राष्ट्रीय संस्थान : दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के अंतर्गत राष्ट्रीय संस्थान National Institutes under the Department of Empowerment of Persons with Disabilities (DEPwD) | RPSC First Grade Special Education Notes
राष्ट्रीय संस्थान : दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के अंतर्गत राष्ट्रीय संस्थान
परिचय
भारत एक लोकतांत्रिक एवं कल्याणकारी राष्ट्र है, जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, समान अधिकार तथा गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्राप्त है। भारतीय संविधान सामाजिक न्याय, समानता एवं समावेशिता के सिद्धांतों पर आधारित है। यही कारण है कि भारत सरकार ने दिव्यांग व्यक्तियों (Persons with Disabilities) के अधिकारों की रक्षा, शिक्षा, पुनर्वास, स्वास्थ्य, कौशल विकास, रोजगार एवं सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक सुदृढ़ संस्थागत व्यवस्था विकसित की है।
दिव्यांग व्यक्तियों को लंबे समय तक मुख्यधारा से अलग मानने की सामाजिक सोच के कारण उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सामाजिक जीवन में अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। समय के साथ यह समझ विकसित हुई कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की अक्षमता नहीं, बल्कि समाज में उपलब्ध भौतिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक बाधाओं का परिणाम भी है। इसलिए केवल चिकित्सा आधारित दृष्टिकोण (Medical Model) पर्याप्त नहीं है, बल्कि अधिकार-आधारित दृष्टिकोण (Rights-Based Approach) को अपनाना आवश्यक है।
इसी सोच के अनुरूप भारत सरकार ने दिव्यांग व्यक्तियों के समग्र विकास के लिए विभिन्न कानून, नीतियाँ, योजनाएँ एवं संस्थाएँ स्थापित कीं। इन संस्थाओं में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD) तथा इसके अधीन कार्यरत राष्ट्रीय संस्थान (National Institutes) अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
ये राष्ट्रीय संस्थान देश में विशेष शिक्षा (Special Education), पुनर्वास (Rehabilitation), अनुसंधान (Research), मानव संसाधन विकास (Human Resource Development), सहायक एवं सुगम्य प्रौद्योगिकी (Assistive and Accessible Technology), प्रारम्भिक हस्तक्षेप (Early Intervention), व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training), समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) तथा दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) के रूप में कार्य करते हैं।
RPSC स्कूल व्याख्याता (विशेष शिक्षा) परीक्षा में इन राष्ट्रीय संस्थानों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए प्रत्येक अभ्यर्थी को इन संस्थानों की स्थापना, उद्देश्य, कार्य, मुख्यालय, क्षेत्रीय केंद्र, प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा विशेष योगदान का गहन अध्ययन करना चाहिए।
भारत में दिव्यांगजन कल्याण की पृष्ठभूमि
स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संगठित एवं वैज्ञानिक पुनर्वास व्यवस्था लगभग नगण्य थी। अधिकांश सेवाएँ धार्मिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों अथवा निजी प्रयासों द्वारा संचालित की जाती थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास सेवाओं की पहुँच अत्यंत सीमित थी।
उस समय अनेक प्रमुख समस्याएँ विद्यमान थीं—
- प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों का अभाव।
- दिव्यांगता की प्रारम्भिक पहचान एवं हस्तक्षेप की अपर्याप्त व्यवस्था।
- पुनर्वास विशेषज्ञों की कमी।
- आधुनिक सहायक उपकरणों का अभाव।
- ब्रेल, सांकेतिक भाषा एवं वैकल्पिक संचार सामग्री की सीमित उपलब्धता।
- दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के प्रति समाज में जागरूकता का अभाव।
- विभिन्न राज्यों में सेवाओं की गुणवत्ता में असमानता।
इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने यह महसूस किया कि प्रत्येक प्रमुख दिव्यांगता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे संस्थानों की स्थापना की जाए जो शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा पुनर्वास के क्षेत्र में मानक स्थापित कर सकें।
राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना की आवश्यकता
राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना केवल उपचार सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नहीं की गई, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय पुनर्वास व्यवस्था विकसित करने के लिए की गई।
इन संस्थानों की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से महसूस की गई—
विशेष शिक्षा का विकास
दिव्यांग बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताएँ सामान्य बच्चों से भिन्न हो सकती हैं। प्रत्येक प्रकार की दिव्यांगता के लिए अलग शिक्षण पद्धति, विशेष शिक्षण सामग्री तथा प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होती है। राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना का एक प्रमुख उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण विशेष शिक्षा का विकास करना था।
प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना
देश में विशेष शिक्षक, पुनर्वास मनोवैज्ञानिक, स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, ओरिएंटेशन एवं मोबिलिटी प्रशिक्षक तथा अन्य पुनर्वास विशेषज्ञों की भारी कमी थी। राष्ट्रीय संस्थानों ने इस कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अनुसंधान को बढ़ावा देना
भारत में दिव्यांगता से संबंधित समस्याओं, पुनर्वास तकनीकों, शिक्षण विधियों तथा सहायक उपकरणों पर वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता थी। राष्ट्रीय संस्थानों को अनुसंधान एवं नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया गया।
सहायक उपकरणों का विकास
दिव्यांग व्यक्तियों के लिए ब्रेल उपकरण, श्रवण यंत्र, कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, संचार उपकरण, कम दृष्टि सहायक उपकरण तथा अन्य सहायक तकनीकों का विकास एवं उपयोग सुनिश्चित करना भी राष्ट्रीय संस्थानों का प्रमुख उद्देश्य है।
समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की अवधारणा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विद्यालयों, शिक्षकों एवं राज्य सरकारों को तकनीकी सहायता प्रदान करने हेतु विशेषज्ञ संस्थानों की आवश्यकता थी। राष्ट्रीय संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकरण
देशभर में विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक समान मानकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं शोध आधारित कार्यप्रणाली की आवश्यकता थी। राष्ट्रीय संस्थान इन मानकों के विकास एवं प्रसार का कार्य करते हैं।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD)
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) के अंतर्गत कार्य करने वाला एक प्रमुख विभाग है। यह विभाग देश में दिव्यांग व्यक्तियों से संबंधित नीतियों, कार्यक्रमों, योजनाओं एवं अधिनियमों के क्रियान्वयन का प्रमुख प्रशासनिक निकाय है।
DEPwD का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को समाज के प्रत्येक क्षेत्र—जैसे शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, खेल, संस्कृति, सूचना, परिवहन तथा सार्वजनिक सेवाओं—में समान अवसर उपलब्ध कराना है।
यह विभाग अधिकार-आधारित दृष्टिकोण (Rights-Based Approach) के अनुसार कार्य करता है, जिसके अंतर्गत दिव्यांग व्यक्तियों को समाज का समान अधिकारयुक्त नागरिक माना जाता है।
DEPwD की कार्यप्रणाली
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए विभिन्न माध्यमों से कार्य करता है। इनमें प्रमुख हैं—
- राष्ट्रीय संस्थानों का संचालन।
- वैधानिक निकायों के माध्यम से नियमन।
- पुनर्वास सेवाओं का विस्तार।
- विशेष शिक्षा एवं समावेशी शिक्षा को प्रोत्साहन।
- अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा।
- दिव्यांग व्यक्तियों के लिए योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन।
- राज्य सरकारों को तकनीकी सहयोग।
- गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को सहायता।
- सहायक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- सुगम्यता (Accessibility) को बढ़ावा देना।
- जन-जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन।
राष्ट्रीय संस्थानों की अवधारणा (Concept of National Institutes)
राष्ट्रीय संस्थान ऐसे विशेषीकृत संस्थान हैं जिन्हें भारत सरकार ने विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए स्थापित किया है। प्रत्येक संस्थान किसी विशेष दिव्यांगता अथवा दिव्यांगताओं के समूह से संबंधित शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, पुनर्वास तथा सेवा प्रदान करने के लिए उत्तरदायी होता है।
ये संस्थान केवल सेवा प्रदाता नहीं हैं, बल्कि नीति निर्माण, प्रशिक्षण, अनुसंधान, तकनीकी सहयोग तथा क्षमता निर्माण (Capacity Building) के राष्ट्रीय केंद्र भी हैं। इनके द्वारा विकसित मॉडल, प्रशिक्षण सामग्री एवं अनुसंधान निष्कर्ष पूरे देश में विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।
राष्ट्रीय संस्थानों की प्रमुख विशेषताएँ
राष्ट्रीय संस्थानों की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
- ये भारत सरकार द्वारा स्थापित एवं वित्तपोषित संस्थान हैं।
- ये दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करते हैं।
- प्रत्येक संस्थान किसी विशिष्ट दिव्यांगता अथवा दिव्यांगताओं के समूह पर केंद्रित होता है।
- ये शिक्षा, पुनर्वास, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण की समेकित सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- अधिकांश संस्थान भारतीय पुनर्वास परिषद् (Rehabilitation Council of India – RCI) द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम संचालित करते हैं।
- ये राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थाओं को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
- ये राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न संगठनों के साथ सहयोग करते हैं।
- ये दिव्यांग व्यक्तियों एवं उनके परिवारों को परामर्श सेवाएँ भी उपलब्ध कराते हैं।
राष्ट्रीय संस्थानों के प्रमुख कार्य
DEPwD के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय संस्थानों के कार्य बहुआयामी हैं। यद्यपि प्रत्येक संस्थान किसी विशेष दिव्यांगता पर केंद्रित होता है, फिर भी इनके कुछ सामान्य कार्य समान होते हैं।
मानव संसाधन विकास
राष्ट्रीय संस्थान विशेष शिक्षक, पुनर्वास विशेषज्ञ, ऑडियोलॉजिस्ट, स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, मनोवैज्ञानिक तथा अन्य पेशेवरों का प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
विशेष शिक्षा
ये संस्थान विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं के अनुरूप विशेष शिक्षण विधियाँ, पाठ्य सामग्री, मूल्यांकन प्रणाली एवं शिक्षण संसाधनों का विकास करते हैं।
पुनर्वास सेवाएँ
दिव्यांग व्यक्तियों को चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, शैक्षिक एवं व्यावसायिक पुनर्वास सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।
अनुसंधान एवं नवाचार
दिव्यांगता के क्षेत्र में नई तकनीकों, सहायक उपकरणों, शिक्षण विधियों तथा पुनर्वास मॉडल का विकास एवं परीक्षण किया जाता है।
प्रारम्भिक हस्तक्षेप (Early Intervention)
छोटे बच्चों में दिव्यांगता की शीघ्र पहचान कर समय पर आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे उनके समग्र विकास की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
समुदाय आधारित पुनर्वास (Community-Based Rehabilitation)
राष्ट्रीय संस्थान समुदाय स्तर पर पुनर्वास सेवाओं के विकास एवं विस्तार के लिए भी कार्य करते हैं, ताकि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाएँ पहुँच सकें।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के अंतर्गत राष्ट्रीय संस्थान
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD) के प्रशासनिक नियंत्रण में अनेक राष्ट्रीय संस्थान (National Institutes) कार्यरत हैं। प्रत्येक राष्ट्रीय संस्थान किसी विशिष्ट दिव्यांगता अथवा दिव्यांगताओं के समूह के लिए शिक्षा, पुनर्वास, अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा मानव संसाधन विकास का कार्य करता है।
ये संस्थान देश में विशेष शिक्षा (Special Education) तथा पुनर्वास सेवाओं (Rehabilitation Services) के सर्वोच्च संस्थान माने जाते हैं। इनके द्वारा विकसित प्रशिक्षण कार्यक्रम, अनुसंधान, शिक्षण सामग्री तथा पुनर्वास मॉडल पूरे देश में अपनाए जाते हैं।
RPSC स्कूल व्याख्याता (विशेष शिक्षा) परीक्षा में इन राष्ट्रीय संस्थानों से संबंधित तथ्यात्मक एवं वर्णनात्मक दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए इनके आधिकारिक नाम, स्थापना वर्ष, मुख्यालय तथा प्रमुख कार्यों का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।
DEPwD के अंतर्गत कार्यरत प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान
वर्तमान में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान कार्यरत हैं—
| क्रमांक | राष्ट्रीय संस्थान | मुख्यालय | संबंधित दिव्यांगता |
|---|---|---|---|
| 1 | National Institute for the Empowerment of Persons with Visual Disabilities (NIEPVD) | देहरादून | दृष्टि दिव्यांगता |
| 2 | Ali Yavar Jung National Institute of Speech and Hearing Disabilities (Divyangjan) [AYJNISHD(D)] | मुंबई | श्रवण दिव्यांगता एवं वाक् एवं भाषा संबंधी दिव्यांगता |
| 3 | National Institute for the Empowerment of Persons with Intellectual Disabilities (NIEPID) | सिकंदराबाद | बौद्धिक दिव्यांगता |
| 4 | National Institute for Empowerment of Persons with Multiple Disabilities (NIEPMD) | चेन्नई | बहु-दिव्यांगता |
| 5 | National Institute for Locomotor Disabilities (Divyangjan) [NILD(D)] | कोलकाता | चलन (Locomotor) दिव्यांगता |
| 6 | Swami Vivekanand National Institute of Rehabilitation Training and Research (SVNIRTAR) | कटक (ओडिशा) | चलन दिव्यांगता एवं पुनर्वास प्रशिक्षण |
| 7 | National Institute for Empowerment of Persons with Autism, Intellectual Disabilities and Multiple Disabilities (NIEPAID)* | (नवीन संस्थान) | ऑटिज़्म, बौद्धिक एवं बहु-दिव्यांगता |
परीक्षा तथ्य: भारत सरकार समय-समय पर राष्ट्रीय संस्थानों की संरचना एवं नामों में परिवर्तन कर सकती है। अतः प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सदैव आधिकारिक नाम याद रखें।
राष्ट्रीय संस्थानों की प्रशासनिक संरचना
प्रत्येक राष्ट्रीय संस्थान भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
प्रत्येक संस्थान का संचालन सामान्यतः निम्नलिखित प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत किया जाता है—
- निदेशक (Director)
- प्रशासनिक अधिकारी
- शैक्षणिक विभाग
- पुनर्वास विभाग
- अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ
- प्रशिक्षण प्रकोष्ठ
- वित्त एवं लेखा शाखा
- क्षेत्रीय केंद्र (Regional Centres)
- सामुदायिक पुनर्वास इकाई
- पुस्तकालय एवं सूचना केंद्र
इन संस्थानों के कार्यों की निगरानी भारत सरकार द्वारा निर्धारित नीतियों एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाती है।
राष्ट्रीय संस्थानों के सामान्य उद्देश्य
यद्यपि प्रत्येक राष्ट्रीय संस्थान किसी विशिष्ट दिव्यांगता के लिए कार्य करता है, फिर भी इनके कुछ सामान्य उद्देश्य समान होते हैं।
गुणवत्तापूर्ण विशेष शिक्षा प्रदान करना
राष्ट्रीय संस्थान विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं के अनुरूप विशेष शिक्षण विधियों का विकास करते हैं तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराते हैं।
मानव संसाधन विकास
देश में प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों तथा पुनर्वास विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करना राष्ट्रीय संस्थानों का प्रमुख उद्देश्य है।
इसके लिए विभिन्न डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर तथा अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
अनुसंधान को प्रोत्साहन
राष्ट्रीय संस्थान दिव्यांगता के विभिन्न क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान करते हैं।
इन अनुसंधानों का उद्देश्य—
- नई शिक्षण विधियों का विकास
- आधुनिक पुनर्वास तकनीकों का विकास
- सहायक उपकरणों में सुधार
- दिव्यांग व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाना
होता है।
पुनर्वास सेवाएँ उपलब्ध कराना
राष्ट्रीय संस्थान केवल प्रशिक्षण संस्थान नहीं हैं, बल्कि पुनर्वास सेवाएँ भी प्रदान करते हैं।
इन सेवाओं में शामिल हैं—
- चिकित्सकीय पुनर्वास
- मनोवैज्ञानिक परामर्श
- विशेष शिक्षा
- स्पीच थेरेपी
- फिजियोथेरेपी
- ऑक्यूपेशनल थेरेपी
- व्यावसायिक प्रशिक्षण
- परिवार परामर्श
समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना
राष्ट्रीय संस्थान समावेशी शिक्षा की सफलता के लिए विद्यालयों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा राज्य सरकारों को तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं।
वे शिक्षण सामग्री, प्रशिक्षण मॉड्यूल तथा दिशानिर्देश विकसित करते हैं ताकि दिव्यांग बच्चे सामान्य विद्यालयों में प्रभावी ढंग से शिक्षा प्राप्त कर सकें।
सहायक एवं सुगम्य प्रौद्योगिकी का विकास
दिव्यांग व्यक्तियों की स्वतंत्रता एवं आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय संस्थान विभिन्न प्रकार की सहायक तकनीकों के विकास एवं उपयोग को बढ़ावा देते हैं।
जैसे—
- ब्रेल तकनीक
- श्रवण यंत्र
- व्हीलचेयर
- कृत्रिम अंग
- संचार उपकरण
- स्क्रीन रीडर
- लो-विजन उपकरण
- कंप्यूटर आधारित सहायक तकनीक
समुदाय आधारित पुनर्वास
राष्ट्रीय संस्थान समुदाय आधारित पुनर्वास (Community-Based Rehabilitation – CBR) कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाएँ पहुँचाने का प्रयास करते हैं।
इन कार्यक्रमों में स्थानीय समुदाय, पंचायत, विद्यालय, स्वयंसेवी संगठन तथा परिवारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।
राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा संचालित प्रमुख गतिविधियाँ
राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा अनेक प्रकार की गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं।
शैक्षणिक कार्यक्रम
इन संस्थानों में RCI द्वारा मान्यता प्राप्त अनेक पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं, जैसे—
- डिप्लोमा
- स्नातक कार्यक्रम
- स्नातकोत्तर कार्यक्रम
- एम.फिल. (जहाँ लागू)
- पीएच.डी. स्तर पर अनुसंधान सहयोग
- अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम
- सतत पुनर्वास शिक्षा (Continuing Rehabilitation Education – CRE)
नैदानिक सेवाएँ (Clinical Services)
राष्ट्रीय संस्थान विभिन्न प्रकार की नैदानिक सेवाएँ भी प्रदान करते हैं।
इनमें शामिल हैं—
- दिव्यांगता का मूल्यांकन
- मनोवैज्ञानिक परीक्षण
- कार्यात्मक मूल्यांकन
- भाषण एवं भाषा मूल्यांकन
- श्रवण परीक्षण
- फिजियोथेरेपी
- ऑक्यूपेशनल थेरेपी
अभिभावक प्रशिक्षण
दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय संस्थान अभिभावकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जिनमें उन्हें—
- घर पर शिक्षण तकनीक
- व्यवहार प्रबंधन
- संचार कौशल
- दैनिक जीवन कौशल
- सरकारी योजनाओं की जानकारी
प्रदान की जाती है।
शिक्षक प्रशिक्षण
राष्ट्रीय संस्थानों की एक महत्वपूर्ण भूमिका विशेष शिक्षकों तथा सामान्य शिक्षकों का प्रशिक्षण है।
इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होते हैं—
- समावेशी शिक्षण रणनीतियाँ
- कक्षा अनुकूलन
- व्यक्तिगत शिक्षण योजना (IEP)
- सहायक उपकरणों का उपयोग
- मूल्यांकन तकनीक
प्रकाशन
राष्ट्रीय संस्थान समय-समय पर अनेक प्रकार की शिक्षण एवं शोध सामग्री प्रकाशित करते हैं।
जैसे—
- प्रशिक्षण पुस्तिकाएँ
- शिक्षक मार्गदर्शिकाएँ
- शोध पत्रिकाएँ
- ब्रेल पुस्तकें
- सांकेतिक भाषा सामग्री
- डिजिटल शिक्षण संसाधन
- ई-कंटेंट
राष्ट्रीय संस्थानों की भूमिका विशेष शिक्षा में
विशेष शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय संस्थानों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इन संस्थानों ने—
- विशेष शिक्षकों के प्रशिक्षण की राष्ट्रीय व्यवस्था विकसित की।
- विशेष शिक्षा की मानकीकृत पद्धतियों का विकास किया।
- विभिन्न दिव्यांगताओं के अनुरूप शिक्षण सामग्री तैयार की।
- समावेशी शिक्षा को तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को लागू करने में सहयोग दिया।
- RCI के सहयोग से पुनर्वास पेशेवरों की गुणवत्ता सुनिश्चित की।
आज भारत में विशेष शिक्षा के क्षेत्र में जो संगठित व्यवस्था दिखाई देती है, उसमें राष्ट्रीय संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
- राष्ट्रीय संस्थान DEPwD के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करते हैं।
- ये भारत सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) हैं।
- इनका मुख्य कार्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि शिक्षा, पुनर्वास, अनुसंधान, प्रशिक्षण, मानव संसाधन विकास तथा तकनीकी सहयोग प्रदान करना है।
- अधिकांश राष्ट्रीय संस्थानों में RCI मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
- प्रत्येक राष्ट्रीय संस्थान किसी विशिष्ट दिव्यांगता अथवा दिव्यांगताओं के समूह के लिए कार्य करता है।
Disclaimer:
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