अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान (दिव्यांगजन) Ali Yavar Jung National Institute of Speech and Hearing Disabilities (Divyangjan) – AYJNISHD(D) | RPSC First Grade Special Education Notes
परिचय
अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान (दिव्यांगजन) [AYJNISHD(D)] भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD) द्वारा संचालित एक प्रमुख राष्ट्रीय स्वायत्त संस्थान (Autonomous National Institute) है। यह संस्थान भारत में श्रवण दिव्यांगता (Hearing Disability) तथा वाक् एवं भाषा संबंधी विकारों (Speech and Language Disorders) के क्षेत्र में शिक्षा, पुनर्वास, अनुसंधान, प्रशिक्षण, मानव संसाधन विकास तथा सामुदायिक सेवाओं का सर्वोच्च राष्ट्रीय केंद्र माना जाता है।
यह संस्थान श्रवण दिव्यांग बच्चों, युवाओं तथा वयस्कों के समग्र विकास के लिए कार्य करता है। यहाँ केवल श्रवण क्षमता का परीक्षण या उपचार ही नहीं किया जाता, बल्कि व्यक्ति की भाषा (Language), वाणी (Speech), संचार कौशल (Communication Skills), शिक्षा (Education), सामाजिक सहभागिता (Social Participation), व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) तथा पुनर्वास (Rehabilitation) पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाता है।
भारत में श्रवण दिव्यांगता के क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेष शिक्षक (Special Educators), ऑडियोलॉजिस्ट (Audiologists), स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट (Speech-Language Pathologists), पुनर्वास मनोवैज्ञानिक (Rehabilitation Psychologists) तथा अन्य विशेषज्ञों को तैयार करने में इस संस्थान की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।
विशेष शिक्षा के क्षेत्र में यह संस्थान न केवल विद्यार्थियों को सेवाएँ प्रदान करता है, बल्कि राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, विद्यालयों, पुनर्वास संस्थानों तथा अन्य संगठनों को भी तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराता है। इसी कारण AYJNISHD(D) को श्रवण एवं वाक् दिव्यांगता के क्षेत्र में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (National Centre of Excellence) माना जाता है।
संस्थान का इतिहास
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में श्रवण दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास की सुविधाएँ अत्यंत सीमित थीं। अधिकांश सेवाएँ निजी संस्थाओं अथवा स्वयंसेवी संगठनों द्वारा प्रदान की जाती थीं। प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों, ऑडियोलॉजिस्ट तथा स्पीच विशेषज्ञों की संख्या बहुत कम थी।
उस समय देश में निम्नलिखित प्रमुख समस्याएँ थीं—
- श्रवण दिव्यांगता की प्रारम्भिक पहचान की प्रभावी व्यवस्था का अभाव।
- आधुनिक श्रवण परीक्षण उपकरणों की कमी।
- स्पीच एवं लैंग्वेज थेरेपी सेवाओं की सीमित उपलब्धता।
- प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों की कमी।
- भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language) के व्यवस्थित प्रशिक्षण का अभाव।
- अनुसंधान एवं शिक्षण सामग्री का अभाव।
- ग्रामीण क्षेत्रों में पुनर्वास सेवाओं की सीमित पहुँच।
इन समस्याओं के समाधान के लिए भारत सरकार ने श्रवण एवं वाक् दिव्यांगता के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया।
इसी उद्देश्य से 9 अगस्त, 1983 को Ali Yavar Jung National Institute for the Hearing Handicapped (AYJNIHH) की स्थापना मुंबई (महाराष्ट्र) में की गई।
वर्ष 2016 में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) लागू होने के बाद दिव्यांगता से संबंधित संस्थानों के नामों में सम्मानजनक एवं अधिकार-आधारित शब्दावली अपनाई गई। इसी क्रम में संस्थान का नाम परिवर्तित कर Ali Yavar Jung National Institute of Speech and Hearing Disabilities (Divyangjan) – AYJNISHD(D) कर दिया गया।
आज यह संस्थान भारत में श्रवण एवं वाक् दिव्यांगता के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा पुनर्वास का अग्रणी राष्ट्रीय संस्थान है।
स्थापना संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| आधिकारिक नाम | अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान (दिव्यांगजन) |
| अंग्रेज़ी नाम | Ali Yavar Jung National Institute of Speech and Hearing Disabilities (Divyangjan) |
| संक्षिप्त नाम | AYJNISHD(D) |
| पूर्व नाम | Ali Yavar Jung National Institute for the Hearing Handicapped (AYJNIHH) |
| स्थापना तिथि | 9 अगस्त, 1983 |
| मुख्यालय | मुंबई, महाराष्ट्र |
| प्रशासनिक नियंत्रण | दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार |
| संस्थान का स्वरूप | स्वायत्त राष्ट्रीय संस्थान (Autonomous National Institute) |
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य:
RPSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में संस्थान का वर्तमान नाम, पूर्व नाम, स्थापना वर्ष, मुख्यालय तथा संबंधित दिव्यांगता से प्रश्न पूछे जाते हैं।
अली यावर जंग का परिचय
इस संस्थान का नाम भारत के प्रसिद्ध शिक्षाविद्, राजनयिक एवं प्रशासक अली यावर जंग के सम्मान में रखा गया है।
उन्होंने शिक्षा, प्रशासन तथा सार्वजनिक जीवन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके कार्यों के सम्मान में भारत सरकार ने इस राष्ट्रीय संस्थान का नाम उनके नाम पर रखा।
संस्थान की स्थापना की आवश्यकता
AYJNISHD(D) की स्थापना के पीछे केवल चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराना उद्देश्य नहीं था, बल्कि श्रवण एवं वाक् दिव्यांग व्यक्तियों के समग्र विकास के लिए एक राष्ट्रीय व्यवस्था विकसित करना था।
संस्थान की स्थापना निम्नलिखित आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की गई—
गुणवत्तापूर्ण विशेष शिक्षा उपलब्ध कराना
श्रवण दिव्यांग बच्चों की सीखने की प्रक्रिया सामान्य बच्चों से भिन्न होती है। उन्हें भाषा विकास, संचार कौशल तथा श्रवण प्रशिक्षण की विशेष आवश्यकता होती है। इसलिए विशेष शिक्षकों एवं विशेष शिक्षण विधियों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए इस संस्थान की स्थापना की गई।
प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करना
देश में श्रवण दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या बहुत कम थी।
इस कमी को दूर करने के लिए संस्थान में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारम्भ किए गए ताकि योग्य—
- विशेष शिक्षक
- ऑडियोलॉजिस्ट
- स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट
- पुनर्वास विशेषज्ञ
- शोधकर्ता
तैयार किए जा सकें।
अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना
श्रवण दिव्यांगता के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संस्थान को अनुसंधान एवं विकास का राष्ट्रीय केंद्र बनाया गया।
यहाँ श्रवण परीक्षण, भाषा विकास, संचार कौशल, श्रवण यंत्र, कॉक्लियर इम्प्लांट पुनर्वास, भारतीय सांकेतिक भाषा तथा समावेशी शिक्षा से संबंधित अनुसंधान किए जाते हैं।
प्रारम्भिक पहचान एवं हस्तक्षेप
यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि यदि बच्चे की श्रवण हानि की पहचान जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में हो जाए तथा समय पर उचित हस्तक्षेप प्रदान किया जाए, तो भाषा एवं संचार विकास में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
इसी कारण संस्थान प्रारम्भिक पहचान एवं प्रारम्भिक हस्तक्षेप कार्यक्रमों को विशेष महत्व देता है।
समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना
राष्ट्रीय शिक्षा नीति तथा समावेशी शिक्षा की अवधारणा को सफल बनाने के लिए सामान्य विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण देना, शिक्षण सामग्री विकसित करना तथा तकनीकी सहयोग प्रदान करना भी संस्थान का प्रमुख उद्देश्य है।
संस्थान का दृष्टिकोण (Vision)
ऐसे समावेशी एवं सुलभ समाज का निर्माण करना जहाँ प्रत्येक श्रवण एवं वाक् दिव्यांग व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के शिक्षा, रोजगार, सामाजिक जीवन एवं राष्ट्रीय विकास में समान अवसरों के साथ सक्रिय भागीदारी कर सके।
संस्थान का मिशन (Mission)
श्रवण एवं वाक् दिव्यांग व्यक्तियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पुनर्वास, प्रशिक्षण, अनुसंधान, सहायक प्रौद्योगिकी तथा आधुनिक सेवाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाना तथा उनके जीवन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार करना।
संस्थान के प्रमुख उद्देश्य
AYJNISHD(D) निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कार्य करता है—
- श्रवण एवं वाक् दिव्यांग व्यक्तियों का समग्र विकास करना।
- प्रारम्भिक पहचान एवं प्रारम्भिक हस्तक्षेप सेवाओं का विस्तार करना।
- गुणवत्तापूर्ण विशेष शिक्षा उपलब्ध कराना।
- विशेष शिक्षकों एवं पुनर्वास विशेषज्ञों का प्रशिक्षण देना।
- ऑडियोलॉजी एवं स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी के क्षेत्र में मानव संसाधन विकसित करना।
- अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना।
- आधुनिक श्रवण यंत्रों एवं सहायक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना।
- भारतीय सांकेतिक भाषा तथा संचार कौशल के विकास में योगदान देना।
- समावेशी शिक्षा को तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- समाज में श्रवण दिव्यांगता के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- राज्य सरकारों एवं अन्य संस्थाओं को विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराना।
AYJNISHD(D) की प्रमुख कार्य-दर्शन (Core Philosophy)
संस्थान का कार्य केवल श्रवण दोष का उपचार करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
इसी कारण संस्थान बहुविषयक टीम (Multidisciplinary Team Approach) के आधार पर कार्य करता है। इस टीम में सामान्यतः निम्नलिखित विशेषज्ञ सम्मिलित होते हैं—
- विशेष शिक्षक
- ऑडियोलॉजिस्ट
- स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट
- ईएनटी विशेषज्ञ
- मनोवैज्ञानिक
- सामाजिक कार्यकर्ता
- पुनर्वास पेशेवर
- व्यावसायिक प्रशिक्षक
सभी विशेषज्ञ मिलकर प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं के अनुसार व्यक्तिकृत पुनर्वास योजना (Individualized Rehabilitation Plan) तैयार करते हैं।
अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान (दिव्यांगजन) की संगठनात्मक संरचना
अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान (दिव्यांगजन) एक बहुविषयक (Multidisciplinary) एवं राष्ट्रीय स्तर का विशेषज्ञ संस्थान है। संस्थान में शिक्षा, अनुसंधान, नैदानिक सेवाएँ (Clinical Services), पुनर्वास, प्रशिक्षण तथा सामुदायिक सेवाओं से संबंधित अनेक विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हैं।
संस्थान का प्रशासन दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) द्वारा निर्धारित नीतियों एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित होता है। संस्थान में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ मिलकर श्रवण एवं वाक् दिव्यांग व्यक्तियों के लिए व्यापक एवं समग्र सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।
संस्थान की संगठनात्मक संरचना का उद्देश्य केवल सेवाएँ प्रदान करना नहीं है, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं पुनर्वास के सभी क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता स्थापित करना भी है।
संस्थान के प्रमुख विभाग
AYJNISHD(D) में विभिन्न विभाग कार्यरत हैं, जो आपस में समन्वय स्थापित करके दिव्यांग व्यक्तियों को समग्र सेवाएँ प्रदान करते हैं।
मुख्य विभाग निम्नलिखित हैं—
- ऑडियोलॉजी (Audiology)
- स्पीच एवं लैंग्वेज पैथोलॉजी (Speech and Language Pathology)
- विशेष शिक्षा (Special Education)
- मनोविज्ञान (Psychology)
- प्रारम्भिक हस्तक्षेप (Early Intervention)
- पुनर्वास सेवाएँ (Rehabilitation Services)
- अनुसंधान एवं विकास (Research and Development)
- प्रशिक्षण एवं मानव संसाधन विकास (Human Resource Development)
- सामुदायिक पुनर्वास (Community Rehabilitation)
- सूचना, प्रकाशन एवं दस्तावेज़ीकरण (Documentation and Publications)
इन विभागों के माध्यम से संस्थान बच्चों, किशोरों, युवाओं तथा वयस्कों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सेवाएँ उपलब्ध कराता है।
क्षेत्रीय केंद्र (Regional Centres)
देश के विभिन्न भागों में सेवाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से संस्थान ने विभिन्न राज्यों में अपने क्षेत्रीय केंद्र (Regional Centres) स्थापित किए हैं।
प्रमुख क्षेत्रीय केंद्र निम्नलिखित स्थानों पर स्थित हैं—
- कोलकाता (पश्चिम बंगाल)
- नई दिल्ली
- सिकंदराबाद (तेलंगाना)
- भुवनेश्वर (ओडिशा)
- नोएडा (उत्तर प्रदेश)
इन क्षेत्रीय केंद्रों का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले श्रवण एवं वाक् दिव्यांग व्यक्तियों को उनके निकट गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराना है।
क्षेत्रीय केंद्रों के प्रमुख कार्य
क्षेत्रीय केंद्र निम्नलिखित कार्य करते हैं—
- श्रवण परीक्षण एवं मूल्यांकन।
- स्पीच एवं लैंग्वेज थेरेपी।
- विशेष शिक्षा।
- प्रारम्भिक हस्तक्षेप सेवाएँ।
- शिक्षक प्रशिक्षण।
- अभिभावक परामर्श।
- सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम।
- पुनर्वास सेवाएँ।
- सहायक उपकरणों के उपयोग का प्रशिक्षण।
- समावेशी शिक्षा के लिए तकनीकी सहयोग।
इन केंद्रों के माध्यम से संस्थान की सेवाएँ देश के अधिकाधिक लोगों तक पहुँचती हैं।
श्रवण दिव्यांगता क्या है?
श्रवण दिव्यांगता (Hearing Disability) ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की सुनने की क्षमता सामान्य स्तर से कम हो जाती है तथा इसका प्रभाव उसकी भाषा, संचार, शिक्षा तथा सामाजिक सहभागिता पर पड़ता है।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार श्रवण दिव्यांगता के अंतर्गत मुख्यतः निम्न स्थितियाँ सम्मिलित हैं—
- बधिरता (Deafness) – जब व्यक्ति को अत्यधिक या पूर्ण श्रवण हानि होती है।
- कम सुनाई देना (Hard of Hearing) – जब व्यक्ति को कुछ श्रवण क्षमता रहती है, परंतु सामान्य बातचीत सुनने में कठिनाई होती है।
AYJNISHD(D) इन दोनों श्रेणियों के व्यक्तियों के लिए सेवाएँ प्रदान करता है।
श्रवण परीक्षण सेवाएँ (Audiological Services)
श्रवण दिव्यांगता के प्रभावी पुनर्वास की शुरुआत सही मूल्यांकन से होती है। इसलिए संस्थान आधुनिक उपकरणों एवं वैज्ञानिक विधियों की सहायता से श्रवण क्षमता का विस्तृत परीक्षण करता है।
श्रवण परीक्षण का उद्देश्य है—
- श्रवण हानि की पहचान करना।
- श्रवण हानि की गंभीरता का निर्धारण करना।
- श्रवण हानि के प्रकार का पता लगाना।
- उपयुक्त पुनर्वास योजना तैयार करना।
- आवश्यक श्रवण यंत्र का चयन करना।
प्रमुख श्रवण परीक्षण
संस्थान में विभिन्न प्रकार के आधुनिक श्रवण परीक्षण किए जाते हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
प्योर टोन ऑडियोमेट्री (Pure Tone Audiometry)
यह सबसे सामान्य श्रवण परीक्षण है, जिसके माध्यम से व्यक्ति की विभिन्न ध्वनि आवृत्तियों (Frequencies) को सुनने की क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है।
इम्पीडेन्स ऑडियोमेट्री (Impedance Audiometry)
इस परीक्षण द्वारा मध्य कर्ण (Middle Ear) की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन किया जाता है।
ओटो-अकॉस्टिक एमिशन (Otoacoustic Emissions – OAE)
यह परीक्षण विशेष रूप से नवजात एवं छोटे बच्चों की श्रवण जाँच में उपयोगी है।
ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पॉन्स ऑडियोमेट्री (Brainstem Evoked Response Audiometry – BERA)
यह परीक्षण उन बच्चों अथवा व्यक्तियों के लिए उपयोगी है जो सामान्य श्रवण परीक्षण में सहयोग नहीं कर सकते।
यह परीक्षण श्रवण तंत्रिका (Auditory Nerve) एवं मस्तिष्क तक ध्वनि संकेतों के संचरण का मूल्यांकन करता है।
स्पीच एवं लैंग्वेज पैथोलॉजी सेवाएँ
श्रवण हानि का सीधा प्रभाव भाषा एवं वाणी के विकास पर पड़ता है। यदि समय पर उचित प्रशिक्षण न मिले तो बच्चा स्पष्ट रूप से बोलने एवं भाषा सीखने में कठिनाई अनुभव कर सकता है।
इसी कारण AYJNISHD(D) में स्पीच एवं लैंग्वेज पैथोलॉजी विभाग अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यह विभाग निम्नलिखित सेवाएँ प्रदान करता है—
- भाषा मूल्यांकन।
- वाणी (Speech) का मूल्यांकन।
- उच्चारण दोषों की पहचान।
- भाषा विकास कार्यक्रम।
- संचार कौशल प्रशिक्षण।
- स्पीच थेरेपी।
- अभिभावक प्रशिक्षण।
स्पीच थेरेपी (Speech Therapy)
स्पीच थेरेपी का उद्देश्य व्यक्ति की संचार क्षमता का विकास करना है।
स्पीच थेरेपी के माध्यम से—
- स्पष्ट उच्चारण विकसित किया जाता है।
- शब्दावली में वृद्धि की जाती है।
- भाषा की समझ विकसित की जाती है।
- सामाजिक संचार कौशल बढ़ाए जाते हैं।
- आत्मविश्वास विकसित किया जाता है।
संस्थान प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता के अनुसार व्यक्तिकृत स्पीच थेरेपी योजना (Individualized Speech Therapy Plan) तैयार करता है।
भाषा विकास कार्यक्रम
श्रवण दिव्यांग बच्चों के लिए भाषा विकास अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
इस उद्देश्य से संस्थान विभिन्न प्रकार के भाषा विकास कार्यक्रम संचालित करता है।
इन कार्यक्रमों में—
- श्रवण प्रशिक्षण
- शब्दावली विकास
- वाक्य निर्माण
- मौखिक भाषा
- संचार कौशल
- सामाजिक भाषा (Social Communication)
पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
प्रारम्भिक हस्तक्षेप (Early Intervention)
प्रारम्भिक हस्तक्षेप AYJNISHD(D) की सबसे महत्वपूर्ण सेवाओं में से एक है।
यदि जन्म के बाद शीघ्र ही श्रवण हानि की पहचान हो जाए और समय पर हस्तक्षेप प्रारम्भ कर दिया जाए, तो बच्चे के भाषा विकास, सीखने की क्षमता तथा सामाजिक सहभागिता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।
प्रारम्भिक हस्तक्षेप कार्यक्रम में सामान्यतः निम्नलिखित सेवाएँ सम्मिलित होती हैं—
- श्रवण मूल्यांकन।
- श्रवण यंत्र की व्यवस्था।
- श्रवण प्रशिक्षण।
- भाषा विकास।
- स्पीच थेरेपी।
- अभिभावक परामर्श।
- नियमित प्रगति मूल्यांकन।
अभिभावक परामर्श
श्रवण दिव्यांग बच्चे के विकास में परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
इसी कारण संस्थान अभिभावकों के लिए नियमित परामर्श कार्यक्रम आयोजित करता है।
इन कार्यक्रमों में उन्हें—
- श्रवण दिव्यांगता की जानकारी।
- घर पर भाषा विकास की तकनीक।
- श्रवण यंत्र का सही उपयोग।
- विद्यालय चयन संबंधी मार्गदर्शन।
- समावेशी शिक्षा की जानकारी।
- सरकारी योजनाओं की जानकारी।
प्रदान की जाती है।
सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम
संस्थान समाज में श्रवण दिव्यांगता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है।
इन कार्यक्रमों के प्रमुख उद्देश्य हैं—
- श्रवण हानि की शीघ्र पहचान।
- समय पर उपचार एवं पुनर्वास।
- समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना।
- दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना।
- समाज में भेदभाव को कम करना।
विशेष शिक्षा में AYJNISHD(D) का महत्व
भारत में श्रवण दिव्यांग बच्चों के लिए वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित विशेष शिक्षा प्रणाली विकसित करने में AYJNISHD(D) का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।
इस संस्थान ने—
- श्रवण दिव्यांगता के क्षेत्र में विशेष शिक्षक तैयार किए।
- ऑडियोलॉजी एवं स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ विकसित किए।
- प्रारम्भिक हस्तक्षेप सेवाओं को बढ़ावा दिया।
- समावेशी शिक्षा के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया।
- शिक्षण सामग्री एवं प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए।
- पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार किया।
AYJNISHD(D) द्वारा संचालित शैक्षणिक कार्यक्रम
अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान (दिव्यांगजन) का प्रमुख उद्देश्य केवल पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करना ही नहीं है, बल्कि श्रवण एवं वाक् दिव्यांगता के क्षेत्र में योग्य एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना भी है। इसी उद्देश्य से संस्थान विशेष शिक्षा, ऑडियोलॉजी, स्पीच एवं लैंग्वेज पैथोलॉजी तथा पुनर्वास से संबंधित विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है।
इन कार्यक्रमों का संचालन भारतीय पुनर्वास परिषद् (Rehabilitation Council of India – RCI) द्वारा निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है। समय-समय पर पाठ्यक्रमों की संरचना एवं नामों में परिवर्तन हो सकता है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय आधिकारिक एवं नवीनतम पाठ्यक्रमों का अध्ययन करना आवश्यक है।
शैक्षणिक कार्यक्रमों के उद्देश्य
संस्थान द्वारा संचालित शैक्षणिक कार्यक्रमों के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
- श्रवण एवं वाक् दिव्यांगता के क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करना।
- विशेष शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना।
- समावेशी शिक्षा के लिए दक्ष शिक्षक उपलब्ध कराना।
- पुनर्वास सेवाओं का विस्तार करना।
- आधुनिक तकनीकों के उपयोग का प्रशिक्षण देना।
- अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीय स्तर पर मानव संसाधन का विकास करना।
RCI मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम
AYJNISHD(D) में समय-समय पर विभिन्न दीर्घकालीन (Long-Term) तथा अल्पकालीन (Short-Term) प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इनका उद्देश्य विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास के क्षेत्र में योग्य पेशेवर तैयार करना है।
संस्थान द्वारा संचालित प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है—
- विशेष शिक्षा (श्रवण दिव्यांगता)
- ऑडियोलॉजी
- स्पीच एवं लैंग्वेज पैथोलॉजी
- श्रवण एवं भाषा पुनर्वास
- समावेशी शिक्षा
- पुनर्वास प्रबंधन
- सतत पुनर्वास शिक्षा (CRE)
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य:
RPSC परीक्षा में सामान्यतः यह पूछा जाता है कि AYJNISHD(D) RCI मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है। इसलिए प्रत्येक पाठ्यक्रम का नाम याद करने की अपेक्षा संस्थान के कार्यक्षेत्र को समझना अधिक महत्वपूर्ण है।
सतत पुनर्वास शिक्षा (Continuing Rehabilitation Education – CRE)
विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास के क्षेत्र में नई तकनीकों एवं शोध निरंतर विकसित होते रहते हैं। इसलिए पहले से कार्यरत विशेष शिक्षकों एवं पुनर्वास पेशेवरों के ज्ञान एवं कौशल को अद्यतन बनाए रखने के लिए संस्थान CRE कार्यक्रम आयोजित करता है।
इन कार्यक्रमों के प्रमुख उद्देश्य हैं—
- नवीन शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण।
- समावेशी शिक्षा की आधुनिक अवधारणाओं से परिचित कराना।
- नई सहायक तकनीकों का उपयोग सिखाना।
- पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना।
- पुनर्वास पेशेवरों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाना।
अनुसंधान एवं विकास (Research and Development)
AYJNISHD(D) श्रवण एवं वाक् दिव्यांगता के क्षेत्र में अनुसंधान करने वाला भारत का प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान है। संस्थान का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक शोध करना नहीं, बल्कि ऐसे व्यावहारिक समाधान विकसित करना है जिनसे दिव्यांग व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं—
- श्रवण हानि की प्रारम्भिक पहचान।
- भाषा विकास।
- स्पीच थेरेपी की प्रभावशीलता।
- श्रवण यंत्रों का उपयोग।
- कॉक्लियर इम्प्लांट पुनर्वास।
- समावेशी शिक्षा।
- भारतीय सांकेतिक भाषा।
- सहायक प्रौद्योगिकी।
- डिजिटल शिक्षण संसाधन।
- संचार कौशल विकास।
अनुसंधान के प्रमुख उद्देश्य
संस्थान के अनुसंधान कार्यक्रमों के प्रमुख उद्देश्य हैं—
- श्रवण दिव्यांग बच्चों की अधिगम आवश्यकताओं का अध्ययन।
- नई पुनर्वास तकनीकों का विकास।
- श्रवण एवं भाषा प्रशिक्षण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन।
- शिक्षण सामग्री का विकास।
- राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण में सहयोग देना।
- विशेष शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना।
भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language) का महत्व
श्रवण दिव्यांग व्यक्तियों के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language – ISL) संचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
AYJNISHD(D) भारतीय सांकेतिक भाषा के महत्व को स्वीकार करते हुए इसके उपयोग एवं प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देता है। संस्थान विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं तथा जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से श्रवण दिव्यांग व्यक्तियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं अन्य पेशेवरों को प्रभावी संचार के लिए प्रेरित करता है।
महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य:
भारतीय सांकेतिक भाषा के मानकीकरण, विकास एवं प्रशिक्षण का राष्ट्रीय उत्तरदायित्व मुख्य रूप से भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (Indian Sign Language Research and Training Centre – ISLRTC), नई दिल्ली के पास है। AYJNISHD(D) श्रवण दिव्यांगता एवं पुनर्वास के व्यापक क्षेत्र में कार्य करता है, जबकि ISLRTC विशेष रूप से भारतीय सांकेतिक भाषा के विकास एवं प्रशिक्षण के लिए स्थापित संस्थान है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इन दोनों संस्थानों के कार्यों में अंतर पूछा जा सकता है।
कॉक्लियर इम्प्लांट पुनर्वास (Cochlear Implant Rehabilitation)
कुछ बच्चों एवं वयस्कों में अत्यधिक श्रवण हानि होने पर चिकित्सकों द्वारा कॉक्लियर इम्प्लांट (Cochlear Implant) की सलाह दी जाती है।
कॉक्लियर इम्प्लांट केवल शल्य चिकित्सा तक सीमित नहीं होता। इसके बाद दीर्घकालीन पुनर्वास आवश्यक होता है।
AYJNISHD(D) में कॉक्लियर इम्प्लांट प्राप्त व्यक्तियों के लिए विभिन्न प्रकार की पुनर्वास सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, जैसे—
- श्रवण प्रशिक्षण।
- स्पीच थेरेपी।
- भाषा विकास।
- नियमित प्रगति मूल्यांकन।
- अभिभावक मार्गदर्शन।
- विद्यालयी समायोजन में सहयोग।
इन सेवाओं का उद्देश्य व्यक्ति को अधिक प्रभावी ढंग से सुनने, समझने एवं बोलने में सहायता प्रदान करना है।
प्रकाशन (Publications)
AYJNISHD(D) श्रवण एवं वाक् दिव्यांगता से संबंधित अनेक प्रकार की शैक्षणिक एवं पुनर्वास सामग्री प्रकाशित करता है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- शिक्षक मार्गदर्शिकाएँ।
- प्रशिक्षण मॉड्यूल।
- पुनर्वास पुस्तिकाएँ।
- शोध रिपोर्ट।
- जागरूकता साहित्य।
- सूचना पुस्तिकाएँ।
- शिक्षण-अधिगम सामग्री।
- अभिभावक मार्गदर्शिका।
इन प्रकाशनों का उद्देश्य विशेष शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, पुनर्वास विशेषज्ञों तथा अभिभावकों को प्रामाणिक एवं उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है।
मानव संसाधन विकास में योगदान
AYJNISHD(D) ने भारत में श्रवण एवं वाक् दिव्यांगता के क्षेत्र में योग्य मानव संसाधन तैयार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संस्थान द्वारा प्रशिक्षित विशेषज्ञ देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं—
- विशेष विद्यालय।
- समावेशी विद्यालय।
- अस्पताल।
- पुनर्वास केंद्र।
- विश्वविद्यालय।
- अनुसंधान संस्थान।
- सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठन।
इन विशेषज्ञों ने देश में श्रवण दिव्यांग व्यक्तियों की शिक्षा एवं पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया है।
समावेशी शिक्षा में AYJNISHD(D) का योगदान
राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं समावेशी शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन में AYJNISHD(D) का महत्वपूर्ण योगदान है।
संस्थान निम्नलिखित क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग प्रदान करता है—
- सामान्य विद्यालयों के शिक्षकों का प्रशिक्षण।
- समावेशी कक्षा प्रबंधन।
- संचार रणनीतियों का विकास।
- श्रवण सहायक उपकरणों के उपयोग का प्रशिक्षण।
- शिक्षण-अधिगम सामग्री का विकास।
- व्यक्तिगत शिक्षण योजना (Individualized Education Plan – IEP) के निर्माण में मार्गदर्शन।
- अभिभावकों एवं विद्यालयों को परामर्श सेवाएँ।
AYJNISHD(D) की प्रमुख उपलब्धियाँ
संस्थान ने स्थापना के बाद से अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं—
- श्रवण एवं वाक् दिव्यांगता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता केंद्र के रूप में पहचान स्थापित की।
- देशभर में हजारों विशेष शिक्षकों एवं पुनर्वास विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया।
- श्रवण परीक्षण एवं पुनर्वास सेवाओं का विस्तार किया।
- प्रारम्भिक हस्तक्षेप कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया।
- समावेशी शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के माध्यम से पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार किया।
- राज्य सरकारों एवं विभिन्न संस्थानों को तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
RPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
| विषय | तथ्य |
|---|---|
| आधिकारिक नाम | अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान (दिव्यांगजन) |
| अंग्रेज़ी नाम | Ali Yavar Jung National Institute of Speech and Hearing Disabilities (Divyangjan) |
| संक्षिप्त नाम | AYJNISHD(D) |
| पूर्व नाम | AYJNIHH |
| स्थापना | 9 अगस्त, 1983 |
| मुख्यालय | मुंबई, महाराष्ट्र |
| प्रशासनिक नियंत्रण | दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) |
| प्रमुख कार्यक्षेत्र | श्रवण दिव्यांगता, वाक् एवं भाषा विकार |
| प्रमुख सेवाएँ | श्रवण परीक्षण, स्पीच थेरेपी, विशेष शिक्षा, प्रारम्भिक हस्तक्षेप, शिक्षक प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं पुनर्वास |
विशेष परीक्षा टिप:
AYJNISHD(D) और ISLRTC के कार्यों में अंतर अवश्य याद रखें। AYJNISHD(D) श्रवण एवं वाक् दिव्यांगता के समग्र पुनर्वास, शिक्षा एवं प्रशिक्षण का राष्ट्रीय संस्थान है, जबकि ISLRTC का प्रमुख कार्य भारतीय सांकेतिक भाषा का विकास, मानकीकरण, प्रशिक्षण तथा प्रचार-प्रसार है।
Disclaimer:
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