RPSC FIRST GRADE SPECIAL EDUCATION NOTES

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 – अध्याय 6 National Education Policy (NEP) 2020 (Chapter-06) | RPSC First Grade Special Education Notes

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 – अध्याय 6

समान एवं समावेशी शिक्षा (Equitable and Inclusive Education: Learning for All)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का परिचय

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy-NEP) 2020 भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020 में लागू की गई नई शिक्षा नीति है। इसे 29 जुलाई 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) द्वारा स्वीकृत किया गया। यह नीति वर्ष 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति तथा 1992 के संशोधित कार्यक्रम (Programme of Action) का स्थान लेती है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य भारत की शिक्षा व्यवस्था को समावेशी (Inclusive), समान (Equitable), गुणवत्तापूर्ण (Quality), बहुआयामी (Multidisciplinary), कौशल आधारित (Skill-based) तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।

विशेष शिक्षा के संदर्भ में अध्याय 6 (Chapter 6) अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उन बच्चों एवं विद्यार्थियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है जो किसी भी प्रकार से सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक या शारीरिक कारणों से शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।


अध्याय 6 का उद्देश्य

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अध्याय 6 का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि—

  • प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो।
  • किसी भी विद्यार्थी के साथ जाति, धर्म, लिंग, भाषा, विकलांगता, आर्थिक स्थिति या भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर भेदभाव न हो।
  • विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Disabilities – CwDs) को समान अवसर प्रदान किए जाएँ।
  • विद्यालयों को समावेशी बनाया जाए।
  • शिक्षा व्यवस्था सभी बच्चों की विविध आवश्यकताओं के अनुसार विकसित की जाए।
  • कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का अर्थ

समावेशी शिक्षा ऐसी शिक्षा व्यवस्था है जिसमें सभी बच्चे, चाहे वे सामान्य हों या दिव्यांग, एक ही विद्यालय में अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्राप्त करते हैं।

समावेशी शिक्षा में—

  • प्रत्येक विद्यार्थी को समान सम्मान दिया जाता है।
  • प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाता है।
  • आवश्यकतानुसार विशेष शिक्षण सामग्री एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • विद्यालय का वातावरण सभी के लिए अनुकूल बनाया जाता है।
  • शिक्षक विविध शिक्षण विधियों का उपयोग करते हैं।
  • किसी भी बच्चे को उसकी अक्षमता के कारण अलग नहीं किया जाता।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 समावेशी शिक्षा को केवल दिव्यांग बच्चों तक सीमित नहीं मानती बल्कि सभी प्रकार के वंचित एवं कमजोर वर्गों को इसमें सम्मिलित करती है।


समानता (Equity) और समावेशन (Inclusion) में अंतर

समानता (Equity)समावेशन (Inclusion)
प्रत्येक व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुसार सहायता देना।सभी व्यक्तियों को एक साथ समान अवसरों के साथ शिक्षा प्रदान करना।
आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सुविधाएँ उपलब्ध कराना।सभी को शिक्षा प्रणाली का समान भाग बनाना।
व्यक्तिगत आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना।भेदभाव समाप्त कर सभी को शामिल करना।
परिणामों में समानता लाने का प्रयास।सहभागिता और समान अवसर सुनिश्चित करना।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 दोनों सिद्धांतों को एक साथ अपनाती है।


सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समूह (Socio-Economically Disadvantaged Groups – SEDGs)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने पहली बार SEDGs (Socio-Economically Disadvantaged Groups) शब्द का व्यापक उपयोग किया है।

SEDGs से आशय उन समूहों से है जो किसी कारणवश शिक्षा में पीछे रह जाते हैं।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

सामाजिक आधार पर

  • अनुसूचित जातियाँ (SC)
  • अनुसूचित जनजातियाँ (ST)
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
  • घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु जनजातियाँ
  • अल्पसंख्यक समुदाय
  • सामाजिक रूप से वंचित वर्ग

आर्थिक आधार पर

  • आर्थिक रूप से कमजोर परिवार
  • गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार
  • निम्न आय वर्ग

भौगोलिक आधार पर

  • ग्रामीण क्षेत्र
  • दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र
  • जनजातीय क्षेत्र
  • सीमावर्ती क्षेत्र
  • आकांक्षी जिले (Aspirational Districts)

लिंग आधारित

  • बालिकाएँ
  • ट्रांसजेंडर विद्यार्थी

दिव्यांगता आधारित

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में दिव्यांग बच्चों (Children with Disabilities – CwDs) को SEDGs का महत्वपूर्ण भाग माना गया है।

इनमें RPwD Act, 2016 के अंतर्गत आने वाले सभी प्रकार के दिव्यांग विद्यार्थी सम्मिलित हैं।


विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Disabilities – CwDs) के लिए नीति की दृष्टि

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्पष्ट रूप से कहती है कि—

दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का वही अधिकार है जो अन्य सभी बच्चों को प्राप्त है।

नीति का उद्देश्य केवल विद्यालय में प्रवेश दिलाना नहीं बल्कि—

  • सीखने में भागीदारी,
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,
  • समान अवसर,
  • स्वतंत्र जीवन,
  • सामाजिक सहभागिता,
  • आत्मनिर्भरता

को सुनिश्चित करना है।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अपनाए गए प्रमुख सिद्धांत

समान अवसर

प्रत्येक दिव्यांग विद्यार्थी को अन्य विद्यार्थियों के समान शिक्षा का अवसर प्राप्त होगा।


भेदभाव रहित शिक्षा

विद्यालयों में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं होगा।


पहुँच योग्य विद्यालय (Accessible Schools)

विद्यालयों में निम्न सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी—

  • रैम्प
  • रेलिंग
  • व्हीलचेयर अनुकूल मार्ग
  • सुलभ शौचालय
  • उपयुक्त फर्नीचर
  • संकेतक (Signages)
  • सुरक्षित परिसर

सार्वभौमिक अधिगम रूपरेखा (Universal Design for Learning – UDL)

शिक्षण प्रक्रिया ऐसी बनाई जाएगी जिससे विभिन्न प्रकार के विद्यार्थी अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार सीख सकें।

UDL का उद्देश्य है—

  • सीखने के अनेक तरीके
  • अभिव्यक्ति के अनेक माध्यम
  • सहभागिता के अनेक अवसर

व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार सहायता

प्रत्येक दिव्यांग विद्यार्थी की आवश्यकता के अनुसार—

  • विशेष शिक्षक
  • सहायक उपकरण
  • शिक्षण सामग्री
  • वैकल्पिक मूल्यांकन
  • व्यक्तिगत सहयोग

उपलब्ध कराया जाएगा।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में समावेशी शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य

नीति के अनुसार समावेशी शिक्षा के मुख्य उद्देश्य हैं—

  • सभी बच्चों का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करना।
  • ड्रॉपआउट दर कम करना।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना।
  • दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए बाधारहित वातावरण बनाना।
  • सीखने में आने वाली बाधाओं को कम करना।
  • सभी विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धियों में सुधार करना।
  • लैंगिक समानता को बढ़ावा देना।
  • सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना।
  • शिक्षा में समान अवसर उपलब्ध कराना।
  • प्रत्येक विद्यार्थी की प्रतिभा का विकास करना।

विशेष शिक्षा के संदर्भ में अध्याय 6 का महत्व

विशेष शिक्षा के क्षेत्र में अध्याय 6 इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह—

  • समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देता है।
  • RPwD Act, 2016 के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था विकसित करने पर बल देता है।
  • दिव्यांग बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है।
  • विशेष शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण मानता है।
  • सहायक तकनीकों (Assistive Technology) के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
  • विद्यालयों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने पर बल देता है।
  • प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार शिक्षण की वकालत करता है।

दिव्यांग बच्चों (Children with Disabilities – CwDs) के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विशेष प्रावधान

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का स्पष्ट उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांग बच्चे (Children with Disabilities – CwDs) भी अन्य बच्चों की तरह गुणवत्तापूर्ण, समान एवं समावेशी शिक्षा प्राप्त कर सकें। नीति इस बात पर विशेष बल देती है कि दिव्यांगता किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए।

इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए नीति में अनेक विशेष प्रावधान किए गए हैं।


दिव्यांग बच्चों को समान अवसर (Equal Opportunity)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार प्रत्येक दिव्यांग विद्यार्थी को—

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अधिकार प्राप्त होगा।
  • अन्य विद्यार्थियों के साथ अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
  • किसी भी प्रकार के भेदभाव से संरक्षण मिलेगा।
  • शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में समान भागीदारी का अवसर मिलेगा।
  • आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी।

नीति यह स्वीकार करती है कि समान अवसर का अर्थ केवल विद्यालय में प्रवेश देना नहीं, बल्कि शिक्षा प्राप्त करने के लिए आवश्यक सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराना भी है।


समावेशी विद्यालय (Inclusive Schools)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य ऐसे विद्यालय विकसित करना है जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुसार सीख सके।

समावेशी विद्यालयों की प्रमुख विशेषताएँ—

  • सभी बच्चों के लिए खुला प्रवेश।
  • दिव्यांग एवं सामान्य विद्यार्थी साथ-साथ शिक्षा प्राप्त करें।
  • शिक्षक सभी प्रकार के विद्यार्थियों के साथ कार्य करने में सक्षम हों।
  • विद्यालय का वातावरण सहयोगात्मक एवं सम्मानजनक हो।
  • व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध हो।
  • किसी भी विद्यार्थी को अलग-थलग न किया जाए।

बाधारहित पहुँच (Barrier-Free Access)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार प्रत्येक विद्यालय को सुगम (Accessible) बनाया जाना आवश्यक है।

बाधारहित विद्यालय की प्रमुख विशेषताएँ—

  • रैम्प (Ramp)
  • हैंड रेलिंग (Hand Rail)
  • व्हीलचेयर अनुकूल मार्ग
  • सुलभ शौचालय
  • चौड़े प्रवेश द्वार
  • सुरक्षित सीढ़ियाँ
  • लिफ्ट (जहाँ आवश्यक हो)
  • ब्रेल संकेतक
  • स्पर्शनीय मार्ग (Tactile Path)
  • उचित प्रकाश व्यवस्था
  • श्रवण बाधित विद्यार्थियों के लिए दृश्य संकेत

इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांग विद्यार्थी बिना किसी शारीरिक बाधा के विद्यालय का उपयोग कर सकें।


सहायक उपकरण एवं सहायक तकनीक (Assistive Devices and Assistive Technology)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आधुनिक सहायक तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करती है।

सहायक तकनीक का उद्देश्य विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता एवं स्वतंत्रता को बढ़ाना है।

कुछ प्रमुख सहायक उपकरण—

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए

  • ब्रेल पुस्तकें
  • ब्रेल स्लेट एवं स्टाइलस
  • ब्रेल डिस्प्ले
  • ब्रेल एम्बॉसर
  • स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर
  • स्क्रीन मैग्निफायर
  • ऑडियो पुस्तकें
  • स्मार्ट केन
  • OCR आधारित रीडिंग उपकरण

श्रवण बाधित विद्यार्थियों के लिए

  • हियरिंग एड
  • डिजिटल हियरिंग एड
  • कॉक्लियर इम्प्लांट
  • एफ.एम. सिस्टम
  • इंडक्शन लूप सिस्टम
  • स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक
  • वीडियो आधारित शिक्षण सामग्री
  • कैप्शनयुक्त वीडियो

चलन बाधित विद्यार्थियों के लिए

  • व्हीलचेयर
  • वॉकर
  • बैसाखी
  • कृत्रिम अंग
  • अनुकूलित फर्नीचर
  • विशेष लेखन उपकरण
  • कम्प्यूटर आधारित इनपुट डिवाइस

बौद्धिक एवं अधिगम कठिनाई वाले विद्यार्थियों के लिए

  • चित्र आधारित शिक्षण सामग्री
  • इंटरैक्टिव डिजिटल कंटेंट
  • शैक्षिक ऐप
  • सरल भाषा में अध्ययन सामग्री
  • मल्टीमीडिया शिक्षण

सहायक तकनीक का महत्व

सहायक तकनीक—

  • सीखने में स्वतंत्रता बढ़ाती है।
  • आत्मविश्वास विकसित करती है।
  • सीखने की गति में सुधार करती है।
  • संचार को आसान बनाती है।
  • कक्षा में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करती है।
  • समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाती है।

भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language – ISL)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language – ISL) के विकास एवं उपयोग पर विशेष बल दिया गया है।

नीति के अनुसार—

  • भारतीय सांकेतिक भाषा को पूरे देश में मानकीकृत किया जाएगा।
  • श्रवण बाधित विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री विकसित की जाएगी।
  • भारतीय सांकेतिक भाषा में पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
  • शिक्षकों को ISL का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • डिजिटल सामग्री भी सांकेतिक भाषा में विकसित की जाएगी।

भारतीय सांकेतिक भाषा का महत्व

ISL के माध्यम से—

  • श्रवण बाधित विद्यार्थियों का संचार बेहतर होता है।
  • शिक्षा अधिक प्रभावी बनती है।
  • सीखने की गति बढ़ती है।
  • भाषा विकास में सहायता मिलती है।
  • सामाजिक सहभागिता में वृद्धि होती है।

ब्रेल शिक्षा (Braille Education)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ब्रेल शिक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण मानती है।

नीति के अनुसार—

  • ब्रेल पुस्तकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
  • डिजिटल ब्रेल संसाधनों का विकास किया जाएगा।
  • प्रशिक्षित ब्रेल शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • ब्रेल के साथ-साथ डिजिटल तकनीकों का उपयोग भी बढ़ाया जाएगा।

वैकल्पिक एवं संवर्धित संचार (Alternative and Augmentative Communication – AAC)

कुछ दिव्यांग विद्यार्थी सामान्य रूप से बोल नहीं पाते या प्रभावी संचार नहीं कर पाते।

ऐसे विद्यार्थियों के लिए नीति Alternative and Augmentative Communication (AAC) के उपयोग को प्रोत्साहित करती है।

AAC के अंतर्गत—

  • चित्र आधारित संचार
  • संकेत कार्ड
  • संचार बोर्ड
  • स्पीच जनरेटिंग डिवाइस
  • टैबलेट आधारित संचार ऐप
  • आई-गेज़ तकनीक
  • प्रतीक आधारित संचार प्रणाली

का उपयोग किया जा सकता है।


सार्वभौमिक अधिगम रूपरेखा (Universal Design for Learning – UDL)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षण को सभी विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त बनाने हेतु Universal Design for Learning (UDL) अपनाने पर बल दिया गया है।

UDL का उद्देश्य ऐसा शिक्षण वातावरण तैयार करना है जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी अपनी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार सीख सके।

UDL के तीन प्रमुख सिद्धांत हैं—

1. सीखने के अनेक माध्यम (Multiple Means of Representation)

विद्यार्थियों को जानकारी विभिन्न रूपों में उपलब्ध कराई जाए—

  • चित्र
  • वीडियो
  • ऑडियो
  • मॉडल
  • गतिविधि
  • डिजिटल सामग्री
  • ब्रेल
  • सांकेतिक भाषा

2. अभिव्यक्ति के अनेक माध्यम (Multiple Means of Action and Expression)

विद्यार्थी अपनी सीख को विभिन्न तरीकों से व्यक्त कर सकें—

  • लिखकर
  • बोलकर
  • चित्र बनाकर
  • परियोजना द्वारा
  • प्रस्तुतीकरण द्वारा
  • डिजिटल माध्यम से
  • सांकेतिक भाषा के माध्यम से

3. सहभागिता के अनेक माध्यम (Multiple Means of Engagement)

प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी रुचि एवं क्षमता के अनुसार सीखने के अवसर दिए जाएँ—

  • समूह कार्य
  • गतिविधि आधारित शिक्षण
  • खेल आधारित शिक्षण
  • परियोजना कार्य
  • डिजिटल अधिगम
  • सहयोगात्मक अधिगम

व्यक्तिगत सहायता (Individualized Support)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 यह स्वीकार करती है कि प्रत्येक दिव्यांग विद्यार्थी की आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं।

इसलिए विद्यालयों को आवश्यकता के अनुसार—

  • व्यक्तिगत शैक्षिक सहयोग
  • विशेष शिक्षण सामग्री
  • सहायक उपकरण
  • व्यक्तिगत शिक्षण रणनीति
  • विशेष शिक्षक का सहयोग
  • परिवार की सहभागिता

उपलब्ध करानी चाहिए।


संसाधन केंद्र (Resource Centres)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 संसाधन केंद्रों (Resource Centres) के विकास पर बल देती है।

इनका उद्देश्य विद्यालयों, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों को आवश्यक विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराना है।

संसाधन केंद्रों में उपलब्ध सेवाएँ—

  • विशेष शिक्षण सामग्री
  • सहायक उपकरण
  • विशेषज्ञ परामर्श
  • शिक्षक प्रशिक्षण
  • अभिभावक मार्गदर्शन
  • मूल्यांकन सेवाएँ
  • पुनर्वास संबंधी सहायता

संसाधन केंद्रों का महत्व

संसाधन केंद्र—

  • समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाते हैं।
  • विशेष शिक्षकों को सहयोग प्रदान करते हैं।
  • विद्यालयों को विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराते हैं।
  • दिव्यांग विद्यार्थियों की सीखने की गुणवत्ता बढ़ाते हैं।
  • अभिभावकों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा में डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर विशेष बल देती है।

दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग के प्रमुख क्षेत्र—

  • ई-लर्निंग
  • डिजिटल पुस्तकें
  • ऑडियो पुस्तकें
  • स्क्रीन रीडर
  • ऑनलाइन कक्षाएँ
  • AI आधारित शिक्षण
  • अनुकूलित शिक्षण सॉफ्टवेयर
  • वर्चुअल लर्निंग
  • डिजिटल मूल्यांकन

प्रौद्योगिकी के माध्यम से दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को अधिक सुलभ, लचीला और प्रभावी बनाया जा सकता है।

विशेष शिक्षकों (Special Educators) की भूमिका

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में यह स्पष्ट किया गया है कि समावेशी शिक्षा की सफलता के लिए विशेष शिक्षकों (Special Educators) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेष शिक्षक केवल दिव्यांग विद्यार्थियों को पढ़ाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे सामान्य शिक्षकों, अभिभावकों तथा विद्यालय प्रशासन के साथ मिलकर समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाते हैं।

विशेष शिक्षकों की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं—

  • दिव्यांग विद्यार्थियों की शैक्षिक आवश्यकताओं का आकलन करना।
  • व्यक्तिगत शिक्षण योजना (Individualized Education Plan – IEP) बनाने में सहयोग देना।
  • सामान्य शिक्षकों को उचित शिक्षण रणनीतियाँ बताना।
  • विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त सहायक उपकरणों के उपयोग में सहायता करना।
  • अभिभावकों को परामर्श एवं मार्गदर्शन देना।
  • विद्यार्थियों की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करना।
  • समावेशी कक्षा प्रबंधन में सहयोग देना।
  • विद्यालय में समावेशी वातावरण विकसित करना।

सामान्य शिक्षकों (General Teachers) का प्रशिक्षण

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार केवल विशेष शिक्षक ही नहीं, बल्कि सभी सामान्य शिक्षकों को भी समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों एवं व्यवहारिक पक्ष का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

शिक्षक प्रशिक्षण में निम्न विषयों को शामिल करने पर बल दिया गया है—

  • समावेशी शिक्षा की अवधारणा।
  • विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं की समझ।
  • कक्षा में विविधता का प्रबंधन।
  • शिक्षण-अधिगम की अनुकूलित विधियाँ।
  • सहायक तकनीकों का उपयोग।
  • भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) का मूल ज्ञान।
  • ब्रेल एवं अन्य सुलभ शिक्षण संसाधनों की जानकारी।
  • सकारात्मक एवं संवेदनशील व्यवहार का विकास।

इससे सामान्य शिक्षक भी विविध आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से शिक्षित कर सकेंगे।


शिक्षक शिक्षा संस्थानों की भूमिका

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों में समावेशी शिक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।

शिक्षक शिक्षा संस्थानों का दायित्व होगा कि वे—

  • समावेशी शिक्षा आधारित पाठ्यक्रम विकसित करें।
  • व्यवहारिक प्रशिक्षण (Practicum) उपलब्ध कराएँ।
  • दिव्यांगता संबंधी आधुनिक ज्ञान प्रदान करें।
  • सहायक तकनीकों के उपयोग का प्रशिक्षण दें।
  • शोध एवं नवाचार को बढ़ावा दें।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (NCTE) की भूमिका

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (National Council for Teacher Education – NCTE) को शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

NCTE की प्रमुख भूमिकाएँ—

  • शिक्षक शिक्षा के मानक निर्धारित करना।
  • शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में समावेशी शिक्षा को सम्मिलित करना।
  • शिक्षक शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
  • आधुनिक एवं बहुआयामी शिक्षक शिक्षा प्रणाली विकसित करना।
  • नई शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना।

भारतीय पुनर्वास परिषद् (Rehabilitation Council of India – RCI) की भूमिका

विशेष शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय पुनर्वास परिषद् (RCI) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) के अनुरूप प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों की उपलब्धता पर बल देती है।

RCI की प्रमुख भूमिकाएँ—

  • विशेष शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मान्यता देना।
  • विशेष शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित करना।
  • पुनर्वास पेशेवरों का पंजीकरण करना।
  • प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखना।
  • सतत व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development – CPD) को प्रोत्साहित करना।
  • दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास एवं शिक्षा के क्षेत्र में मानक विकसित करना।

विद्यालय परिसर (School Complexes) की अवधारणा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में School Complex/School Cluster की अवधारणा प्रस्तुत की गई है।

इस व्यवस्था के अंतर्गत निकटवर्ती विद्यालयों को एक समूह के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो सके।

विशेष शिक्षा के संदर्भ में इसके लाभ—

  • विशेष शिक्षकों की सेवाओं का साझा उपयोग।
  • सहायक उपकरणों की उपलब्धता।
  • संसाधन कक्ष (Resource Room) का उपयोग।
  • विशेषज्ञों की सेवाएँ।
  • परामर्श एवं मूल्यांकन सुविधाएँ।
  • शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम।

इससे छोटे विद्यालयों में भी गुणवत्तापूर्ण समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी।


संसाधन कक्ष (Resource Room)

यद्यपि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य समावेशी कक्षाओं को बढ़ावा देना है, फिर भी आवश्यकता होने पर संसाधन कक्षों की व्यवस्था का समर्थन किया गया है।

संसाधन कक्ष में उपलब्ध सुविधाएँ—

  • विशेष शिक्षण सामग्री।
  • ब्रेल संसाधन।
  • श्रवण उपकरण।
  • सहायक तकनीक।
  • व्यक्तिगत शिक्षण।
  • चिकित्सीय एवं पुनर्वास संबंधी सहायता।
  • व्यवहार प्रबंधन सेवाएँ।

संसाधन कक्ष का उद्देश्य विद्यार्थियों को मुख्यधारा की कक्षा से अलग करना नहीं, बल्कि उनकी अतिरिक्त आवश्यकताओं की पूर्ति करना है।


गृह-आधारित शिक्षा (Home-based Education)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्वीकार करती है कि कुछ ऐसे दिव्यांग बच्चे हो सकते हैं जिनकी दिव्यांगता अत्यंत गंभीर (Severe) या बहुदिव्यांगता (Multiple Disabilities) वाली हो और जो नियमित रूप से विद्यालय नहीं जा सकते।

ऐसे मामलों में—

  • गृह-आधारित शिक्षा (Home-based Education) उपलब्ध कराई जा सकती है।
  • प्रशिक्षित शिक्षक घर पर शिक्षण सहायता प्रदान करेंगे।
  • परिवार को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया जाएगा।
  • उपयुक्त शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
  • जहाँ संभव हो, तकनीक आधारित शिक्षण का उपयोग किया जाएगा।

महत्वपूर्ण तथ्य:
गृह-आधारित शिक्षा का उद्देश्य बच्चे को स्थायी रूप से विद्यालय से अलग रखना नहीं है। जहाँ भी संभव हो, बच्चे को समावेशी विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।


व्यक्तिगत शैक्षिक योजना (Individualized Education Plan – IEP)

यद्यपि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में IEP का विस्तृत प्रारूप नहीं दिया गया है, परंतु नीति व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण पर बल देती है।

IEP का उद्देश्य—

  • विद्यार्थी की वर्तमान क्षमता का आकलन।
  • वार्षिक एवं अल्पकालिक लक्ष्य निर्धारित करना।
  • उपयुक्त शिक्षण रणनीतियाँ बनाना।
  • आवश्यक सहायक सेवाएँ निर्धारित करना।
  • प्रगति का नियमित मूल्यांकन करना।

विशेष शिक्षक, सामान्य शिक्षक तथा अभिभावक मिलकर IEP के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग करते हैं।


प्रारम्भिक पहचान एवं हस्तक्षेप (Early Identification and Early Intervention)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बाल्यावस्था से ही दिव्यांगता की पहचान और समय पर सहायता प्रदान करने पर बल देती है।

प्रारम्भिक हस्तक्षेप के प्रमुख लाभ—

  • विकासात्मक विलंब की शीघ्र पहचान।
  • भाषा एवं संचार कौशल में सुधार।
  • सीखने की कठिनाइयों में कमी।
  • आत्मनिर्भरता का विकास।
  • विद्यालयी शिक्षा के लिए बेहतर तैयारी।

बहु-विषयक सहयोग (Multidisciplinary Support)

समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विशेषज्ञों के सहयोग की आवश्यकता होती है।

इनमें शामिल हो सकते हैं—

  • विशेष शिक्षक।
  • सामान्य शिक्षक।
  • मनोवैज्ञानिक।
  • भाषण एवं भाषा विशेषज्ञ।
  • फिजियोथेरेपिस्ट।
  • ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट।
  • पुनर्वास विशेषज्ञ।
  • चिकित्सक।
  • अभिभावक।

यह सहयोग विद्यार्थियों के समग्र विकास को सुनिश्चित करता है।


परिवार एवं समुदाय की सहभागिता

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार समावेशी शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है।

अभिभावकों एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

इसके लिए—

  • नियमित अभिभावक बैठकें।
  • परामर्श कार्यक्रम।
  • जागरूकता अभियान।
  • सामुदायिक सहयोग।
  • विद्यालय प्रबंधन समितियों में सहभागिता।

को प्रोत्साहित किया गया है।


सतत व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development – CPD)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षकों के निरंतर कौशल विकास पर विशेष बल देती है।

CPD के अंतर्गत—

  • नवीन शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण।
  • समावेशी शिक्षा पर कार्यशालाएँ।
  • डिजिटल तकनीकों का प्रशिक्षण।
  • सहायक उपकरणों के उपयोग का अभ्यास।
  • अनुसंधान आधारित शिक्षण।
  • अनुभवों का आदान-प्रदान।

इससे शिक्षक समय के साथ अपनी दक्षताओं को अद्यतन रख सकते हैं।


सहयोगात्मक शिक्षण (Collaborative Teaching)

समावेशी विद्यालयों में सामान्य शिक्षक एवं विशेष शिक्षक मिलकर शिक्षण कार्य कर सकते हैं।

इसके लाभ—

  • विद्यार्थियों को बेहतर सहायता मिलती है।
  • व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।
  • शिक्षण अधिक प्रभावी बनता है।
  • कक्षा में सहभागिता बढ़ती है।
  • समावेशी वातावरण मजबूत होता है।

क्षमता निर्माण (Capacity Building)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार समावेशी शिक्षा को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों की क्षमता का विकास आवश्यक है।

क्षमता निर्माण में शामिल हैं—

  • शिक्षकों का प्रशिक्षण।
  • विद्यालय प्रमुखों का नेतृत्व विकास।
  • शिक्षा अधिकारियों का अभिमुखीकरण।
  • अभिभावकों का मार्गदर्शन।
  • समुदाय में जागरूकता।
  • डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता।

जेंडर समावेशन निधि (Gender Inclusion Fund)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए जेंडर समावेशन निधि (Gender Inclusion Fund – GIF) की स्थापना का प्रावधान किया गया है।

इस निधि का उद्देश्य विशेष रूप से उन विद्यार्थियों को सहायता प्रदान करना है जो लिंग आधारित असमानता के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से बालिकाओं के साथ-साथ अन्य वंचित वर्गों की शिक्षा को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।

जेंडर समावेशन निधि के प्रमुख उद्देश्य

  • बालिकाओं के नामांकन (Enrollment) में वृद्धि करना।
  • विद्यालय छोड़ने की दर (Dropout Rate) कम करना।
  • सुरक्षित एवं समावेशी विद्यालयी वातावरण विकसित करना।
  • सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित बालिकाओं को सहायता प्रदान करना।
  • समावेशी शिक्षा कार्यक्रमों को आर्थिक सहयोग देना।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करना।

विशेष शिक्षा के संदर्भ में महत्व

यद्यपि यह निधि मुख्यतः लैंगिक समानता के लिए बनाई गई है, परन्तु दिव्यांग बालिकाएँ (Girls with Disabilities) दोहरी वंचना (Double Disadvantage) का सामना करती हैं—एक ओर लिंग आधारित भेदभाव और दूसरी ओर दिव्यांगता। इसलिए ऐसी बालिकाओं को शिक्षा में विशेष प्राथमिकता देने पर बल दिया गया है।


विशेष शिक्षा क्षेत्र (Special Education Zones – SEZs)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में Special Education Zones (SEZs) का उल्लेख उन क्षेत्रों के लिए किया गया है जहाँ सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs) की संख्या अधिक है और शिक्षा की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है।

इन क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष प्रयास किए जाएँगे।

Special Education Zones के प्रमुख उद्देश्य

  • शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करना।
  • विद्यालयी आधारभूत सुविधाओं का विकास।
  • प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता।
  • डिजिटल संसाधनों का विस्तार।
  • छात्रवृत्तियों एवं अन्य सहायता योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन।
  • समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाना।
  • दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना।

विशेष शिक्षा में महत्व

इन क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए—

  • विशेष शिक्षक,
  • संसाधन केंद्र,
  • सहायक उपकरण,
  • सुलभ विद्यालय,
  • परिवहन सुविधा,
  • छात्रवृत्ति

जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य:
NEP 2020 में Special Education Zones (SEZs) का आशय Special Economic Zones (विशेष आर्थिक क्षेत्र) से नहीं है। शिक्षा परीक्षा में दोनों के बीच अंतर पूछा जा सकता है।


पाठ्यचर्या (Curriculum) में समावेशिता

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार पाठ्यचर्या ऐसी होनी चाहिए जो प्रत्येक विद्यार्थी की विविध आवश्यकताओं को ध्यान में रखे।

समावेशी पाठ्यचर्या की विशेषताएँ—

  • सरल एवं लचीली हो।
  • गतिविधि आधारित हो।
  • अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) को बढ़ावा दे।
  • स्थानीय भाषा एवं संस्कृति का सम्मान करे।
  • सभी प्रकार के विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो।
  • विविध शिक्षण सामग्रियों का उपयोग करे।
  • दिव्यांग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित की जा सके।

शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process)

NEP 2020 के अनुसार शिक्षण प्रक्रिया केवल व्याख्यान (Lecture Method) तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

शिक्षण में निम्नलिखित विधियों को प्रोत्साहित किया गया है—

  • गतिविधि आधारित शिक्षण।
  • परियोजना आधारित अधिगम (Project Based Learning)।
  • अनुभवात्मक अधिगम।
  • सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning)।
  • खोज आधारित अधिगम (Discovery Learning)।
  • खेल आधारित अधिगम।
  • प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण।

इन सभी विधियों को दिव्यांग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है।


मूल्यांकन प्रणाली (Assessment System)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पारंपरिक रटने (Rote Learning) पर आधारित परीक्षा प्रणाली से हटकर योग्यता आधारित मूल्यांकन (Competency-Based Assessment) पर बल देती है।

मूल्यांकन का उद्देश्य केवल अंक देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के वास्तविक अधिगम का आकलन करना है।

मूल्यांकन की प्रमुख विशेषताएँ

  • सतत एवं व्यापक मूल्यांकन।
  • योग्यता आधारित प्रश्न।
  • अवधारणात्मक समझ का मूल्यांकन।
  • समस्या समाधान क्षमता का आकलन।
  • विश्लेषणात्मक एवं रचनात्मक सोच का विकास।
  • व्यक्तिगत प्रगति पर ध्यान।

दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए परीक्षा में आवश्यक सुविधाएँ (Examination Accommodations)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार दिव्यांग विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त सुविधाएँ उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वे निष्पक्ष रूप से परीक्षा दे सकें।

इन सुविधाओं में शामिल हो सकती हैं—

  • अतिरिक्त समय (Extra Time)।
  • लेखक (Scribe) की सुविधा।
  • बड़े अक्षरों वाले प्रश्नपत्र (Large Print)।
  • ब्रेल प्रश्नपत्र।
  • डिजिटल प्रश्नपत्र।
  • सांकेतिक भाषा दुभाषिया (जहाँ आवश्यक हो)।
  • सहायक उपकरणों के उपयोग की अनुमति।
  • अलग बैठने की व्यवस्था (जहाँ आवश्यक हो)।
  • वैकल्पिक उत्तर लेखन व्यवस्था।
  • सुलभ परीक्षा केंद्र।

ध्यान दें: इन सुविधाओं का विस्तृत नियमन संबंधित परीक्षा बोर्डों, विश्वविद्यालयों एवं दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) तथा समय-समय पर जारी सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है।


PARAKH की भूमिका

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत PARAKH की स्थापना का प्रावधान किया गया है।

PARAKH का पूर्ण रूप है—

Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development

यह NCERT के अंतर्गत एक राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र (National Assessment Centre) है।

PARAKH के प्रमुख कार्य

  • राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन के मानक विकसित करना।
  • योग्यता आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा देना।
  • विभिन्न शिक्षा बोर्डों में मूल्यांकन की गुणवत्ता एवं समानता सुनिश्चित करना।
  • परीक्षा प्रणाली में सुधार करना।
  • समग्र विकास (Holistic Development) आधारित मूल्यांकन को प्रोत्साहित करना।

विशेष शिक्षा के संदर्भ में PARAKH का महत्व यह है कि मूल्यांकन प्रणाली अधिक समावेशी, लचीली और विद्यार्थी-केंद्रित बनाई जा सके।


डिजिटल समावेशन (Digital Inclusion)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा में डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर विशेष बल देती है।

दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए डिजिटल समावेशन के अंतर्गत—

  • सुलभ ई-पुस्तकें।
  • ऑडियो पुस्तकें।
  • स्क्रीन रीडर समर्थित सामग्री।
  • कैप्शनयुक्त वीडियो।
  • सांकेतिक भाषा आधारित डिजिटल सामग्री।
  • ब्रेल अनुकूल डिजिटल संसाधन।
  • ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म।
  • सहायक सॉफ्टवेयर।

इनका उद्देश्य शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाना है।


NEP 2020 एवं RPwD Act, 2016 का संबंध

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के सिद्धांतों के अनुरूप समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देती है।

दोनों के बीच प्रमुख समानताएँ—

  • समान अवसर।
  • समावेशी शिक्षा।
  • भेदभाव रहित व्यवस्था।
  • बाधारहित पहुँच (Accessibility)।
  • उचित सुविधा (Reasonable Accommodation)।
  • सहायक तकनीक का उपयोग।
  • प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों की आवश्यकता।
  • दिव्यांग विद्यार्थियों के अधिकारों का संरक्षण।

इस प्रकार NEP 2020, RPwD Act, 2016 के शैक्षिक उद्देश्यों को व्यवहार में लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण नीति दस्तावेज है।


NEP 2020 एवं सतत विकास लक्ष्य (SDG-4)

संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) में लक्ष्य संख्या 4 (SDG-4) का उद्देश्य है—

“सभी के लिए समावेशी, समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना तथा आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना।”

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस लक्ष्य के अनुरूप कार्य करती है।

SDG-4 और NEP 2020 दोनों निम्न बातों पर बल देते हैं—

  • सभी के लिए शिक्षा।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।
  • समावेशी शिक्षा।
  • समान अवसर।
  • जीवनपर्यन्त अधिगम (Lifelong Learning)।
  • लैंगिक समानता।
  • दिव्यांग व्यक्तियों की शिक्षा।
  • सामाजिक न्याय।

विशेष शिक्षा के संदर्भ में NEP 2020 के प्रमुख तथ्य

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को 29 जुलाई 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति दी गई।
  • यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 (1992 संशोधित) का स्थान लेती है।
  • अध्याय 6 का शीर्षक है Equitable and Inclusive Education: Learning for All (समान एवं समावेशी शिक्षा : सभी के लिए शिक्षा)
  • SEDGs (Socio-Economically Disadvantaged Groups) की अवधारणा को पहली बार व्यापक रूप से प्रस्तुत किया गया।
  • दिव्यांग बच्चों को SEDGs का महत्वपूर्ण भाग माना गया है।
  • Universal Design for Learning (UDL) अपनाने पर बल दिया गया है।
  • भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language – ISL) के मानकीकरण का प्रावधान किया गया है।
  • विद्यालयों को सुगम (Accessible) बनाने पर विशेष बल दिया गया है।
  • सहायक तकनीकों (Assistive Technology) के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है।
  • प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों एवं सामान्य शिक्षकों के क्षमता विकास पर बल दिया गया है।
  • Gender Inclusion Fund तथा Special Education Zones जैसे प्रावधानों के माध्यम से वंचित समूहों की शिक्षा को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।
  • PARAKH के माध्यम से मूल्यांकन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, योग्यता-आधारित और समावेशी बनाने का प्रावधान किया गया है।
  • नीति का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा, विशेषकर दिव्यांग बच्चा, शिक्षा से वंचित न रहे

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