ढाँचे (Infrastructure) का विकास करना।
- शिक्षकों की गुणवत्ता एवं प्रशिक्षण में सुधार करना।
- व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना।
- शिक्षा में समान अवसर एवं सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना।
समग्र शिक्षा, 2022 की परिभाषा
समग्र शिक्षा एक समेकित विद्यालयी शिक्षा कार्यक्रम है जिसके माध्यम से पूर्व-प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी, समान एवं न्यायसंगत शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है तथा प्रत्येक बच्चे के सर्वांगीण विकास पर बल दिया जाता है।
समग्र शिक्षा, 2022 की प्रमुख विशेषताएँ
1. पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक एकीकृत शिक्षा
समग्र शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें शिक्षा को अलग-अलग स्तरों में विभाजित न करके Pre-School से लेकर Senior Secondary तक एक सतत (Continuum) व्यवस्था के रूप में देखा गया है।
इससे—
- शिक्षा की निरंतरता बनी रहती है।
- बच्चों का विद्यालय परिवर्तन कम होता है।
- योजनाओं का बेहतर समन्वय होता है।
- संसाधनों का प्रभावी उपयोग संभव होता है।
2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 का क्रियान्वयन
समग्र शिक्षा, 2022 का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों को विद्यालय स्तर पर लागू करना है।
इसके अंतर्गत—
- 5+3+3+4 पाठ्यक्रम संरचना
- प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE)
- आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN)
- बहुभाषी शिक्षा
- अनुभवात्मक अधिगम
- कौशल आधारित शिक्षा
- समावेशी शिक्षा
- डिजिटल शिक्षा
को बढ़ावा दिया गया।
3. समान एवं न्यायसंगत शिक्षा
समग्र शिक्षा का उद्देश्य केवल शिक्षा उपलब्ध कराना नहीं बल्कि समान अवसर (Equity) सुनिश्चित करना भी है।
इसमें विशेष ध्यान दिया जाता है—
- बालिकाओं पर
- अनुसूचित जाति (SC)
- अनुसूचित जनजाति (ST)
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)
- अल्पसंख्यक समुदाय
- दिव्यांग बच्चों
को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर।
4. समावेशी शिक्षा (Inclusive Education)
समग्र शिक्षा, 2022 का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष समावेशी शिक्षा है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक दिव्यांग बच्चा सामान्य विद्यालय में अन्य बच्चों के साथ शिक्षा प्राप्त कर सके।
समावेशी शिक्षा के अंतर्गत—
- बाधा रहित विद्यालय (Barrier Free Schools)
- रैम्प एवं रेलिंग
- दिव्यांग अनुकूल शौचालय
- संसाधन कक्ष (Resource Room)
- विशेष शिक्षक (Special Educator)
- सहायक उपकरण (Assistive Devices)
- ब्रेल पुस्तकें
- बड़े अक्षरों वाली पुस्तकें
- सांकेतिक भाषा का उपयोग
- श्रवण यंत्र
- व्हीलचेयर
- पाठ्यक्रम में आवश्यक अनुकूलन
- व्यक्तिगत शैक्षिक योजना (IEP)
आदि की व्यवस्था की जाती है।
5. आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy – FLN)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार कक्षा 3 तक प्रत्येक बच्चे को पढ़ना, लिखना और गणना करना आना चाहिए।
इसी उद्देश्य से समग्र शिक्षा में FLN मिशन को विशेष महत्व दिया गया।
इसके अंतर्गत—
- भाषा विकास
- पढ़ने की क्षमता
- लेखन कौशल
- प्रारम्भिक गणित
- गतिविधि आधारित शिक्षण
- खेल आधारित अधिगम
- बाल केन्द्रित शिक्षा
को प्रोत्साहित किया गया।
6. डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा
समग्र शिक्षा, 2022 में डिजिटल शिक्षा पर विशेष बल दिया गया।
इसके अंतर्गत—
- स्मार्ट कक्षाएँ
- ICT लैब
- कम्प्यूटर शिक्षा
- टैबलेट
- डिजिटल सामग्री
- ई-लर्निंग
- DIKSHA Portal का उपयोग
- ऑनलाइन शिक्षक प्रशिक्षण
- डिजिटल मूल्यांकन
जैसी सुविधाएँ विकसित की जाती हैं।
7. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
समग्र शिक्षा केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाने पर नहीं बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर भी केन्द्रित है।
इसके लिए—
- नई शिक्षण विधियाँ
- गतिविधि आधारित शिक्षण
- अनुभवात्मक अधिगम
- दक्षता आधारित शिक्षा
- सतत मूल्यांकन
- सीखने के परिणामों का आकलन
पर विशेष बल दिया जाता है।
8. शिक्षक प्रशिक्षण
समग्र शिक्षा में शिक्षक को शिक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण घटक माना गया है।
इसलिए नियमित रूप से—
- सेवा पूर्व प्रशिक्षण
- सेवाकालीन प्रशिक्षण
- ऑनलाइन प्रशिक्षण
- विषय आधारित प्रशिक्षण
- समावेशी शिक्षा प्रशिक्षण
- ICT प्रशिक्षण
प्रदान किए जाते हैं।
9. विद्यालय अवसंरचना (Infrastructure Development)
समग्र शिक्षा के अंतर्गत विद्यालयों में आवश्यक भौतिक सुविधाओं का विकास किया जाता है।
इनमें शामिल हैं—
- अतिरिक्त कक्ष
- विज्ञान प्रयोगशाला
- कम्प्यूटर लैब
- पुस्तकालय
- खेल मैदान
- पेयजल
- विद्युत सुविधा
- शौचालय
- बालिका शौचालय
- दिव्यांग अनुकूल शौचालय
- रैम्प
- हैंडरेल
- Boundary Wall
- फर्नीचर
- संसाधन कक्ष
आदि।
10. विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान
समग्र शिक्षा का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को विद्यालय से जोड़कर रखना है।
इसके लिए—
- विशेष प्रशिक्षण
- ब्रिज कोर्स
- वैकल्पिक शिक्षा
- समुदाय की भागीदारी
- अभिभावकों की जागरूकता
- नियमित उपस्थिति की निगरानी
जैसे उपाय अपनाए जाते हैं।
समग्र शिक्षा, 2022 के उद्देश्य
समग्र शिक्षा, 2022 का उद्देश्य केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि प्रत्येक बच्चे को समान, गुणवत्तापूर्ण, समावेशी तथा जीवनोपयोगी शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
- 3 से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण विद्यालयी शिक्षा उपलब्ध कराना।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करना।
- सभी बच्चों के लिए समान एवं न्यायसंगत शिक्षा सुनिश्चित करना।
- दिव्यांग बच्चों (Children with Special Needs – CWSN) को समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराना।
- विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों (Dropouts) को पुनः शिक्षा से जोड़ना।
- आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को सुदृढ़ करना।
- विद्यालयों में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास करना।
- डिजिटल एवं तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना।
- शिक्षकों की क्षमता एवं दक्षता में वृद्धि करना।
- व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
- विद्यालयों में सीखने के परिणाम (Learning Outcomes) में सुधार करना।
- सामाजिक, आर्थिक एवं लैंगिक असमानताओं को कम करना।
- विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना।
समग्र शिक्षा, 2022 के प्रमुख घटक (Major Components)
समग्र शिक्षा योजना अनेक घटकों के माध्यम से कार्य करती है। प्रत्येक घटक विद्यालयी शिक्षा के किसी न किसी महत्वपूर्ण क्षेत्र को मजबूत बनाता है।
1. प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (Early Childhood Care and Education – ECCE)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुसार 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चे के मस्तिष्क के विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है।
समग्र शिक्षा में ECCE के अंतर्गत—
- बालवाटिका (Balvatika) की स्थापना।
- खेल आधारित शिक्षा।
- गतिविधि आधारित शिक्षण।
- भाषा विकास।
- सामाजिक एवं भावनात्मक विकास।
- विद्यालय के लिए बच्चों की तैयारी (School Readiness)।
- आंगनवाड़ी एवं विद्यालय के बीच समन्वय।
पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
2. आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy – FLN)
समग्र शिक्षा में FLN को अत्यधिक महत्व दिया गया है।
इसका उद्देश्य है कि कक्षा 3 तक प्रत्येक बच्चा—
- सरल भाषा पढ़ सके।
- लिख सके।
- मूलभूत गणना कर सके।
- दैनिक जीवन में गणित का प्रयोग कर सके।
- आत्मविश्वास के साथ सीख सके।
FLN के अंतर्गत—
- कहानी आधारित शिक्षण।
- चित्र पुस्तकों का उपयोग।
- भाषा खेल।
- गणितीय गतिविधियाँ।
- स्थानीय भाषा में शिक्षण।
- कार्यपत्रक (Worksheets)।
- खेल आधारित मूल्यांकन।
को बढ़ावा दिया जाता है।
3. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education)
समग्र शिक्षा में केवल विद्यालय में प्रवेश ही पर्याप्त नहीं माना गया है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है।
इसके अंतर्गत—
- दक्षता आधारित शिक्षा (Competency Based Education)
- अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning)
- गतिविधि आधारित शिक्षण
- परियोजना कार्य (Project Work)
- कला समेकित शिक्षा (Art Integrated Learning)
- खेल आधारित शिक्षा
- स्थानीय ज्ञान का समावेश
- सीखने के परिणामों का नियमित मूल्यांकन
को बढ़ावा दिया जाता है।
4. समावेशी शिक्षा (Inclusive Education)
समग्र शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण घटक समावेशी शिक्षा है।
इसका उद्देश्य है कि प्रत्येक दिव्यांग बच्चा सामान्य विद्यालय में अन्य बच्चों के साथ समान अवसरों के साथ शिक्षा प्राप्त करे।
समावेशी शिक्षा के अंतर्गत निम्न सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं—
- विशेष शिक्षक (Special Educator)
- संसाधन शिक्षक (Resource Teacher)
- संसाधन कक्ष (Resource Room)
- व्यक्तिगत शैक्षिक योजना (Individualized Education Plan – IEP)
- सहायक उपकरण
- चिकित्सकीय सहायता
- थेरेपी सेवाएँ
- ब्रेल सामग्री
- बड़े अक्षरों वाली पुस्तकें
- सांकेतिक भाषा
- श्रवण यंत्र
- व्हीलचेयर
- दिव्यांग अनुकूल परिवेश
दिव्यांग बच्चों (CWSN) के लिए विशेष प्रावधान
समग्र शिक्षा, 2022 में दिव्यांग बच्चों को विशेष महत्व दिया गया है। योजना का उद्देश्य केवल विद्यालय में प्रवेश दिलाना नहीं बल्कि उनकी शिक्षा को प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाना है।
1. प्रत्येक दिव्यांग बच्चे की पहचान
विद्यालय एवं शिक्षा विभाग द्वारा—
- दिव्यांग बच्चों की पहचान।
- आवश्यकता का आकलन।
- चिकित्सकीय प्रमाणन।
- शैक्षिक आवश्यकता का मूल्यांकन।
किया जाता है।
2. विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित करना
किसी भी दिव्यांग बच्चे को केवल उसकी दिव्यांगता के कारण विद्यालय में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता।
विद्यालयों को—
- प्रवेश देना,
- आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना,
- उचित सहयोग देना
अनिवार्य है।
3. व्यक्तिगत शैक्षिक योजना (Individualized Education Plan – IEP)
प्रत्येक दिव्यांग बच्चे की क्षमता अलग होती है।
इसलिए विशेष शिक्षक द्वारा—
- सीखने का स्तर
- व्यवहार
- भाषा विकास
- सामाजिक विकास
- संचार कौशल
- दैनिक जीवन कौशल
को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत शैक्षिक योजना तैयार की जाती है।
4. सहायक एवं अनुकूल उपकरण (Assistive Devices)
बच्चे की आवश्यकता के अनुसार विभिन्न उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं—
- श्रवण यंत्र (Hearing Aid)
- ब्रेल स्लेट
- ब्रेल पुस्तकें
- ब्रेल टाइपर
- व्हाइट केन (White Cane)
- व्हीलचेयर
- ट्राइसाइकिल
- वॉकर
- विशेष फर्नीचर
- लो विज़न एड्स
- संचार उपकरण (Communication Devices)
- टैबलेट आधारित सहायक तकनीक
5. विद्यालय को दिव्यांग अनुकूल बनाना
समग्र शिक्षा के अंतर्गत विद्यालयों को Barrier Free बनाया जाता है।
इसके लिए—
- रैम्प
- हैंडरेल
- दिव्यांग अनुकूल शौचालय
- चौड़े दरवाजे
- समतल मार्ग
- संकेतक (Signage)
- टैक्टाइल पाथ (जहाँ आवश्यक हो)
की व्यवस्था की जाती है।
6. विशेष शिक्षकों की नियुक्ति
समग्र शिक्षा के अंतर्गत योग्य विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है।
विशेष शिक्षक—
- बच्चों का मूल्यांकन करते हैं।
- IEP तैयार करते हैं।
- सामान्य शिक्षकों को सहयोग देते हैं।
- अभिभावकों का मार्गदर्शन करते हैं।
- सहायक उपकरणों का उपयोग सिखाते हैं।
- समावेशी शिक्षण रणनीतियाँ विकसित करते हैं।
7. घर आधारित शिक्षा (Home-Based Education – HBE)
कुछ ऐसे बच्चे जिनकी दिव्यांगता अत्यंत गंभीर (Severe) या बहु-दिव्यांगता (Multiple Disabilities) वाली होती है और जो नियमित रूप से विद्यालय नहीं जा सकते, उनके लिए घर आधारित शिक्षा (Home-Based Education) की व्यवस्था की जाती है।
इसके अंतर्गत—
- प्रशिक्षित विशेष शिक्षक घर जाकर शिक्षण कार्य करते हैं।
- अभिभावकों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
- बच्चे के विकास की नियमित निगरानी की जाती है।
- आवश्यकता अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
- बच्चे को धीरे-धीरे विद्यालयी वातावरण से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: घर आधारित शिक्षा का उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा का स्थायी विकल्प बनाना नहीं है, बल्कि जिन बच्चों के लिए तत्काल विद्यालय जाना संभव नहीं है, उन्हें उनकी आवश्यकता के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराना है।
8. परिवहन एवं एस्कॉर्ट (Escort) सुविधा
कुछ दिव्यांग बच्चों के लिए विद्यालय तक पहुँचना कठिन होता है। ऐसे मामलों में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा निर्धारित मानकों एवं समग्र शिक्षा के दिशा-निर्देशों के अनुसार परिवहन अथवा एस्कॉर्ट सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है, जिससे उनकी विद्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।
9. चिकित्सकीय एवं उपचारात्मक सहयोग
आवश्यकता के अनुसार विभिन्न विशेषज्ञों का सहयोग भी उपलब्ध कराया जाता है, जैसे—
- फिजियोथेरेपिस्ट
- ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट
- स्पीच एवं लैंग्वेज थेरेपिस्ट
- मनोवैज्ञानिक
- परामर्शदाता (Counsellor)
- पुनर्वास विशेषज्ञ
इनका उद्देश्य बच्चे की सीखने की क्षमता तथा कार्यात्मक स्वतंत्रता में वृद्धि करना है।
10. नियमित प्रगति मूल्यांकन
दिव्यांग बच्चों की प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जाता है।
इसमें देखा जाता है—
- शैक्षिक उपलब्धि
- सामाजिक समायोजन
- संचार कौशल
- आत्मनिर्भरता
- व्यवहारिक विकास
- IEP के लक्ष्यों की प्राप्ति
इनके आधार पर शिक्षण रणनीतियों में आवश्यक संशोधन किए जाते हैं।
समग्र शिक्षा, 2022 की वित्तीय व्यवस्था (Financial Pattern)
समग्र शिक्षा एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme – CSS) है। इसका अर्थ है कि इस योजना के संचालन हेतु केंद्र सरकार तथा राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारें संयुक्त रूप से वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।
वित्तीय भागीदारी राज्यों की श्रेणी के अनुसार निर्धारित की गई है।
| राज्य/क्षेत्र | केंद्र : राज्य का वित्तीय अनुपात |
|---|---|
| सामान्य राज्य | 60 : 40 |
| पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्य | 90 : 10 |
| केंद्र शासित प्रदेश (विधानसभा सहित) | केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार |
| केंद्र शासित प्रदेश (बिना विधानसभा) | सामान्यतः 100% केंद्रीय सहायता |
महत्वपूर्ण तथ्य: समग्र शिक्षा के अंतर्गत वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट (Annual Work Plan and Budget – AWP&B) राज्यों द्वारा तैयार किया जाता है, जिसे केंद्र सरकार के अनुमोदन के बाद वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
समग्र शिक्षा का प्रशासनिक ढाँचा (Administrative Structure)
समग्र शिक्षा का संचालन राष्ट्रीय, राज्य, जिला एवं विद्यालय स्तर पर किया जाता है।
1. राष्ट्रीय स्तर (National Level)
राष्ट्रीय स्तर पर योजना का संचालन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) द्वारा किया जाता है।
मुख्य कार्य—
- नीति निर्माण।
- दिशा-निर्देश जारी करना।
- राज्यों की कार्ययोजना को स्वीकृति देना।
- वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- योजना की निगरानी एवं मूल्यांकन।
- गुणवत्ता सुधार हेतु दिशा-निर्देश जारी करना।
2. राज्य स्तर (State Level)
प्रत्येक राज्य में समग्र शिक्षा राज्य परियोजना कार्यालय (State Project Office – SPO) स्थापित किया जाता है।
मुख्य कार्य—
- राज्य स्तर की कार्ययोजना बनाना।
- बजट का प्रबंधन।
- शिक्षकों का प्रशिक्षण।
- विद्यालयों की निगरानी।
- विभिन्न कार्यक्रमों का समन्वय।
- समावेशी शिक्षा का संचालन।
- CWSN से संबंधित कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
3. जिला स्तर (District Level)
जिला स्तर पर जिला परियोजना कार्यालय (District Project Office – DPO) योजना का संचालन करता है।
मुख्य कार्य—
- विद्यालयों का निरीक्षण।
- दिव्यांग बच्चों की पहचान।
- प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- विद्यालयों की प्रगति की निगरानी।
- डेटा संकलन एवं रिपोर्ट तैयार करना।
4. ब्लॉक स्तर (Block Level)
ब्लॉक स्तर पर विभिन्न शिक्षा अधिकारियों द्वारा—
- विद्यालयों का निरीक्षण।
- शिक्षकों को शैक्षणिक सहयोग।
- प्रशिक्षण।
- विद्यालयों की समस्याओं का समाधान।
- समावेशी शिक्षा की निगरानी।
की जाती है।
5. विद्यालय स्तर (School Level)
विद्यालय स्तर पर—
- प्रधानाध्यापक
- सामान्य शिक्षक
- विशेष शिक्षक
- स्कूल प्रबंधन समिति (SMC)
- अभिभावक
सभी मिलकर योजना का क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हैं।
समग्र शिक्षा में विद्यालय प्रबंधन समिति (School Management Committee – SMC) की भूमिका
विद्यालय प्रबंधन समिति विद्यालय के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसके प्रमुख कार्य—
- विद्यालय विकास योजना (School Development Plan) बनाना।
- विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।
- विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना।
- समुदाय की भागीदारी बढ़ाना।
- दिव्यांग बच्चों के प्रवेश को प्रोत्साहित करना।
- विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं की निगरानी करना।
- विद्यालय के वित्तीय उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखना।
समग्र शिक्षा में विशेष शिक्षक (Special Educator) की भूमिका
विशेष शिक्षक समग्र शिक्षा योजना की सफलता का प्रमुख आधार हैं। उनका कार्य केवल दिव्यांग बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाना भी है।
1. दिव्यांग बच्चों की पहचान
विशेष शिक्षक—
- दिव्यांग बच्चों की पहचान करते हैं।
- उनकी कार्यात्मक क्षमता का आकलन करते हैं।
- शैक्षिक आवश्यकताओं का निर्धारण करते हैं।
2. व्यक्तिगत शैक्षिक योजना (IEP) तैयार करना
प्रत्येक बच्चे के लिए—
- सीखने के लक्ष्य निर्धारित करना।
- उपयुक्त शिक्षण रणनीतियाँ बनाना।
- नियमित मूल्यांकन करना।
- आवश्यक संशोधन करना।
3. सामान्य शिक्षकों को सहयोग देना
विशेष शिक्षक सामान्य शिक्षकों को बताते हैं—
- दिव्यांग बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए।
- कौन-सी शिक्षण सामग्री उपयोग करें।
- मूल्यांकन कैसे करें।
- पाठ्यक्रम में आवश्यक अनुकूलन कैसे करें।
4. अभिभावकों का मार्गदर्शन
विशेष शिक्षक अभिभावकों को—
- घर पर अभ्यास करवाने।
- व्यवहार प्रबंधन।
- सहायक उपकरणों के उपयोग।
- दैनिक जीवन कौशल विकसित करने।
के बारे में मार्गदर्शन देते हैं।
5. सहायक उपकरणों का उपयोग
विशेष शिक्षक बच्चों को—
- ब्रेल
- श्रवण यंत्र
- व्हीलचेयर
- लो विज़न एड्स
- संचार उपकरण
का सही उपयोग सिखाते हैं।
6. संसाधन कक्ष का संचालन
विशेष शिक्षक—
- Resource Room का संचालन करते हैं।
- आवश्यक शिक्षण सामग्री तैयार करते हैं।
- व्यक्तिगत एवं छोटे समूह में शिक्षण प्रदान करते हैं।
7. समावेशी वातावरण तैयार करना
विद्यालय में—
- भेदभाव समाप्त करना।
- सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।
- सहपाठियों को संवेदनशील बनाना।
- सहयोगात्मक अधिगम को बढ़ावा देना।
भी विशेष शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
सामान्य शिक्षक (General Teacher) की भूमिका
समग्र शिक्षा में सामान्य शिक्षक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
उनकी प्रमुख भूमिकाएँ—
- सभी बच्चों को समान अवसर देना।
- कक्षा में समावेशी वातावरण बनाना।
- पाठ्यक्रम में आवश्यक लचीलापन अपनाना।
- विशेष शिक्षक के साथ समन्वय करना।
- वैकल्पिक शिक्षण विधियों का प्रयोग करना।
- दिव्यांग बच्चों का सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना।
अभिभावकों की भूमिका
समग्र शिक्षा में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक मानी गई है।
उनकी प्रमुख भूमिकाएँ—
- बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।
- विद्यालय के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखना।
- घर पर अध्ययन में सहयोग करना।
- IEP के लक्ष्यों को पूरा करने में सहायता करना।
- विद्यालयी गतिविधियों में भाग लेना।
- बच्चे की प्रगति पर नियमित चर्चा करना।
समुदाय (Community) की भूमिका
समुदाय शिक्षा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
समुदाय द्वारा—
- शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना।
- विद्यालय विकास में सहयोग करना।
- दिव्यांग बच्चों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।
- विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों को पुनः जोड़ना।
- सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना।
जैसे कार्य किए जाते हैं।
समग्र शिक्षा में शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Capacity Building)
शिक्षकों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं।
प्रमुख प्रशिक्षण क्षेत्रों में शामिल हैं—
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020
- समावेशी शिक्षा
- FLN
- ICT आधारित शिक्षण
- दक्षता आधारित शिक्षा
- अनुभवात्मक अधिगम
- जीवन कौशल शिक्षा
- मूल्यांकन तकनीक
- दिव्यांगता-विशिष्ट शिक्षण रणनीतियाँ
- भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) का परिचय (जहाँ आवश्यक हो)
समग्र शिक्षा में सीखने के परिणाम (Learning Outcomes)
योजना में केवल परीक्षा परिणामों पर नहीं, बल्कि वास्तविक अधिगम पर बल दिया गया है।
इसलिए विद्यालयों में—
- दक्षता आधारित मूल्यांकन।
- सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के सिद्धांतों के अनुरूप सीखने की प्रगति पर ध्यान।
- गतिविधि आधारित परीक्षण।
- परियोजना आधारित मूल्यांकन।
- मौखिक एवं व्यावहारिक मूल्यांकन।
- व्यक्तिगत प्रगति का रिकॉर्ड।
रखा जाता है।
समग्र शिक्षा में तकनीक (Technology Integration)
विद्यालयों में तकनीक का उपयोग बढ़ाने के लिए—
- स्मार्ट कक्षाएँ।
- डिजिटल बोर्ड।
- कम्प्यूटर लैब।
- टैबलेट।
- ई-कंटेंट।
- DIKSHA प्लेटफ़ॉर्म।
- QR आधारित पुस्तकें।
- ऑनलाइन शिक्षक प्रशिक्षण।
- डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली।
को प्रोत्साहित किया जाता है।
समग्र शिक्षा, 2022 एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 का संबंध
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समग्र शिक्षा, 2022 एक प्रमुख माध्यम है। इस योजना के माध्यम से विद्यालयी स्तर पर NEP-2020 के अनेक प्रावधानों को लागू किया जा रहा है।
दोनों के बीच प्रमुख संबंध निम्नलिखित हैं—
1. 5+3+3+4 पाठ्यचर्या संरचना का समर्थन
NEP-2020 ने पारंपरिक 10+2 व्यवस्था के स्थान पर 5+3+3+4 संरचना लागू की।
समग्र शिक्षा के माध्यम से—
- बालवाटिका (Balvatika) की स्थापना।
- ECCE को विद्यालय प्रणाली से जोड़ना।
- प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक सतत अधिगम सुनिश्चित करना।
जैसे कार्य किए जा रहे हैं।
2. आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN)
NEP-2020 का लक्ष्य है कि कक्षा 3 तक प्रत्येक बच्चा पढ़ना, लिखना और मूलभूत गणना करना सीख जाए।
समग्र शिक्षा के अंतर्गत—
- निपुण भारत मिशन (NIPUN Bharat Mission) के क्रियान्वयन में सहयोग।
- भाषा एवं गणित आधारित शिक्षण सामग्री।
- शिक्षक प्रशिक्षण।
- अधिगम परिणामों का नियमित मूल्यांकन।
को बढ़ावा दिया गया है।
3. समावेशी शिक्षा
NEP-2020 में प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमता एवं आवश्यकता के अनुसार शिक्षा देने पर बल दिया गया है।
समग्र शिक्षा इसी उद्देश्य की पूर्ति करती है—
- दिव्यांग बच्चों का सामान्य विद्यालयों में प्रवेश।
- आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता।
- विशेष शिक्षकों की नियुक्ति।
- सहायक उपकरण।
- व्यक्तिगत शैक्षिक योजना (IEP)।
- विद्यालयों को बाधारहित (Barrier-Free) बनाना।
4. बहुभाषी शिक्षा
NEP-2020 मातृभाषा/स्थानीय भाषा में शिक्षा पर बल देती है।
समग्र शिक्षा—
- स्थानीय भाषा में शिक्षण।
- बहुभाषी शिक्षण सामग्री।
- बच्चों की भाषाई विविधता का सम्मान।
को प्रोत्साहित करती है।
5. डिजिटल शिक्षा
NEP-2020 के अनुरूप समग्र शिक्षा में—
- DIKSHA Portal
- Smart Classroom
- ICT Labs
- डिजिटल सामग्री
- ऑनलाइन शिक्षक प्रशिक्षण
को बढ़ावा दिया जाता है।
6. कौशल एवं व्यावसायिक शिक्षा
समग्र शिक्षा के माध्यम से—
- व्यावसायिक विषयों का विस्तार।
- स्थानीय रोजगार आधारित कौशल।
- कार्यानुभव आधारित शिक्षा।
- उद्यमिता कौशल।
पर विशेष बल दिया गया है।
7. शिक्षक विकास
NEP-2020 के अनुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार प्रशिक्षित शिक्षक हैं।
समग्र शिक्षा के माध्यम से—
- सतत व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development – CPD)
- विषय आधारित प्रशिक्षण।
- समावेशी शिक्षा प्रशिक्षण।
- ICT प्रशिक्षण।
- ऑनलाइन प्रशिक्षण।
आयोजित किए जाते हैं।
समग्र शिक्षा के अंतर्गत दिव्यांग बच्चों (CWSN) हेतु प्रमुख हस्तक्षेप (Major Interventions)
समग्र शिक्षा में दिव्यांग बच्चों के लिए अनेक विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनका उद्देश्य उनकी शिक्षा को सुलभ, समान एवं प्रभावी बनाना है।
1. शून्य अस्वीकृति नीति (Zero Rejection Policy)
समग्र शिक्षा में यह सिद्धांत अपनाया गया है कि कोई भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।
यदि बच्चा किसी कारणवश नियमित विद्यालय नहीं जा सकता, तो उसकी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त शैक्षिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
2. प्रारंभिक पहचान एवं मूल्यांकन
दिव्यांग बच्चों की—
- शीघ्र पहचान।
- चिकित्सकीय जाँच।
- कार्यात्मक मूल्यांकन।
- शैक्षिक आवश्यकता का निर्धारण।
किया जाता है।
3. समावेशी कक्षा (Inclusive Classroom)
कक्षा में—
- समान अवसर।
- भेदभाव रहित वातावरण।
- सहयोगात्मक अधिगम।
- सहपाठी सहायता (Peer Support)।
- सकारात्मक व्यवहार।
को बढ़ावा दिया जाता है।
4. पाठ्यक्रम अनुकूलन (Curricular Adaptation)
आवश्यकता के अनुसार—
- सरल भाषा।
- अतिरिक्त समय।
- वैकल्पिक गतिविधियाँ।
- संशोधित शिक्षण सामग्री।
- उपयुक्त मूल्यांकन तकनीक।
का उपयोग किया जाता है।
5. सहायक तकनीक (Assistive Technology)
समग्र शिक्षा में आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया गया है।
जैसे—
- स्क्रीन रीडर।
- ब्रेल डिस्प्ले।
- ऑडियो पुस्तकें।
- स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक।
- टेक्स्ट-टू-स्पीच सॉफ्टवेयर।
- Augmentative and Alternative Communication (AAC) उपकरण।
- डिजिटल मैग्निफायर।
- विशेष शैक्षिक ऐप्स।
6. संसाधन कक्ष (Resource Room)
जहाँ आवश्यकता हो, वहाँ संसाधन कक्ष विकसित किए जाते हैं।
यहाँ—
- व्यक्तिगत शिक्षण।
- उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching)।
- सहायक उपकरणों का उपयोग।
- विशेष शिक्षण सामग्री।
उपलब्ध कराई जाती है।
7. अभिभावक सहभागिता
अभिभावकों को—
- नियमित परामर्श।
- प्रशिक्षण।
- घर पर अभ्यास की जानकारी।
- IEP के क्रियान्वयन में सहयोग।
प्रदान किया जाता है।
समग्र शिक्षा, 2022 की प्रमुख उपलब्धियाँ
समग्र शिक्षा के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा में अनेक महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं—
- विद्यालयी शिक्षा का एकीकृत विकास।
- NEP-2020 के क्रियान्वयन को गति मिली।
- समावेशी शिक्षा को सुदृढ़ किया गया।
- दिव्यांग बच्चों का नामांकन बढ़ा।
- आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान पर विशेष ध्यान दिया गया।
- डिजिटल शिक्षा का विस्तार हुआ।
- विद्यालयों के आधारभूत ढाँचे में सुधार हुआ।
- शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में वृद्धि हुई।
- विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करने के प्रयास मजबूत हुए।
- समुदाय एवं अभिभावकों की भागीदारी बढ़ी।
समग्र शिक्षा, 2022 से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
| विषय | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| योजना का नाम | समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) |
| योजना का स्वरूप | केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) |
| प्रारम्भ | वर्ष 2018-19 |
| संशोधित स्वरूप | NEP-2020 के अनुरूप 2021-22 से विस्तारित प्रावधान; 2022 में राज्यों द्वारा व्यापक क्रियान्वयन |
| मंत्रालय | शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार |
| शिक्षा स्तर | पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक |
| मुख्य उद्देश्य | समान, गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा |
| विशेष फोकस | CWSN, FLN, ECCE, Digital Education, Teacher Training |
| प्रमुख नीति | राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 |
| समावेशी शिक्षा | योजना का प्रमुख घटक |
| दिव्यांग बच्चों हेतु | IEP, Resource Room, Assistive Devices, Special Educator, Barrier-Free School |
| FLN मिशन | निपुण भारत मिशन के साथ समन्वय |
| वित्तीय स्वरूप | केंद्र एवं राज्य की साझेदारी |
RPSC School Lecturer (Special Education) परीक्षा हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु
- समग्र शिक्षा एक एकीकृत विद्यालयी शिक्षा योजना है।
- यह पूर्व-प्राथमिक से वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक लागू होती है।
- इसका उद्देश्य समान, गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा प्रदान करना है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के क्रियान्वयन का प्रमुख माध्यम है।
- समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) इसका केंद्रीय तत्व है।
- Children with Special Needs (CWSN) के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
- विशेष शिक्षक (Special Educator) समावेशी शिक्षा के प्रमुख कार्यकर्ता हैं।
- IEP (Individualized Education Plan) प्रत्येक आवश्यकता-आधारित शिक्षण का महत्वपूर्ण आधार है।
- Barrier-Free Access दिव्यांग बच्चों के लिए अनिवार्य सुविधा है।
- FLN, ECCE, Digital Education, Teacher Capacity Building समग्र शिक्षा के प्रमुख स्तंभ हैं।
- School Management Committee (SMC) विद्यालय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- Zero Rejection Policy के अनुसार किसी भी दिव्यांग बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
- समग्र शिक्षा RPwD Act, 2016, RTE Act, 2009 तथा NEP, 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करती है।
संभावित वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1. समग्र शिक्षा योजना किस स्तर की शिक्षा को कवर करती है?
उत्तर: पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक।
प्रश्न 2. समग्र शिक्षा किस प्रकार की योजना है?
उत्तर: केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme)।
प्रश्न 3. समग्र शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण घटक कौन-सा है?
उत्तर: समावेशी शिक्षा (Inclusive Education)।
प्रश्न 4. समग्र शिक्षा किस राष्ट्रीय नीति के क्रियान्वयन का प्रमुख माध्यम है?
उत्तर: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020।
प्रश्न 5. IEP का पूर्ण रूप क्या है?
उत्तर: Individualized Education Plan (व्यक्तिगत शैक्षिक योजना)।
प्रश्न 6. FLN का पूर्ण रूप क्या है?
उत्तर: Foundational Literacy and Numeracy।
प्रश्न 7. CWSN का पूर्ण रूप क्या है?
उत्तर: Children with Special Needs।
प्रश्न 8. विद्यालयों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने के लिए किस प्रकार की व्यवस्था आवश्यक है?
उत्तर: Barrier-Free Access (रैम्प, हैंडरेल, दिव्यांग-अनुकूल शौचालय आदि)।
प्रश्न 9. समग्र शिक्षा में शिक्षक प्रशिक्षण का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: गुणवत्तापूर्ण, समावेशी एवं दक्षता-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना।
प्रश्न 10. समग्र शिक्षा में FLN का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उत्तर: कक्षा 3 तक सभी बच्चों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान विकसित करना।
Disclaimer:
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