राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् National Council of Educational Research and Training (NCERT) | RPSC First Grade Special Education Notes
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (NCERT)
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (National Council of Educational Research and Training – NCERT) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) के अधीन कार्य करने वाली एक स्वायत्त (Autonomous) संस्था है। यह भारत में विद्यालयी शिक्षा (School Education) की गुणवत्ता में सुधार करने, पाठ्यचर्या (Curriculum) विकसित करने, पाठ्यपुस्तकों का निर्माण करने, शिक्षकों के प्रशिक्षण, शैक्षिक अनुसंधान तथा नवाचार को बढ़ावा देने का कार्य करती है।
विशेष शिक्षा (Special Education) तथा समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के क्षेत्र में भी NCERT की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह दिव्यांग बच्चों (Children with Disabilities – CwDs) के लिए समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने, शिक्षकों के प्रशिक्षण, शिक्षण सामग्री के विकास तथा शिक्षा संबंधी नीतियों के क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करती है।
NCERT का परिचय
NCERT भारत की सबसे महत्वपूर्ण शैक्षिक संस्थाओं में से एक है। इसकी स्थापना देशभर में विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता को एक समान बनाने तथा शिक्षा में वैज्ञानिक, लोकतांत्रिक एवं बाल-केंद्रित दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी।
यह संस्था केवल सामान्य शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs – CWSN) के लिए भी शिक्षा संबंधी अनेक कार्यक्रम संचालित करती है।
NCERT का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है तथा इसके विभिन्न क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (Regional Institutes of Education – RIEs) देश के विभिन्न भागों में स्थापित हैं।
NCERT की स्थापना
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (National Council of Educational Research and Training) |
| संक्षिप्त नाम | NCERT |
| स्थापना | 1 सितम्बर 1961 |
| मुख्यालय | श्री अरविन्द मार्ग, नई दिल्ली |
| प्रकृति | स्वायत्त संस्था (Autonomous Organisation) |
| प्रशासनिक मंत्रालय | भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय |
| उद्देश्य | विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं पाठ्यचर्या विकास |
NCERT की स्थापना का इतिहास
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में शिक्षा व्यवस्था विभिन्न राज्यों में अलग-अलग प्रकार की थी। पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियाँ तथा पाठ्यपुस्तकों में एकरूपता का अभाव था। शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान भी सीमित था तथा शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता भी समान नहीं थी।
इन समस्याओं को दूर करने के लिए भारत सरकार ने 1 सितम्बर 1961 को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) की स्थापना की।
NCERT की स्थापना के समय कई राष्ट्रीय संस्थाओं का विलय किया गया, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित संस्थाएँ शामिल थीं—
- National Institute of Basic Education
- National Fundamental Education Centre
- Central Bureau of Textbook Research
- Central Bureau of Educational and Vocational Guidance
- Directorate of Extension Programmes for Secondary Education
इन संस्थाओं के एकीकरण के बाद NCERT का गठन किया गया ताकि विद्यालयी शिक्षा से संबंधित सभी प्रमुख कार्य एक ही राष्ट्रीय संस्था के माध्यम से किए जा सकें।
NCERT की स्थापना के प्रमुख उद्देश्य
NCERT की स्थापना निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्यों को पूरा करने के लिए की गई—
विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार
देशभर के विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना तथा शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना।
राष्ट्रीय स्तर पर समान पाठ्यचर्या का विकास
विद्यालयों के लिए ऐसी पाठ्यचर्या विकसित करना जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति, संविधान के मूल्यों तथा विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
शैक्षिक अनुसंधान को बढ़ावा देना
शिक्षा के क्षेत्र में नई समस्याओं का अध्ययन करना तथा उनके समाधान के लिए अनुसंधान करना।
शिक्षक प्रशिक्षण
विद्यालयी शिक्षकों, प्रधानाचार्यों तथा शिक्षक-प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
नवीन शिक्षण विधियों का विकास
नई शिक्षण तकनीकों, डिजिटल शिक्षा, गतिविधि आधारित शिक्षण तथा बाल-केंद्रित शिक्षण को बढ़ावा देना।
पाठ्यपुस्तकों का विकास
राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्तापूर्ण, वैज्ञानिक तथा सरल भाषा में पाठ्यपुस्तकों का निर्माण करना।
समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना
दिव्यांग बच्चों, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित बच्चों तथा अन्य विशेष आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करने हेतु शैक्षिक संसाधनों का विकास करना।
NCERT का दृष्टिकोण (Vision)
NCERT का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं है, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है जिसमें—
- प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो।
- शिक्षा सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध हो।
- किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।
- प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं का सम्मान किया जाए।
- समावेशी शिक्षा को विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
- शिक्षा वैज्ञानिक, रचनात्मक, बाल-केंद्रित तथा अनुभव आधारित हो।
NCERT का मिशन (Mission)
NCERT निम्नलिखित मिशनों के माध्यम से अपने उद्देश्यों को पूरा करता है—
- विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मानक विकसित करना।
- राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework) तैयार करना।
- गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकों का विकास करना।
- शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षण सामग्री विकसित करना।
- शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना।
- राज्यों को शैक्षिक योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में तकनीकी सहायता प्रदान करना।
विशेष शिक्षा के संदर्भ में NCERT का महत्व
विशेष शिक्षा के क्षेत्र में NCERT की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज भारत में शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को सफल बनाना है।
NCERT यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि दिव्यांग बच्चे सामान्य विद्यालयों में अन्य बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।
विशेष शिक्षा के क्षेत्र में NCERT निम्नलिखित कार्य करता है—
- समावेशी शिक्षा संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करना।
- विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षण-अधिगम सामग्री विकसित करना।
- शिक्षकों को समावेशी कक्षा प्रबंधन का प्रशिक्षण देना।
- दिव्यांग विद्यार्थियों के मूल्यांकन के वैकल्पिक तरीकों का विकास करना।
- सार्वभौमिक अधिगम अभिकल्प (Universal Design for Learning – UDL) की अवधारणाओं को बढ़ावा देना।
- दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अनुकूलित शिक्षण रणनीतियों का विकास करना।
- विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए शिक्षकों हेतु प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करना।
- राज्यों के SCERT, DIET तथा अन्य प्रशिक्षण संस्थानों को तकनीकी सहायता प्रदान करना।
विशेष शिक्षा में NCERT की आवश्यकता
भारत में लाखों बच्चे विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं के साथ विद्यालयों में अध्ययन करते हैं। यदि शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण, उपयुक्त शिक्षण सामग्री तथा समावेशी शिक्षण पद्धतियों की जानकारी न हो, तो ऐसे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए NCERT—
- समावेशी कक्षाओं के लिए शिक्षकों को तैयार करता है।
- दिव्यांग बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं का अध्ययन करता है।
- विभिन्न दिव्यांगताओं के अनुसार शिक्षण विधियाँ विकसित करता है।
- पाठ्यक्रम में आवश्यक अनुकूलन (Curricular Adaptation) के सुझाव देता है।
- सभी बच्चों के लिए समान सीखने के अवसर उपलब्ध कराने हेतु विद्यालयों का मार्गदर्शन करता है।
NCERT की संगठनात्मक संरचना (Organisational Structure)
NCERT एक स्वायत्त संस्था (Autonomous Organization) है, लेकिन इसका प्रशासन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन होता है। संस्था के प्रभावी संचालन के लिए एक सुव्यवस्थित संगठनात्मक ढाँचा बनाया गया है, जिसमें नीति निर्माण, प्रशासन, अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा वित्तीय प्रबंधन के लिए अलग-अलग स्तर निर्धारित किए गए हैं।
NCERT की संगठनात्मक संरचना मुख्य रूप से निम्नलिखित भागों में विभाजित होती है—
- सामान्य परिषद् (General Body)
- कार्यकारी समिति (Executive Committee)
- निदेशक (Director)
- संयुक्त निदेशक (Joint Directors)
- विभिन्न शैक्षणिक विभाग (Academic Departments)
- क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (Regional Institutes of Education – RIEs)
- प्रशासनिक एवं वित्तीय शाखाएँ
NCERT का संगठनात्मक ढाँचा
भारत सरकार
शिक्षा मंत्रालय
│
▼
NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्)
│
├── सामान्य परिषद् (General Body)
│
├── कार्यकारी समिति (Executive Committee)
│
├── निदेशक (Director)
│
├── संयुक्त निदेशक
│
├── विभिन्न शैक्षणिक विभाग
│
├── क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIEs)
│
├── प्रशासनिक शाखा
│
└── वित्त एवं लेखा शाखा
सामान्य परिषद् (General Body)
सामान्य परिषद् NCERT की सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्था (Highest Policy Making Body) होती है। यह संस्था के दीर्घकालीन उद्देश्यों, योजनाओं तथा कार्यों की दिशा निर्धारित करती है।
इस परिषद् में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विशेषज्ञों, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों, राज्यों के शिक्षा विभागों, संसद सदस्यों तथा भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जाता है।
सामान्य परिषद् के प्रमुख कार्य
1. संस्था की नीतियाँ निर्धारित करना
NCERT की शिक्षा संबंधी नीतियों एवं दीर्घकालीन योजनाओं को स्वीकृति देना।
2. वार्षिक कार्यक्रमों को अनुमोदित करना
हर वर्ष संस्था द्वारा तैयार किए गए कार्यों एवं कार्यक्रमों को स्वीकृति प्रदान करना।
3. बजट की स्वीकृति
संस्था के वार्षिक बजट पर विचार करना तथा उसे अनुमोदित करना।
4. शिक्षा सुधारों पर निर्णय लेना
विद्यालयी शिक्षा में आवश्यक सुधारों के लिए सुझाव एवं निर्णय लेना।
5. राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की दिशा तय करना
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यालयी शिक्षा के विकास हेतु दिशा-निर्देश निर्धारित करना।
कार्यकारी समिति (Executive Committee)
कार्यकारी समिति NCERT की प्रमुख प्रशासनिक एवं कार्यान्वयन संस्था होती है। सामान्य परिषद् द्वारा निर्धारित नीतियों को लागू करने का कार्य यही समिति करती है।
यह समिति संस्था के दैनिक प्रशासन, परियोजनाओं, नियुक्तियों, अनुसंधान कार्यक्रमों तथा वित्तीय मामलों पर निर्णय लेती है।
कार्यकारी समिति के प्रमुख कार्य
नीतियों का क्रियान्वयन
सामान्य परिषद् द्वारा निर्धारित नीतियों को व्यवहार में लागू करना।
प्रशासनिक निर्णय लेना
संस्था के प्रशासनिक मामलों का संचालन करना।
अनुसंधान कार्यक्रमों की स्वीकृति
शैक्षिक अनुसंधान से संबंधित परियोजनाओं को अनुमोदित करना।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन
राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निगरानी करना।
वित्तीय नियंत्रण
वित्तीय व्यय एवं परियोजनाओं के लिए आवश्यक स्वीकृति प्रदान करना।
NCERT के निदेशक (Director)
NCERT का सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) निदेशक होता है।
निदेशक संस्था के समस्त शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं अनुसंधान कार्यों का नेतृत्व करता है।
निदेशक भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय तथा विभिन्न राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करके NCERT की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करता है।
निदेशक के प्रमुख कार्य
- NCERT का प्रशासनिक नेतृत्व करना।
- संस्था की शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी करना।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप योजनाएँ लागू करना।
- अनुसंधान परियोजनाओं को दिशा देना।
- विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना।
- राज्यों के SCERT, DIET तथा अन्य संस्थानों के साथ सहयोग करना।
- राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ शैक्षिक सहयोग स्थापित करना।
संयुक्त निदेशक (Joint Directors)
NCERT में विभिन्न कार्यों के संचालन हेतु संयुक्त निदेशक नियुक्त किए जाते हैं।
ये निदेशक के निर्देशन में कार्य करते हैं तथा विभिन्न विभागों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, अनुसंधान परियोजनाओं एवं प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन करते हैं।
संयुक्त निदेशकों के प्रमुख कार्य
- विभिन्न शैक्षणिक विभागों का समन्वय करना।
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना।
- अनुसंधान परियोजनाओं की निगरानी करना।
- राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करना।
- विशेष परियोजनाओं का प्रबंधन करना।
NCERT के प्रमुख विभाग (Major Departments)
NCERT में अनेक शैक्षणिक विभाग कार्यरत हैं। प्रत्येक विभाग विद्यालयी शिक्षा के किसी विशेष क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम विकास एवं शिक्षण सामग्री तैयार करने का कार्य करता है।
विशेष शिक्षा की परीक्षा की दृष्टि से इन विभागों का ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
1. Department of Education in Social Sciences (DESS)
यह विभाग सामाजिक विज्ञान विषयों के पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियों तथा अनुसंधान का कार्य करता है।
मुख्य कार्य—
- इतिहास
- भूगोल
- राजनीति विज्ञान
- अर्थशास्त्र
- सामाजिक विज्ञान शिक्षण
2. Department of Education in Science and Mathematics (DESM)
यह विभाग विज्ञान एवं गणित शिक्षा में सुधार के लिए कार्य करता है।
मुख्य कार्य—
- विज्ञान शिक्षण
- गणित शिक्षण
- प्रयोगात्मक शिक्षा
- STEM शिक्षा
- विज्ञान मेले एवं नवाचार
3. Department of Education in Languages (DEL)
यह विभाग भाषा शिक्षण से संबंधित कार्य करता है।
मुख्य कार्य—
- हिन्दी शिक्षा
- अंग्रेज़ी शिक्षा
- उर्दू शिक्षा
- संस्कृत शिक्षा
- बहुभाषिक शिक्षा
4. Department of Elementary Education (DEE)
यह विभाग प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शिक्षा के विकास के लिए कार्य करता है।
मुख्य कार्य—
- प्रारंभिक शिक्षा
- बाल-केंद्रित शिक्षण
- आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (Foundational Literacy and Numeracy)
- प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण
5. Department of Teacher Education (DTE)
यह विभाग शिक्षक शिक्षा के विकास का प्रमुख केंद्र है।
विशेष शिक्षा की दृष्टि से यह विभाग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मुख्य कार्य—
- शिक्षक प्रशिक्षण
- इन-सर्विस प्रशिक्षण
- प्री-सर्विस प्रशिक्षण
- शिक्षक दक्षता विकास
- समावेशी शिक्षण का प्रशिक्षण
6. Department of Educational Psychology and Foundations of Education (DEPFE)
यह विभाग शिक्षा मनोविज्ञान, बाल विकास तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अध्ययन का प्रमुख विभाग है।
विशेष शिक्षा से संबंधित अधिकांश शोध इसी विभाग के माध्यम से किए जाते हैं।
DEPFE के प्रमुख कार्य
- बाल विकास पर अनुसंधान
- अधिगम सिद्धांतों का अध्ययन
- मनोवैज्ञानिक परीक्षण
- समावेशी शिक्षा पर शोध
- दिव्यांग बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं का अध्ययन
- विद्यालयी परामर्श (Guidance and Counselling)
- मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम
- जीवन कौशल शिक्षा
विशेष शिक्षा के संदर्भ में DEPFE का महत्व
विशेष शिक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह विभाग अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि—
- यह समावेशी शिक्षा पर शोध करता है।
- CWSN के लिए शिक्षण रणनीतियाँ विकसित करता है।
- शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करता है।
- विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं से संबंधित शैक्षिक आवश्यकताओं का अध्ययन करता है।
- विद्यालयों के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता संबंधी सामग्री विकसित करता है।
7. Department of Educational Survey Division (ESD)
यह विभाग शिक्षा संबंधी आँकड़ों, सर्वेक्षणों एवं मूल्यांकन का कार्य करता है।
मुख्य कार्य—
- राष्ट्रीय शैक्षिक सर्वेक्षण
- उपलब्धि परीक्षण
- विद्यालयी शिक्षा का मूल्यांकन
- शैक्षिक आँकड़ों का विश्लेषण
8. Educational Kits, Laboratory and Learning Resources
यह इकाई विद्यालयों के लिए विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्री तैयार करती है।
मुख्य कार्य—
- विज्ञान किट
- गणित किट
- शिक्षण उपकरण
- प्रयोगशाला सामग्री
- गतिविधि आधारित अधिगम संसाधन
विशेष शिक्षा की दृष्टि से इन विभागों का महत्व
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए NCERT के विभिन्न विभाग मिलकर कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए—
- DEPFE दिव्यांग बच्चों की मनोवैज्ञानिक एवं शैक्षिक आवश्यकताओं का अध्ययन करता है।
- DTE शिक्षकों को समावेशी शिक्षा एवं विशेष शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण देता है।
- DEE प्रारंभिक स्तर पर समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाता है।
- DEL विभिन्न भाषाओं में सुलभ एवं समावेशी शिक्षण सामग्री विकसित करता है।
- DESM एवं DESS विषय-विशेष शिक्षण को सभी विद्यार्थियों, विशेषकर CWSN, के लिए अधिक सुगम बनाने हेतु सामग्री एवं रणनीतियाँ विकसित करते हैं।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- NCERT की स्थापना 1 सितम्बर 1961 को हुई।
- इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
- यह शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्था है।
- DEPFE विशेष शिक्षा, समावेशी शिक्षा, बाल विकास एवं शिक्षा मनोविज्ञान से सबसे अधिक संबंधित विभाग है।
- DTE शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण का प्रमुख विभाग है।
क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (Regional Institutes of Education – RIEs)
NCERT ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में विद्यालयी शिक्षा, शिक्षक शिक्षा तथा शैक्षिक अनुसंधान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से क्षेत्रीय शिक्षा संस्थानों (Regional Institutes of Education – RIEs) की स्थापना की है। ये संस्थान NCERT के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कार्य करते हैं और अपने-अपने क्षेत्रों के राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को शैक्षिक सहायता प्रदान करते हैं।
इन संस्थानों का मुख्य उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता लाना, शिक्षक प्रशिक्षण को मजबूत बनाना, अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीतियों एवं कार्यक्रमों को राज्यों तक प्रभावी रूप से पहुँचाना है।
RIEs की स्थापना का उद्देश्य
क्षेत्रीय शिक्षा संस्थानों की स्थापना निम्नलिखित उद्देश्यों को ध्यान में रखकर की गई—
- विभिन्न राज्यों की शैक्षिक आवश्यकताओं को समझना।
- शिक्षक शिक्षा को सुदृढ़ बनाना।
- विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार लाना।
- राज्य सरकारों को तकनीकी एवं शैक्षणिक सहयोग प्रदान करना।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं NCERT की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करना।
- समावेशी शिक्षा तथा विशेष शिक्षा को राज्यों तक पहुँचाना।
- स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण सामग्री एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना।
NCERT के पाँच क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIEs)
वर्तमान में NCERT के अधीन पाँच प्रमुख Regional Institutes of Education कार्यरत हैं।
| क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान | स्थान | स्थापना वर्ष | कार्यक्षेत्र |
|---|---|---|---|
| RIE, अजमेर | राजस्थान | 1963 | उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र |
| RIE, भोपाल | मध्य प्रदेश | 1963 | मध्य क्षेत्र |
| RIE, भुवनेश्वर | ओडिशा | 1963 | पूर्वी क्षेत्र |
| RIE, मैसूर | कर्नाटक | 1963 | दक्षिणी क्षेत्र |
| North East Regional Institute of Education (NERIE) | शिलांग, मेघालय | 1995 | पूर्वोत्तर क्षेत्र |
ध्यान दें: RIE, शिलांग का आधिकारिक नाम North East Regional Institute of Education (NERIE) है।
1. Regional Institute of Education (RIE), अजमेर
RIE, अजमेर उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों के लिए कार्य करता है।
प्रमुख कार्य
- शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों का संचालन।
- विद्यालयी शिक्षा पर अनुसंधान।
- शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- पाठ्यचर्या विकास में सहयोग।
- समावेशी शिक्षा के लिए प्रशिक्षण।
- राज्य सरकारों एवं SCERT के साथ समन्वय।
कार्यक्षेत्र
- राजस्थान
- हरियाणा
- पंजाब
- हिमाचल प्रदेश
- जम्मू एवं कश्मीर
- लद्दाख
- चंडीगढ़
- दिल्ली (आवश्यकतानुसार शैक्षणिक सहयोग)
2. Regional Institute of Education (RIE), भोपाल
यह संस्थान मध्य भारत के राज्यों को शैक्षणिक सहयोग प्रदान करता है।
प्रमुख कार्य
- शिक्षक प्रशिक्षण
- शैक्षिक अनुसंधान
- विज्ञान एवं गणित शिक्षा
- समावेशी शिक्षा
- डिजिटल शिक्षण
- शैक्षिक नवाचार
कार्यक्षेत्र
- मध्य प्रदेश
- छत्तीसगढ़
- महाराष्ट्र
- गुजरात
- गोवा
- दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव
3. Regional Institute of Education (RIE), भुवनेश्वर
यह संस्थान पूर्वी भारत की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करता है।
प्रमुख कार्य
- शिक्षक शिक्षा
- अनुसंधान
- पाठ्यक्रम विकास
- शैक्षिक मूल्यांकन
- समावेशी शिक्षा का विस्तार
- स्थानीय भाषाओं में शिक्षण सामग्री विकसित करना
कार्यक्षेत्र
- ओडिशा
- बिहार
- झारखंड
- पश्चिम बंगाल
4. Regional Institute of Education (RIE), मैसूर
यह दक्षिण भारत के राज्यों के लिए कार्य करता है।
प्रमुख कार्य
- शिक्षक शिक्षा
- ICT आधारित शिक्षण
- अनुसंधान
- समावेशी शिक्षा
- विज्ञान एवं गणित शिक्षा
- विद्यालय सुधार कार्यक्रम
कार्यक्षेत्र
- कर्नाटक
- केरल
- तमिलनाडु
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
- पुडुचेरी
- लक्षद्वीप
5. North East Regional Institute of Education (NERIE), शिलांग
पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 1995 में NERIE की स्थापना की गई।
प्रमुख कार्य
- पूर्वोत्तर राज्यों के शिक्षकों का प्रशिक्षण।
- स्थानीय भाषाओं एवं संस्कृति पर आधारित शिक्षण सामग्री तैयार करना।
- समावेशी शिक्षा का विस्तार।
- अनुसंधान एवं नवाचार।
- जनजातीय क्षेत्रों के लिए शिक्षा कार्यक्रम विकसित करना।
कार्यक्षेत्र
- असम
- अरुणाचल प्रदेश
- मेघालय
- मणिपुर
- मिजोरम
- नागालैंड
- त्रिपुरा
- सिक्किम
RIEs के प्रमुख कार्य
शिक्षक शिक्षा (Teacher Education)
RIEs चार वर्षीय समेकित शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (Integrated Teacher Education Programme – ITEP) सहित विभिन्न शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों का संचालन करते हैं। साथ ही सेवा-पूर्व (Pre-service) एवं सेवाकालीन (In-service) प्रशिक्षण भी आयोजित किए जाते हैं।
शिक्षक प्रशिक्षण
समय-समय पर विद्यालयी शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, शिक्षक-प्रशिक्षकों तथा शिक्षा अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
प्रशिक्षण के प्रमुख विषय—
- समावेशी शिक्षा
- नई शिक्षा नीति
- गतिविधि आधारित शिक्षण
- ICT आधारित शिक्षण
- सतत् व्यावसायिक विकास
- अधिगम परिणाम आधारित शिक्षण
शैक्षिक अनुसंधान
RIEs विद्यालयी शिक्षा से संबंधित अनेक अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित करते हैं।
इनमें प्रमुख विषय हैं—
- अधिगम कठिनाइयाँ
- समावेशी शिक्षा
- मूल्यांकन प्रणाली
- विज्ञान शिक्षण
- भाषा शिक्षण
- गणित शिक्षा
- शिक्षक दक्षता
पाठ्यचर्या एवं शिक्षण सामग्री का विकास
RIEs राज्य सरकारों एवं SCERT के सहयोग से—
- प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करते हैं।
- शिक्षण-अधिगम सामग्री विकसित करते हैं।
- गतिविधि पुस्तिकाएँ तैयार करते हैं।
- समावेशी कक्षा के लिए संसाधन विकसित करते हैं।
विद्यालयों को शैक्षणिक सहयोग
RIEs विभिन्न विद्यालयों को निम्न प्रकार का सहयोग प्रदान करते हैं—
- शिक्षण पद्धति में सुधार
- शिक्षकों का मार्गदर्शन
- विद्यालय नेतृत्व प्रशिक्षण
- मूल्यांकन सुधार
- नवाचार कार्यक्रम
विशेष शिक्षा एवं समावेशी शिक्षा में RIEs की भूमिका
विशेष शिक्षा के क्षेत्र में RIEs की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये संस्थान समावेशी शिक्षा को विद्यालय स्तर तक पहुँचाने में सक्रिय योगदान देते हैं।
इनके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
समावेशी शिक्षा पर प्रशिक्षण
सामान्य शिक्षकों को यह प्रशिक्षण दिया जाता है कि वे दिव्यांग विद्यार्थियों को सामान्य कक्षा में प्रभावी ढंग से कैसे पढ़ाएँ।
CWSN के लिए शिक्षण रणनीतियों का विकास
RIEs विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं के अनुसार उपयुक्त शिक्षण विधियाँ एवं संसाधन विकसित करते हैं।
शिक्षण-अधिगम सामग्री (Teaching Learning Material – TLM) का विकास
दिव्यांग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए—
- अनुकूलित TLM
- गतिविधि आधारित सामग्री
- दृश्य एवं श्रव्य सामग्री
- सुलभ अधिगम संसाधन
तैयार किए जाते हैं।
शिक्षक दक्षता विकास
समावेशी कक्षा में कार्यरत शिक्षकों को निम्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाता है—
- Individualized Education Plan (IEP)
- Universal Design for Learning (UDL)
- कक्षा अनुकूलन (Classroom Adaptation)
- व्यवहार प्रबंधन
- सतत एवं समग्र मूल्यांकन में अनुकूलन
- सहायक एवं अनुकूल तकनीक (Assistive Technology)
राज्य सरकारों को सहयोग
RIEs राज्यों के—
- SCERT
- DIET
- BRC
- CRC
- शिक्षा विभाग
को समावेशी शिक्षा संबंधी तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं।
NCERT के प्रमुख कार्य एवं दायित्व (Functions of NCERT)
राष्ट्रीय स्तर पर विद्यालयी शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और वैज्ञानिक बनाने के लिए NCERT अनेक महत्वपूर्ण कार्य करता है।
1. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या का विकास
NCERT विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework – NCF) विकसित करता है। इसके आधार पर राज्यों को अपने पाठ्यक्रम तैयार करने में मार्गदर्शन मिलता है।
2. पाठ्यपुस्तकों का निर्माण
NCERT कक्षा 1 से 12 तक की उच्च गुणवत्ता वाली पाठ्यपुस्तकों का निर्माण करता है। इन पुस्तकों की विशेषताएँ हैं—
- सरल भाषा
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- बाल-केंद्रित प्रस्तुति
- गतिविधि आधारित अधिगम
- समावेशी दृष्टिकोण
- राष्ट्रीय मूल्यों का समावेश
3. शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण
NCERT नियमित रूप से—
- सेवापूर्व प्रशिक्षण (Pre-service Training)
- सेवाकालीन प्रशिक्षण (In-service Training)
- ऑनलाइन प्रशिक्षण
- कार्यशालाएँ
- अभिमुखीकरण कार्यक्रम (Orientation Programmes)
आयोजित करता है।
4. शैक्षिक अनुसंधान
विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने हेतु NCERT विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान करता है, जैसे—
- बाल विकास
- अधिगम
- समावेशी शिक्षा
- मूल्यांकन
- ICT
- शिक्षक शिक्षा
- मानसिक स्वास्थ्य
- जीवन कौशल
5. शैक्षिक नवाचार को बढ़ावा देना
NCERT विद्यालयों में नवाचार को प्रोत्साहित करता है, जैसे—
- गतिविधि आधारित शिक्षण
- प्रयोगात्मक अधिगम
- कला समेकित शिक्षा
- खेल आधारित अधिगम
- अनुभवात्मक अधिगम
- डिजिटल शिक्षण
6. राज्यों को शैक्षणिक सहयोग
NCERT देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को निम्न क्षेत्रों में सहयोग प्रदान करता है—
- पाठ्यचर्या विकास
- शिक्षक प्रशिक्षण
- मूल्यांकन सुधार
- अनुसंधान
- समावेशी शिक्षा
- शैक्षिक योजनाओं का क्रियान्वयन
7. राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि सर्वेक्षण एवं मूल्यांकन
NCERT विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि सर्वेक्षण (National Achievement Survey – NAS) तथा अन्य मूल्यांकन संबंधी अध्ययन आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य
- NCERT के कुल 5 क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIEs/NERIE) हैं।
- चार RIE – अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर और मैसूर।
- एक NERIE – शिलांग (मेघालय)।
- RIEs का मुख्य कार्य शिक्षक शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा राज्यों को शैक्षणिक सहयोग प्रदान करना है।
- विशेष शिक्षा के संदर्भ में RIEs समावेशी शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, TLM विकास, IEP, UDL तथा CWSN के लिए शिक्षण रणनीतियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework – NCF) के विकास में NCERT की भूमिका
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework – NCF) भारत में विद्यालयी शिक्षा के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज (Guiding Document) है। इसका निर्माण NCERT द्वारा विभिन्न शिक्षा विशेषज्ञों, शिक्षकों, मनोवैज्ञानिकों, विश्वविद्यालयों, राज्यों, अभिभावकों तथा अन्य हितधारकों के परामर्श से किया जाता है।
NCF विद्यालयी शिक्षा की दिशा, उद्देश्य, पाठ्यचर्या, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, मूल्यांकन, शिक्षक की भूमिका तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए आवश्यक सिद्धांतों को निर्धारित करती है।
यह स्वयं पाठ्यपुस्तक या पाठ्यक्रम नहीं होती, बल्कि पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों एवं शिक्षण पद्धतियों के विकास के लिए आधार प्रदान करती है।
NCERT द्वारा विकसित प्रमुख राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखाएँ (NCF)
अब तक NCERT द्वारा विभिन्न समय पर कई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखाएँ विकसित की गई हैं।
| राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा | वर्ष |
|---|---|
| National Curriculum for Elementary and Secondary Education | 1975 |
| National Curriculum Framework | 1988 |
| National Curriculum Framework | 2000 |
| National Curriculum Framework | 2005 |
| National Curriculum Framework for School Education (NCF-SE) | 2023 |
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य: वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप National Curriculum Framework for School Education (NCF-SE 2023) लागू की जा रही है।
NCF विकसित करने में NCERT की भूमिका
शैक्षिक आवश्यकताओं का अध्ययन
NCERT देशभर की विद्यालयी शिक्षा की वर्तमान स्थिति, विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, शिक्षकों के अनुभव, सामाजिक परिवर्तनों तथा वैश्विक शिक्षा प्रवृत्तियों का अध्ययन करता है।
विशेषज्ञ समितियों का गठन
NCERT विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों, विश्वविद्यालयों के शिक्षकों, SCERT, DIET, विद्यालयी शिक्षकों तथा अन्य हितधारकों की समितियाँ बनाता है।
राज्यों से परामर्श
भारत के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से सुझाव प्राप्त किए जाते हैं ताकि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या पूरे देश की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाई जा सके।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विकास
NCF का निर्माण राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों के अनुरूप किया जाता है।
पाठ्यपुस्तकों का आधार
NCF के आधार पर NCERT नई पाठ्यपुस्तकों का निर्माण करता है तथा राज्यों को भी अपने पाठ्यक्रम विकसित करने हेतु मार्गदर्शन प्रदान करता है।
NCF के प्रमुख उद्देश्य
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना।
- रटने की प्रवृत्ति (Rote Learning) को कम करना।
- अवधारणात्मक समझ (Conceptual Understanding) विकसित करना।
- अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) को बढ़ावा देना।
- समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाना।
- विद्यार्थियों में रचनात्मकता विकसित करना।
- जीवन कौशल एवं नैतिक मूल्यों का विकास करना।
- स्थानीय ज्ञान एवं भारतीय संस्कृति का समावेश करना।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना।
विशेष शिक्षा के संदर्भ में NCF का महत्व
विशेष शिक्षा की दृष्टि से NCF अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज है क्योंकि यह प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमता, आवश्यकता तथा गति के अनुसार सीखने का अवसर प्रदान करने पर बल देता है।
NCF के अनुसार—
- सभी बच्चों को समान शिक्षा का अधिकार है।
- दिव्यांग बच्चों को सामान्य विद्यालयों में शिक्षा मिलनी चाहिए।
- आवश्यकता अनुसार उचित अनुकूलन (Reasonable Accommodation) किए जाने चाहिए।
- शिक्षक को प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझना चाहिए।
- मूल्यांकन में लचीलापन होना चाहिए।
- सहायक एवं अनुकूल तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए।
NCERT द्वारा पाठ्यपुस्तकों के निर्माण में भूमिका
भारत में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली विद्यालयी पाठ्यपुस्तकों का निर्माण NCERT द्वारा किया जाता है।
इन पुस्तकों का उद्देश्य केवल परीक्षा की तैयारी कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में समझ, विश्लेषण, रचनात्मकता तथा समस्या समाधान क्षमता विकसित करना भी है।
पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया
NCERT द्वारा पाठ्यपुस्तकों का निर्माण एक व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।
1. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा का अध्ययन
सबसे पहले NCF के सिद्धांतों एवं उद्देश्यों का अध्ययन किया जाता है।
2. विशेषज्ञ समितियों का गठन
विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ, अनुभवी शिक्षक, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर तथा शोधकर्ता मिलकर पुस्तक निर्माण समिति बनाते हैं।
3. प्रारूप (Draft) तैयार करना
पाठ्यपुस्तक का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया जाता है।
4. विशेषज्ञ समीक्षा
मसौदे की अनेक विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।
5. विद्यालयों में परीक्षण
कई बार शिक्षण सामग्री का विद्यालयों में परीक्षण (Field Trial) भी किया जाता है ताकि उसकी उपयोगिता का आकलन किया जा सके।
6. आवश्यक संशोधन
विशेषज्ञों एवं शिक्षकों के सुझावों के आधार पर आवश्यक संशोधन किए जाते हैं।
7. अंतिम प्रकाशन
सभी सुधारों के बाद पुस्तक प्रकाशित की जाती है।
NCERT की पाठ्यपुस्तकों की प्रमुख विशेषताएँ
सरल एवं स्पष्ट भाषा
पुस्तकों की भाषा विद्यार्थियों के स्तर के अनुसार सरल रखी जाती है।
गतिविधि आधारित अधिगम
केवल सैद्धांतिक जानकारी न देकर विभिन्न गतिविधियाँ, परियोजनाएँ एवं प्रयोग शामिल किए जाते हैं।
चित्रों एवं उदाहरणों का उपयोग
सीखने को रोचक बनाने के लिए उपयुक्त चित्र, चार्ट एवं वास्तविक जीवन के उदाहरण दिए जाते हैं।
बाल-केंद्रित दृष्टिकोण
विद्यार्थी को शिक्षण प्रक्रिया का केंद्र माना जाता है।
अवधारणात्मक अधिगम
रटने की अपेक्षा समझ विकसित करने पर अधिक बल दिया जाता है।
समावेशी दृष्टिकोण
पुस्तकों में विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, भाषाई एवं दिव्यांग पृष्ठभूमि वाले बच्चों की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाता है।
लैंगिक समानता
पुस्तकों में महिलाओं एवं पुरुषों दोनों को समान महत्व दिया जाता है तथा लैंगिक रूढ़ियों से बचने का प्रयास किया जाता है।
भारतीय संस्कृति एवं संविधान के मूल्यों का समावेश
पुस्तकों में लोकतंत्र, समानता, धर्मनिरपेक्षता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पर्यावरण संरक्षण तथा संवैधानिक मूल्यों को स्थान दिया जाता है।
विशेष शिक्षा एवं समावेशी शिक्षा में NCERT का योगदान
NCERT ने समावेशी शिक्षा को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न भाग बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह संस्था केवल नीतियाँ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षकों, विद्यालयों एवं राज्यों को आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग भी प्रदान करती है।
1. समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना
NCERT यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि प्रत्येक बच्चा, चाहे वह किसी भी प्रकार की दिव्यांगता से प्रभावित हो, सामान्य विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके।
2. समावेशी कक्षा के लिए दिशानिर्देश
NCERT समय-समय पर ऐसे दिशानिर्देश विकसित करता है जिनके माध्यम से शिक्षक समावेशी कक्षाओं का प्रभावी संचालन कर सकें।
इन दिशानिर्देशों में शामिल हैं—
- कक्षा अनुकूलन
- शिक्षण रणनीतियाँ
- वैकल्पिक मूल्यांकन
- सहायक उपकरणों का उपयोग
- सभी बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित करना
3. शिक्षक प्रशिक्षण
NCERT समावेशी शिक्षा के लिए सामान्य शिक्षकों तथा विशेष शिक्षकों दोनों को प्रशिक्षण प्रदान करता है।
प्रमुख प्रशिक्षण विषय—
- Inclusive Pedagogy
- Classroom Adaptation
- Universal Design for Learning (UDL)
- Individualized Education Plan (IEP)
- Behaviour Management
- Differentiated Instruction
- Assistive Technology
- Foundational Literacy and Numeracy में समावेशन
4. शिक्षण-अधिगम सामग्री (Teaching Learning Material – TLM)
NCERT दिव्यांग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्री विकसित करता है।
इनमें शामिल हैं—
- गतिविधि आधारित TLM
- चित्र आधारित सामग्री
- बड़े अक्षरों (Large Print) वाली सामग्री
- सरल भाषा आधारित सामग्री
- समावेशी कार्यपुस्तिकाएँ
- शिक्षक मार्गदर्शिकाएँ
5. अनुसंधान एवं नवाचार
NCERT समय-समय पर निम्न विषयों पर अनुसंधान करता है—
- समावेशी शिक्षा
- अधिगम कठिनाइयाँ
- बौद्धिक दिव्यांगता
- ऑटिज्म
- दृष्टि एवं श्रवण बाधिता
- व्यवहार संबंधी समस्याएँ
- मूल्यांकन में अनुकूलन
- शिक्षक दक्षता
6. राज्यों को तकनीकी सहयोग
NCERT निम्न संस्थाओं को समावेशी शिक्षा के संबंध में तकनीकी सहायता प्रदान करता है—
- SCERT
- DIET
- SIEMAT
- शिक्षा विभाग
- विद्यालय शिक्षा बोर्ड
- शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान
7. डिजिटल शिक्षण संसाधनों का विकास
NCERT ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक ई-संसाधन विकसित किए हैं, जिनका उपयोग दिव्यांग एवं सामान्य दोनों प्रकार के विद्यार्थी कर सकते हैं।
इन संसाधनों में ई-पुस्तकें, ऑडियो-वीडियो सामग्री, डिजिटल पाठ, इंटरैक्टिव शिक्षण सामग्री आदि शामिल हैं।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- NCF का निर्माण NCERT करता है, जबकि उसके आधार पर राज्य अपने पाठ्यक्रम विकसित कर सकते हैं।
- NCF-SE 2023 का विकास राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप किया गया है।
- NCERT की पाठ्यपुस्तकें रटने की बजाय अवधारणात्मक एवं अनुभवात्मक अधिगम पर आधारित होती हैं।
- विशेष शिक्षा के क्षेत्र में NCERT का प्रमुख योगदान समावेशी शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, TLM विकास, अनुसंधान तथा राज्यों को तकनीकी सहयोग है।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs – CWSN) के लिए NCERT की प्रमुख पहलें
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को प्रभावी बनाने के लिए NCERT ने अनेक शैक्षणिक पहल (Initiatives) की हैं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा—चाहे वह किसी भी प्रकार की दिव्यांगता, सामाजिक, आर्थिक या भाषाई पृष्ठभूमि से संबंधित हो—गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके।
NCERT की पहलें केवल दिव्यांग बच्चों के लिए अलग व्यवस्था बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामान्य विद्यालयों को अधिक समावेशी (Inclusive), सुलभ (Accessible) एवं बाल-अनुकूल (Child Friendly) बनाने पर भी केंद्रित हैं।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए NCERT के प्रमुख उद्देश्य
NCERT निम्नलिखित उद्देश्यों को ध्यान में रखकर अपनी योजनाएँ एवं कार्यक्रम संचालित करता है—
- प्रत्येक बच्चे को समान शिक्षा का अवसर प्रदान करना।
- समावेशी विद्यालयों को सशक्त बनाना।
- सामान्य शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के लिए प्रशिक्षित करना।
- दिव्यांग बच्चों के लिए उपयुक्त शिक्षण-अधिगम सामग्री विकसित करना।
- मूल्यांकन प्रणाली को अधिक लचीला एवं समावेशी बनाना।
- शिक्षा में सहायक एवं अनुकूल तकनीकों (Assistive Technologies) के उपयोग को बढ़ावा देना।
- राज्यों को समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी सहायता प्रदान करना।
समावेशी शिक्षा के लिए NCERT की प्रमुख पहलें
1. समावेशी शिक्षण (Inclusive Pedagogy) को बढ़ावा
NCERT ऐसी शिक्षण पद्धतियों का विकास करता है जिनसे एक ही कक्षा में विभिन्न क्षमताओं वाले विद्यार्थी साथ मिलकर सीख सकें।
समावेशी शिक्षण के अंतर्गत—
- प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति का सम्मान किया जाता है।
- विभिन्न प्रकार की शिक्षण विधियों का उपयोग किया जाता है।
- समूह कार्य एवं सहयोगात्मक अधिगम को प्रोत्साहित किया जाता है।
- सभी विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाती है।
2. कक्षा अनुकूलन (Classroom Adaptation)
NCERT शिक्षकों को यह प्रशिक्षण देता है कि वे कक्षा को इस प्रकार व्यवस्थित करें कि प्रत्येक विद्यार्थी सहजता से सीख सके।
कक्षा अनुकूलन के प्रमुख उदाहरण—
- बैठने की उपयुक्त व्यवस्था।
- प्रकाश एवं ध्वनि की उचित व्यवस्था।
- व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए पर्याप्त स्थान।
- बड़े अक्षरों वाली शिक्षण सामग्री।
- चित्र एवं मॉडल का उपयोग।
- सहायक उपकरणों का प्रयोग।
- आवश्यकतानुसार अतिरिक्त समय देना।
3. पाठ्यचर्या अनुकूलन (Curricular Adaptation)
सभी विद्यार्थियों की सीखने की आवश्यकताएँ समान नहीं होतीं। इसलिए NCERT पाठ्यचर्या में आवश्यक लचीलापन अपनाने पर बल देता है।
इसमें शामिल हैं—
- कठिन विषयवस्तु को सरल बनाना।
- वैकल्पिक गतिविधियाँ उपलब्ध कराना।
- सीखने की गति के अनुसार कार्य देना।
- विषयवस्तु का चरणबद्ध प्रस्तुतीकरण।
- व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार शिक्षण योजना बनाना।
4. शिक्षण-अधिगम सामग्री (Teaching Learning Material – TLM)
NCERT विभिन्न प्रकार की समावेशी शिक्षण सामग्री विकसित करता है।
इनकी प्रमुख विशेषताएँ—
- सरल भाषा
- चित्र आधारित प्रस्तुति
- गतिविधि आधारित सामग्री
- बड़े अक्षरों वाली सामग्री
- डिजिटल संसाधन
- शिक्षक मार्गदर्शिका
- छात्र कार्यपुस्तिका
5. मूल्यांकन में अनुकूलन (Assessment Accommodation)
समावेशी शिक्षा में केवल शिक्षण ही नहीं, बल्कि मूल्यांकन भी विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए।
NCERT निम्नलिखित प्रकार के अनुकूलन का समर्थन करता है—
- अतिरिक्त समय
- प्रश्नों को पढ़कर सुनाना (जहाँ उपयुक्त हो)
- वैकल्पिक प्रश्न
- मौखिक उत्तर की अनुमति (आवश्यकतानुसार)
- सहायक उपकरणों का उपयोग
- उपयुक्त परीक्षा वातावरण
- क्षमता आधारित मूल्यांकन
ध्यान दें: परीक्षा में दिए जाने वाले विशिष्ट अनुकूलन संबंधित परीक्षा बोर्ड, सक्षम प्राधिकारी तथा लागू नियमों के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं।
Universal Design for Learning (UDL) को बढ़ावा
NCERT विद्यालयों में Universal Design for Learning (UDL) की अवधारणा को प्रोत्साहित करता है।
UDL का उद्देश्य ऐसा शिक्षण वातावरण विकसित करना है जिसमें प्रारम्भ से ही सभी प्रकार के विद्यार्थी सीख सकें और बाद में अलग-अलग व्यवस्थाएँ करने की आवश्यकता कम पड़े।
UDL के तीन प्रमुख सिद्धांत हैं—
1. सीखने के अनेक तरीके (Multiple Means of Engagement)
विद्यार्थियों की रुचि एवं प्रेरणा बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का उपयोग किया जाता है।
उदाहरण—
- खेल आधारित अधिगम
- समूह कार्य
- परियोजना कार्य
- अनुभवात्मक अधिगम
2. जानकारी प्रस्तुत करने के अनेक तरीके (Multiple Means of Representation)
एक ही विषय को अलग-अलग माध्यमों से प्रस्तुत किया जाता है।
उदाहरण—
- चित्र
- वीडियो
- मॉडल
- ऑडियो
- चार्ट
- वास्तविक वस्तुएँ
3. अभिव्यक्ति के अनेक तरीके (Multiple Means of Action and Expression)
विद्यार्थियों को अपनी सीख विभिन्न तरीकों से प्रदर्शित करने का अवसर दिया जाता है।
उदाहरण—
- लिखित उत्तर
- मौखिक प्रस्तुति
- मॉडल बनाना
- परियोजना तैयार करना
- चित्र बनाना
Individualized Education Plan (IEP) के प्रति NCERT का दृष्टिकोण
NCERT शिक्षकों को यह समझाने पर बल देता है कि जिन विद्यार्थियों को व्यक्तिगत स्तर पर अतिरिक्त शैक्षिक सहयोग की आवश्यकता हो, उनके लिए व्यक्तिगत शिक्षण योजना (Individualized Education Plan – IEP) उपयोगी हो सकती है।
IEP के प्रमुख घटक—
- विद्यार्थी का वर्तमान शैक्षिक स्तर
- सीखने के लक्ष्य
- शिक्षण रणनीतियाँ
- आवश्यक सहयोग
- प्रगति का नियमित मूल्यांकन
- अभिभावकों की सहभागिता
सहायक एवं अनुकूल तकनीक (Assistive Technology)
समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए NCERT सहायक तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
उदाहरण—
- स्क्रीन रीडर
- स्क्रीन मैग्निफायर
- श्रवण सहायक उपकरण
- संचार बोर्ड
- स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक
- टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीक
- अनुकूलित की-बोर्ड एवं माउस
- डिजिटल शिक्षण संसाधन
शिक्षकों के लिए NCERT द्वारा विकसित प्रशिक्षण कार्यक्रम
NCERT नियमित रूप से शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।
प्रमुख विषय—
- समावेशी शिक्षा
- नई शिक्षा नीति
- आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता
- बाल-केंद्रित शिक्षण
- जीवन कौशल
- मानसिक स्वास्थ्य
- सीखने की कठिनाइयाँ
- व्यवहार प्रबंधन
- ICT आधारित शिक्षण
समावेशी विद्यालयों के लिए NCERT के सुझाव
NCERT के अनुसार प्रत्येक विद्यालय में निम्न विशेषताओं का होना आवश्यक है—
सुलभ भौतिक वातावरण
- रैंप
- हैंडरेल
- सुलभ शौचालय
- पर्याप्त प्रकाश
- बाधा-रहित परिसर
सकारात्मक विद्यालय वातावरण
- भेदभाव रहित व्यवहार
- सहयोगात्मक संस्कृति
- समान अवसर
- विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी
- सम्मानपूर्ण वातावरण
प्रशिक्षित शिक्षक
विद्यालयों में ऐसे शिक्षक होने चाहिए जिन्हें—
- समावेशी शिक्षण
- कक्षा अनुकूलन
- व्यवहार प्रबंधन
- सहायक तकनीक
- विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं की समझ
का प्रशिक्षण प्राप्त हो।
अभिभावकों की सहभागिता
NCERT विद्यालय एवं अभिभावकों के बीच नियमित संवाद एवं सहयोग को अत्यंत आवश्यक मानता है।
SCERT एवं DIET के साथ NCERT का समन्वय
समावेशी शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए NCERT राज्यों की प्रमुख शैक्षिक संस्थाओं के साथ निरंतर कार्य करता है।
SCERT (State Council of Educational Research and Training)
NCERT द्वारा विकसित राष्ट्रीय नीतियों, दिशा-निर्देशों एवं प्रशिक्षण मॉड्यूल को राज्य स्तर पर लागू करने में SCERT महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
NCERT, SCERT को निम्न क्षेत्रों में सहयोग देता है—
- राज्य पाठ्यचर्या विकास
- शिक्षक प्रशिक्षण
- अनुसंधान
- मूल्यांकन सुधार
- समावेशी शिक्षा
DIET (District Institute of Education and Training)
DIET जिला स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण एवं शैक्षिक सुधार का प्रमुख संस्थान है।
NCERT द्वारा विकसित प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं मॉड्यूल को DIET के माध्यम से शिक्षकों तक पहुँचाया जाता है।
DIET निम्न कार्य करता है—
- प्राथमिक शिक्षकों का प्रशिक्षण
- सेवाकालीन प्रशिक्षण
- स्थानीय शैक्षिक अनुसंधान
- समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन
- विद्यालयों को शैक्षणिक सहयोग
NCERT की समावेशी शिक्षा संबंधी प्रमुख विशेषताएँ
| क्षेत्र | NCERT की भूमिका |
|---|---|
| समावेशी शिक्षा | सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना |
| शिक्षक प्रशिक्षण | सामान्य एवं विशेष शिक्षकों का क्षमता विकास |
| शिक्षण सामग्री | समावेशी एवं सुलभ TLM का विकास |
| अनुसंधान | CWSN एवं समावेशी शिक्षा पर शोध |
| तकनीकी सहयोग | SCERT, DIET एवं राज्यों को सहायता |
| मूल्यांकन | लचीले एवं समावेशी मूल्यांकन की अवधारणा को बढ़ावा |
| तकनीक | सहायक एवं डिजिटल तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहन |
RPSC School Lecturer (Special Education) परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- NCERT समावेशी शिक्षा को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न अंग मानता है।
- NCERT शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या विकास, अनुसंधान एवं शिक्षण-अधिगम सामग्री के विकास में राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख संस्था है।
- UDL (Universal Design for Learning) का उद्देश्य शिक्षण को प्रारम्भ से ही सभी विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाना है।
- IEP (Individualized Education Plan) व्यक्तिगत आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक योजना तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
- NCERT राज्यों में समावेशी शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए SCERT एवं DIET को शैक्षणिक एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करता है।
- समावेशी शिक्षा में कक्षा अनुकूलन, पाठ्यचर्या अनुकूलन, सहायक तकनीक, शिक्षक प्रशिक्षण तथा सुलभ शिक्षण सामग्री को विशेष महत्व दिया जाता है।
DIKSHA (Digital Infrastructure for Knowledge Sharing) में NCERT की भूमिका
DIKSHA (Digital Infrastructure for Knowledge Sharing) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा पहल है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा शिक्षा प्रशासकों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना है।
NCERT इस मंच के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक सामग्री विकसित करने, उसका गुणवत्ता परीक्षण करने तथा राज्यों को डिजिटल सामग्री तैयार करने में मार्गदर्शन प्रदान करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विशेष शिक्षा के संदर्भ में DIKSHA समावेशी एवं सुलभ शिक्षण संसाधनों के प्रसार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
DIKSHA के प्रमुख उद्देश्य
- सभी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना।
- शिक्षकों के व्यावसायिक विकास (Professional Development) को बढ़ावा देना।
- ई-सामग्री को देशभर में सुलभ बनाना।
- राज्यों के लिए एक साझा डिजिटल मंच उपलब्ध कराना।
- ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करना।
- समावेशी एवं तकनीक-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना।
DIKSHA में NCERT के प्रमुख कार्य
डिजिटल शिक्षण सामग्री का विकास
NCERT विभिन्न कक्षाओं एवं विषयों के लिए—
- ई-पाठ (e-Content)
- वीडियो व्याख्यान
- ऑडियो सामग्री
- अभ्यास प्रश्न
- शिक्षक मार्गदर्शिकाएँ
- गतिविधि आधारित सामग्री
तैयार करता है।
शिक्षक प्रशिक्षण
NCERT DIKSHA के माध्यम से विभिन्न राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है।
उदाहरण—
- नई शिक्षा नीति (NEP 2020)
- समावेशी शिक्षा
- आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN)
- विषय-विशेष प्रशिक्षण
- मूल्यांकन
- ICT आधारित शिक्षण
राज्यों को तकनीकी सहयोग
NCERT राज्यों के SCERT एवं शिक्षा विभागों को डिजिटल सामग्री तैयार करने तथा उसे DIKSHA पर उपलब्ध कराने में सहायता प्रदान करता है।
विशेष शिक्षा में DIKSHA का महत्व
समावेशी शिक्षा के लिए DIKSHA अनेक प्रकार से उपयोगी है—
- शिक्षक कहीं भी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।
- CWSN के लिए डिजिटल संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है।
- शिक्षण सामग्री को बार-बार देखा जा सकता है।
- दूरदराज़ क्षेत्रों के शिक्षकों तक प्रशिक्षण पहुँचता है।
- सतत् व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development) को बढ़ावा मिलता है।
ePathshala में NCERT की भूमिका
ePathshala, NCERT द्वारा विकसित एक डिजिटल शिक्षण मंच है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2015 में की गई। इसका उद्देश्य NCERT की पाठ्यपुस्तकों तथा अन्य शैक्षणिक संसाधनों को डिजिटल रूप में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं शोधकर्ताओं तक पहुँचाना है।
इस मंच के माध्यम से शिक्षण सामग्री मोबाइल, टैबलेट तथा कंप्यूटर पर उपलब्ध होती है।
ePathshala पर उपलब्ध प्रमुख सामग्री
- NCERT की पाठ्यपुस्तकें
- शिक्षक पुस्तिकाएँ
- ऑडियो सामग्री
- वीडियो सामग्री
- पत्रिकाएँ
- पूरक अध्ययन सामग्री
- शिक्षण-अधिगम संसाधन
विशेष शिक्षा में ePathshala का महत्व
- डिजिटल माध्यम से अध्ययन की सुविधा।
- घर पर भी सीखने का अवसर।
- शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों के लिए उपयोगी।
- समावेशी शिक्षा में ICT के उपयोग को बढ़ावा।
- गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तक समान पहुँच।
NISHTHA (National Initiative for School Heads’ and Teachers’ Holistic Advancement)
NISHTHA भारत सरकार का एक राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य विद्यालय प्रमुखों एवं शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता का विकास करना है।
इस कार्यक्रम की शैक्षणिक सामग्री के विकास एवं प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने में NCERT की प्रमुख भूमिका है।
NISHTHA के प्रमुख उद्देश्य
- शिक्षकों की शिक्षण क्षमता विकसित करना।
- बाल-केंद्रित शिक्षण को बढ़ावा देना।
- समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाना।
- अधिगम परिणामों में सुधार करना।
- नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता करना।
NISHTHA के प्रशिक्षण विषय
- समावेशी शिक्षा
- FLN
- जीवन कौशल
- मानसिक स्वास्थ्य
- विद्यालय नेतृत्व
- ICT
- मूल्यांकन सुधार
- अनुभवात्मक अधिगम
- दक्षतामूलक शिक्षा (Competency Based Education)
विशेष शिक्षा में NISHTHA का महत्व
NISHTHA के अंतर्गत शिक्षकों को निम्न विषयों पर प्रशिक्षित किया जाता है—
- CWSN की पहचान
- समावेशी कक्षा प्रबंधन
- IEP की समझ
- UDL का उपयोग
- सीखने की कठिनाइयों का समाधान
- व्यवहार प्रबंधन
- सहायक तकनीकों का उपयोग
National Achievement Survey (NAS) में NCERT की भूमिका
National Achievement Survey (राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण) विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन करने वाला राष्ट्रीय स्तर का सर्वेक्षण है।
इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के अधिगम स्तर का मूल्यांकन करना तथा शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का विश्लेषण करना है।
NCERT इस सर्वेक्षण के विकास, परीक्षण रूपरेखा (Assessment Framework), प्रश्न निर्माण, विश्लेषण तथा रिपोर्ट तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
NAS के प्रमुख उद्देश्य
- विद्यार्थियों के अधिगम स्तर का आकलन।
- शिक्षण की गुणवत्ता का मूल्यांकन।
- राज्यों को सुधार हेतु सुझाव देना।
- शिक्षा नीति निर्माण में सहायता।
- अधिगम अंतर (Learning Gap) की पहचान।
NAS का विशेष शिक्षा में महत्व
NAS से प्राप्त आँकड़ों के आधार पर—
- CWSN की सीखने की स्थिति का विश्लेषण किया जा सकता है।
- समावेशी शिक्षा की प्रभावशीलता का अध्ययन किया जा सकता है।
- राज्यों को सुधारात्मक रणनीतियाँ बनाने में सहायता मिलती है।
- शिक्षक प्रशिक्षण की आवश्यकता का आकलन किया जा सकता है।
PARAKH में NCERT की भूमिका
PARAKH का पूरा नाम है—
Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development
PARAKH की स्थापना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिश के अनुसार की गई है। यह NCERT के अंतर्गत स्थापित एक राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र (National Assessment Centre) है।
इसका उद्देश्य देशभर में विद्यालयी मूल्यांकन प्रणाली में गुणवत्ता, पारदर्शिता, समानता एवं एकरूपता लाना है।
PARAKH के प्रमुख उद्देश्य
- मूल्यांकन प्रणाली में सुधार।
- दक्षतामूलक (Competency-Based) मूल्यांकन को बढ़ावा देना।
- राज्यों को मूल्यांकन संबंधी मार्गदर्शन देना।
- प्रश्नपत्र निर्माण के मानक विकसित करना।
- अधिगम परिणाम आधारित मूल्यांकन को प्रोत्साहित करना।
विशेष शिक्षा में PARAKH का महत्व
समावेशी शिक्षा के संदर्भ में PARAKH निम्न बातों पर विशेष बल देता है—
- निष्पक्ष एवं समावेशी मूल्यांकन।
- आवश्यकतानुसार उचित परीक्षा अनुकूलन (Reasonable Accommodation) की अवधारणा का समर्थन।
- दक्षतामूलक मूल्यांकन।
- सभी विद्यार्थियों के लिए समान अवसर।
NCERT द्वारा विकसित अन्य महत्वपूर्ण शैक्षणिक संसाधन
शिक्षक पुस्तिकाएँ (Teacher Handbooks)
NCERT विभिन्न विषयों एवं कक्षाओं के लिए शिक्षक मार्गदर्शिकाएँ विकसित करता है जिनमें प्रभावी शिक्षण, गतिविधियाँ तथा मूल्यांकन संबंधी सुझाव दिए जाते हैं।
प्रशिक्षण मॉड्यूल
शिक्षकों के लिए विषय-विशेष, समावेशी शिक्षा, जीवन कौशल, मानसिक स्वास्थ्य, FLN तथा ICT आधारित अनेक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए जाते हैं।
कार्यपुस्तिकाएँ (Workbooks)
विद्यार्थियों के अभ्यास एवं अधिगम सुदृढ़ीकरण के लिए कार्यपुस्तिकाएँ तैयार की जाती हैं।
शोध रिपोर्ट
NCERT समय-समय पर विद्यालयी शिक्षा, समावेशी शिक्षा, शिक्षक शिक्षा तथा मूल्यांकन से संबंधित शोध रिपोर्ट प्रकाशित करता है।
विशेष शिक्षा के संदर्भ में NCERT की समग्र भूमिका
विशेष शिक्षा के क्षेत्र में NCERT केवल एक पाठ्यपुस्तक निर्माण संस्था नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक नेतृत्व प्रदान करने वाली संस्था है।
इसकी भूमिका निम्न क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण है—
- समावेशी शिक्षा का विकास।
- शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण।
- राष्ट्रीय पाठ्यचर्या का निर्माण।
- शिक्षण-अधिगम सामग्री का विकास।
- शैक्षिक अनुसंधान।
- मूल्यांकन सुधार।
- डिजिटल शिक्षा।
- राज्यों को शैक्षणिक एवं तकनीकी सहयोग।
- शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार।
RPSC School Lecturer (Special Education) परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण तथ्य
| विषय | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| स्थापना | NCERT की स्थापना 1 सितम्बर 1961 को हुई। |
| मुख्यालय | श्री अरविन्द मार्ग, नई दिल्ली। |
| प्रकृति | शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन स्वायत्त संस्था। |
| प्रमुख कार्य | पाठ्यचर्या विकास, अनुसंधान, शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यपुस्तक निर्माण, मूल्यांकन सुधार। |
| RIE | कुल 5 क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (4 RIE + 1 NERIE)। |
| NCF | राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा का विकास NCERT द्वारा। |
| ePathshala | NCERT का डिजिटल शिक्षण मंच (2015)। |
| DIKSHA | राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा मंच, जिसके लिए NCERT शैक्षणिक सामग्री एवं प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। |
| NISHTHA | राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम; शैक्षणिक सामग्री के विकास में NCERT की प्रमुख भूमिका। |
| NAS | राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण के शैक्षणिक विकास एवं विश्लेषण में NCERT की प्रमुख भूमिका। |
| PARAKH | NCERT के अंतर्गत राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र। |
| विशेष शिक्षा | समावेशी शिक्षा, UDL, IEP, शिक्षक प्रशिक्षण, TLM, अनुसंधान एवं मूल्यांकन सुधार में महत्वपूर्ण योगदान। |
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