दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरणों की खरीद एवं फिटमेंट हेतु सहायता योजना (Assistance to Disabled Persons for Purchase/Fitting of Aids and Appliances (ADIP) Scheme) | RPSC First Grade Special Education Notes
सहायता एवं सहायक उपकरण वितरण योजना (ADIP Scheme) – परिचय
Assistance to Disabled Persons for Purchase/Fitting of Aids and Appliances (ADIP) Scheme अर्थात दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरणों की खरीद एवं फिटमेंट हेतु सहायता योजना भारत सरकार की एक प्रमुख कल्याणकारी योजना है। इसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक, आधुनिक, टिकाऊ तथा गुणवत्तापूर्ण सहायक उपकरण (Aids & Appliances) उपलब्ध कराना है, ताकि वे अधिक स्वतंत्र, आत्मनिर्भर, शिक्षित, रोजगारोन्मुख एवं समाज की मुख्यधारा में सम्मिलित हो सकें।
यह योजना भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice & Empowerment) के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD) द्वारा संचालित की जाती है।
RPSC प्रथम श्रेणी विशेष शिक्षा, DSSSB, KVS, NVS, UGC NET, B.Ed. Special Education तथा अन्य विशेष शिक्षा प्रतियोगी परीक्षाओं में ADIP योजना से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
ADIP योजना का पूरा नाम
अंग्रेजी नाम:
Assistance to Disabled Persons for Purchase/Fitting of Aids and Appliances (ADIP) Scheme
हिन्दी नाम:
दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरणों की खरीद एवं फिटमेंट हेतु सहायता योजना
ADIP योजना का संचालन
इस योजना का संचालन निम्न विभाग द्वारा किया जाता है—
- भारत सरकार
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
- दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD)
यह विभाग योजना के लिए दिशा-निर्देश जारी करता है, पात्र संस्थाओं का चयन करता है तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है।
ADIP योजना का इतिहास
भारत सरकार ने यह महसूस किया कि केवल दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रदान कर देना पर्याप्त नहीं है। यदि दिव्यांग व्यक्ति के पास आवश्यक सहायक उपकरण (Assistive Devices) उपलब्ध नहीं होंगे, तो वह शिक्षा, रोजगार, दैनिक जीवन तथा सामाजिक गतिविधियों में पूर्ण रूप से भाग नहीं ले पाएगा।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सन् 1981 में ADIP योजना प्रारम्भ की गई।
इसके बाद समय-समय पर योजना में अनेक संशोधन किए गए ताकि आधुनिक तकनीक, नई दिव्यांगता श्रेणियों तथा बदलती आवश्यकताओं के अनुसार लाभार्थियों को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें।
ADIP योजना की आवश्यकता
दिव्यांग व्यक्तियों को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है—
- चलने-फिरने में कठिनाई
- सुनने में कठिनाई
- देखने में कठिनाई
- पढ़ने-लिखने में कठिनाई
- दैनिक कार्य करने में कठिनाई
- शिक्षा प्राप्त करने में बाधा
- रोजगार पाने में कठिनाई
- सामाजिक सहभागिता में कमी
यदि उन्हें उचित सहायक उपकरण उपलब्ध हो जाएँ तो इन कठिनाइयों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इसी उद्देश्य से ADIP योजना लागू की गई।
ADIP योजना के प्रमुख उद्देश्य
इस योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
दिव्यांग व्यक्तियों को आधुनिक सहायक उपकरण उपलब्ध कराना
योजना का मुख्य उद्देश्य आवश्यकतानुसार वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण उपकरण उपलब्ध कराना है।
कार्यात्मक क्षमता (Functional Ability) बढ़ाना
सहायक उपकरणों की सहायता से व्यक्ति अपने दैनिक कार्य अधिक स्वतंत्र रूप से कर सकता है।
शिक्षा को सुगम बनाना
विद्यालय, महाविद्यालय एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययन करने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों को उपयुक्त उपकरण उपलब्ध कराना।
रोजगार के अवसर बढ़ाना
उपयुक्त सहायक उपकरण व्यक्ति की कार्य क्षमता बढ़ाते हैं जिससे रोजगार प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है।
सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना
दिव्यांग व्यक्ति समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।
आत्मनिर्भरता विकसित करना
दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करना।
पुनर्वास को प्रोत्साहित करना
दिव्यांग व्यक्तियों का शारीरिक, सामाजिक, शैक्षिक एवं आर्थिक पुनर्वास करना।
ADIP योजना के प्रमुख सिद्धांत
यह योजना कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर आधारित है—
- आवश्यकता आधारित सहायता
- समान अवसर
- सामाजिक न्याय
- गुणवत्तापूर्ण उपकरण
- समय पर उपकरण उपलब्ध कराना
- विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन
- लाभार्थी केन्द्रित दृष्टिकोण
- समावेशी विकास
ADIP योजना के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली सहायता
इस योजना के अंतर्गत केवल उपकरण ही नहीं दिए जाते, बल्कि कई प्रकार की सेवाएँ भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं—
- सहायक उपकरण उपलब्ध कराना
- उपकरण का फिटमेंट
- उपकरण का परीक्षण
- उपयोग का प्रशिक्षण
- आवश्यक मरम्मत
- उपकरण का प्रतिस्थापन (निर्धारित शर्तों के अनुसार)
- फॉलो-अप सेवाएँ
ADIP योजना के अंतर्गत उपलब्ध सहायक उपकरण (Aids and Appliances)
दिव्यांगता के प्रकार के अनुसार विभिन्न प्रकार के उपकरण प्रदान किए जाते हैं।
चलने-फिरने में दिव्यांगता (Locomotor Disability)
ऐसे व्यक्तियों को निम्न उपकरण दिए जा सकते हैं—
- व्हीलचेयर
- ट्राइसाइकिल
- बैसाखी
- एल्बो क्रच
- अंडर आर्म क्रच
- वॉकर
- रोलेटर
- कृत्रिम अंग (Artificial Limbs)
- कैलिपर्स
- ऑर्थोसिस
- प्रोस्थेसिस
- स्पाइनल ब्रेस
- सर्वाइकल कॉलर
- विशेष जूते
- मॉड्यूलर कृत्रिम अंग
इन उपकरणों का उद्देश्य व्यक्ति की गतिशीलता बढ़ाना है।
दृष्टिबाधित (Visual Impairment)
दृष्टिबाधित व्यक्तियों को निम्न उपकरण उपलब्ध कराए जा सकते हैं—
- सफेद छड़ी (White Cane)
- स्मार्ट केन
- ब्रेल स्लेट
- ब्रेल स्टाइलस
- ब्रेल किट
- ब्रेल घड़ी
- ब्रेल गणित किट
- ब्रेल लेखन सामग्री
- कम दृष्टि सहायक उपकरण (Low Vision Devices)
- मैग्निफायर
- टेलीस्कोपिक उपकरण
- इलेक्ट्रॉनिक रीडिंग डिवाइस
इनका उद्देश्य स्वतंत्र आवागमन तथा अध्ययन को सरल बनाना है।
श्रवण बाधित (Hearing Impairment)
श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए उपलब्ध उपकरण—
- डिजिटल हियरिंग एड
- BTE Hearing Aid
- ITE Hearing Aid
- कान के साँचे (Ear Mould)
- श्रवण सहायक उपकरण
- FM प्रणाली
- सहायक श्रवण यंत्र
- विशेष प्रशिक्षण सामग्री
इनसे श्रवण क्षमता तथा संचार कौशल में सुधार होता है।
बौद्धिक दिव्यांगता (Intellectual Disability)
इनके लिए विभिन्न प्रकार की प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती है—
- शैक्षिक किट
- संज्ञानात्मक विकास सामग्री
- व्यवहार प्रशिक्षण सामग्री
- दैनिक जीवन कौशल प्रशिक्षण उपकरण
- विशेष शिक्षण सामग्री
इनका उद्देश्य सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (Autism Spectrum Disorder)
इनके लिए उपलब्ध सहायता—
- संचार किट
- दृश्य शिक्षण सामग्री
- व्यवहार संशोधन सामग्री
- संवेदी (Sensory) उपकरण
- विशेष शिक्षण सामग्री
सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy)
इनके लिए—
- विशेष बैठने की व्यवस्था (Special Seating Devices)
- पोस्चर चेयर
- स्टैंडिंग फ्रेम
- वॉकर
- व्हीलचेयर
- विशेष ऑर्थोटिक उपकरण
- अनुकूलित फर्नीचर
बहुदिव्यांगता (Multiple Disabilities)
इनके लिए आवश्यकता के अनुसार मिश्रित सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
उदाहरण—
- व्हीलचेयर
- विशेष कुर्सी
- संचार उपकरण
- बैठने एवं खड़े होने के उपकरण
- व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित उपकरण
ADIP योजना के अंतर्गत उपकरण चयन की प्रक्रिया
सभी लाभार्थियों को एक जैसे उपकरण नहीं दिए जाते।
उपकरण का चयन निम्न आधारों पर किया जाता है—
- दिव्यांगता का प्रकार
- दिव्यांगता की गंभीरता
- आयु
- चिकित्सकीय परीक्षण
- कार्यात्मक आवश्यकता
- विशेषज्ञ की सलाह
- पुनर्वास योजना
- शिक्षा एवं रोजगार की आवश्यकता
इसलिए प्रत्येक लाभार्थी का पहले कार्यात्मक मूल्यांकन (Functional Assessment) किया जाता है।
ADIP योजना के अंतर्गत पात्रता (Eligibility Criteria)
ADIP योजना का लाभ प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति को स्वतः नहीं मिलता। इसके लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित कुछ पात्रता शर्तें पूरी करनी आवश्यक हैं।
मुख्य पात्रता निम्नलिखित है—
भारतीय नागरिक होना
लाभार्थी भारत का नागरिक होना चाहिए।
मान्य दिव्यांगता होना
लाभार्थी के पास दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के अनुसार मान्य दिव्यांगता होनी चाहिए। सामान्यतः संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र (Disability Certificate) अथवा यूडीआईडी (UDID) कार्ड स्वीकार किया जाता है।
आवश्यकता आधारित पात्रता
केवल वही व्यक्ति पात्र माना जाता है जिसे वास्तव में किसी सहायक उपकरण (Aid/Appliance) की आवश्यकता हो तथा संबंधित विशेषज्ञ (डॉक्टर, ऑर्थोटिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, नेत्र विशेषज्ञ, विशेष शिक्षक आदि) द्वारा उसकी अनुशंसा की गई हो।
आय संबंधी शर्त
योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांग व्यक्तियों की सहायता करना है। इसलिए लाभार्थी की आय सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए।
महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य:
ADIP योजना की आय सीमा एवं आर्थिक पात्रता समय-समय पर भारत सरकार द्वारा संशोधित की जाती है। इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं में यदि विशेष राशि पूछी जाए तो नवीनतम सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार उत्तर देना चाहिए।
पूर्व में उपकरण प्राप्त करने की स्थिति
यदि लाभार्थी को इसी प्रकार का उपकरण पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है, तो सामान्यतः निर्धारित समयावधि पूर्ण होने के बाद ही नया उपकरण दिया जाता है, जब—
- पुराना उपकरण अनुपयोगी हो जाए।
- उपकरण क्षतिग्रस्त हो जाए।
- बच्चे की शारीरिक वृद्धि के कारण नया उपकरण आवश्यक हो।
- चिकित्सकीय विशेषज्ञ नया उपकरण आवश्यक बताए।
किन परिस्थितियों में नया उपकरण दिया जा सकता है?
सरकार यह सुनिश्चित करती है कि संसाधनों का उचित उपयोग हो। इसलिए नया उपकरण निम्न परिस्थितियों में उपलब्ध कराया जा सकता है—
- उपकरण उपयोग योग्य न रहे।
- उपकरण पूरी तरह टूट जाए।
- चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा परिवर्तन आवश्यक बताया जाए।
- लाभार्थी की शारीरिक वृद्धि (विशेषकर बच्चों में) हो गई हो।
- तकनीकी रूप से अधिक उपयुक्त उपकरण की आवश्यकता हो।
ADIP योजना के अंतर्गत आवश्यक दस्तावेज
आवेदन करते समय सामान्यतः निम्न दस्तावेज अपेक्षित होते हैं—
- दिव्यांगता प्रमाण-पत्र अथवा UDID कार्ड
- आधार कार्ड
- पहचान प्रमाण
- निवास प्रमाण
- आय प्रमाण-पत्र
- पासपोर्ट आकार के फोटो
- चिकित्सकीय मूल्यांकन रिपोर्ट
- विशेषज्ञ की अनुशंसा
- बैंक खाते का विवरण (जहाँ आवश्यक हो)
कुछ परिस्थितियों में स्थानीय प्रशासन अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकता है।
UDID (Unique Disability ID) का महत्व
भारत सरकार ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए यूनीक डिसएबिलिटी आईडी (UDID) प्रणाली प्रारंभ की है।
ADIP योजना में UDID का विशेष महत्व है क्योंकि—
- लाभार्थी की पहचान सरल हो जाती है।
- एकीकृत राष्ट्रीय रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है।
- योजनाओं का लाभ प्राप्त करना आसान होता है।
- फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगती है।
- पारदर्शिता बढ़ती है।
- ऑनलाइन सत्यापन संभव होता है।
हालाँकि, जहाँ आवश्यक हो वहाँ सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध दिव्यांगता प्रमाण-पत्र भी स्वीकार किया जा सकता है, जैसा कि प्रचलित दिशा-निर्देशों में निर्धारित हो।
ADIP योजना के लाभार्थियों का चिकित्सकीय मूल्यांकन
उपकरण देने से पहले विशेषज्ञों की टीम लाभार्थी का परीक्षण करती है।
इस मूल्यांकन का उद्देश्य है—
- दिव्यांगता का प्रकार पहचानना।
- दिव्यांगता की गंभीरता जानना।
- व्यक्ति की कार्यात्मक क्षमता का आकलन करना।
- उपयुक्त उपकरण का चयन करना।
- उपकरण का सही आकार निर्धारित करना।
- भविष्य की पुनर्वास आवश्यकताओं का मूल्यांकन करना।
मूल्यांकन करने वाले विशेषज्ञ
आवश्यकतानुसार निम्न विशेषज्ञ सम्मिलित हो सकते हैं—
- ऑर्थोपेडिक सर्जन
- फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञ
- ऑडियोलॉजिस्ट
- स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट
- नेत्र विशेषज्ञ
- फिजियोथेरेपिस्ट
- ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट
- ऑर्थोटिस्ट एवं प्रोस्थेटिस्ट
- विशेष शिक्षक
- क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट
- पुनर्वास विशेषज्ञ
ADIP योजना के अंतर्गत उपकरण वितरण की प्रक्रिया
लाभार्थी को उपकरण देने की प्रक्रिया सामान्यतः निम्न चरणों में पूरी होती है—
प्रथम चरण – लाभार्थियों की पहचान
- सर्वेक्षण किया जाता है।
- शिविर आयोजित किए जाते हैं।
- विद्यालयों, अस्पतालों तथा पंचायतों के माध्यम से लाभार्थियों की पहचान होती है।
द्वितीय चरण – पंजीकरण
इच्छुक व्यक्ति आवेदन करता है तथा आवश्यक दस्तावेज जमा करता है।
तृतीय चरण – चिकित्सकीय परीक्षण
विशेषज्ञ टीम लाभार्थी का परीक्षण करती है तथा आवश्यक उपकरण निर्धारित करती है।
चतुर्थ चरण – उपकरण का निर्माण या चयन
यदि उपकरण विशेष माप का है तो उसके अनुसार निर्माण या संशोधन किया जाता है।
पंचम चरण – फिटमेंट (Fitting)
उपकरण लाभार्थी के शरीर के अनुरूप फिट किया जाता है।
उदाहरण—
- कृत्रिम पैर
- कैलिपर्स
- श्रवण यंत्र
- व्हीलचेयर
- ऑर्थोसिस
षष्ठम चरण – प्रशिक्षण
लाभार्थी को बताया जाता है—
- उपकरण का उपयोग कैसे करें।
- उपकरण की देखभाल कैसे करें।
- सुरक्षा संबंधी सावधानियाँ क्या हैं।
- दैनिक जीवन में उपकरण का प्रभावी उपयोग कैसे करें।
सप्तम चरण – फॉलो-अप
उपकरण दिए जाने के बाद समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है—
- उपकरण सही कार्य कर रहा है या नहीं।
- लाभार्थी उसका सही उपयोग कर रहा है या नहीं।
- किसी प्रकार की मरम्मत की आवश्यकता है या नहीं।
ADIP योजना के अंतर्गत फॉलो-अप सेवाओं का महत्व
केवल उपकरण दे देना ही पर्याप्त नहीं होता।
फॉलो-अप सेवाओं के माध्यम से—
- उपकरण की कार्यक्षमता जाँची जाती है।
- आवश्यक समायोजन किए जाते हैं।
- लाभार्थी की समस्याओं का समाधान किया जाता है।
- आवश्यकता होने पर पुनः प्रशिक्षण दिया जाता है।
- उपकरण की मरम्मत अथवा प्रतिस्थापन की व्यवस्था की जाती है।
ADIP योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण (Training)
कई सहायक उपकरण ऐसे होते हैं जिनका सही उपयोग सीखना आवश्यक होता है।
उदाहरण—
- कृत्रिम पैर से चलना
- व्हीलचेयर का सुरक्षित संचालन
- श्रवण यंत्र का उपयोग
- ब्रेल उपकरणों का प्रयोग
- लो विज़न उपकरणों का उपयोग
- संचार उपकरणों का संचालन
इसलिए प्रशिक्षण ADIP योजना का एक महत्वपूर्ण भाग है।
ADIP योजना के प्रमुख लाभ
इस योजना से दिव्यांग व्यक्तियों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं—
शारीरिक लाभ
- गतिशीलता में वृद्धि
- संतुलन में सुधार
- दैनिक कार्य करने की क्षमता बढ़ती है
- स्वतंत्र आवागमन संभव होता है
शैक्षिक लाभ
- विद्यालय में भागीदारी बढ़ती है।
- अध्ययन सामग्री का उपयोग आसान होता है।
- समावेशी शिक्षा को बढ़ावा मिलता है।
- ड्रॉपआउट दर कम होती है।
सामाजिक लाभ
- आत्मविश्वास बढ़ता है।
- सामाजिक सहभागिता बढ़ती है।
- परिवार पर निर्भरता कम होती है।
- सामाजिक सम्मान में वृद्धि होती है।
आर्थिक लाभ
- रोजगार प्राप्त करने की संभावना बढ़ती है।
- कार्य क्षमता में सुधार होता है।
- आय अर्जित करने के अवसर बढ़ते हैं।
- आत्मनिर्भरता विकसित होती है।
ADIP योजना की कार्यान्वयन एजेंसियाँ (Implementing Agencies)
ADIP योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं को अधिकृत करती है। इन संस्थाओं को कार्यान्वयन एजेंसी (Implementing Agency) कहा जाता है। इन्हें सरकार द्वारा अनुदान (Grant-in-Aid) प्रदान किया जाता है, जिसके माध्यम से पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
मुख्य कार्यान्वयन एजेंसियाँ निम्नलिखित हैं—
1. ALIMCO (Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India)
ADIP योजना के अंतर्गत ALIMCO सबसे प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसी है।
ALIMCO का पूरा नाम है—
Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India
हिन्दी में इसे भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम कहा जाता है।
यह भारत सरकार का एक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (Central Public Sector Enterprise – CPSE) है, जो दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कृत्रिम अंग, ऑर्थोटिक उपकरण तथा अन्य सहायक उपकरणों का निर्माण एवं वितरण करता है। ADIP योजना के अंतर्गत अधिकांश मेगा वितरण शिविरों का संचालन ALIMCO द्वारा किया जाता है।
ALIMCO के प्रमुख कार्य
- सहायक उपकरणों का निर्माण।
- उपकरणों का परीक्षण।
- गुणवत्तापूर्ण उपकरण उपलब्ध कराना।
- उपकरणों का वितरण।
- फिटमेंट सेवाएँ प्रदान करना।
- उपकरणों की मरम्मत एवं सर्विस।
- मेगा वितरण शिविर आयोजित करना।
- राज्य सरकारों एवं जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना।
2. राष्ट्रीय संस्थान (National Institutes)
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधीन संचालित विभिन्न राष्ट्रीय संस्थान भी ADIP योजना का संचालन करते हैं।
उदाहरण—
- National Institute for the Empowerment of Persons with Visual Disabilities (NIEPVD)
- National Institute for the Empowerment of Persons with Intellectual Disabilities (NIEPID)
- Ali Yavar Jung National Institute of Speech and Hearing Disabilities (AYJNISHD)
- National Institute for Empowerment of Persons with Multiple Disabilities (NIEPMD)
- National Institute for Locomotor Disabilities (NILD)
ये संस्थान मूल्यांकन, प्रशिक्षण, उपकरण चयन तथा वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
3. Composite Regional Centres (CRCs)
Composite Regional Centres (CRCs) दिव्यांग व्यक्तियों को—
- पुनर्वास सेवाएँ,
- चिकित्सकीय मूल्यांकन,
- विशेष शिक्षा,
- फिजियोथेरेपी,
- ऑक्युपेशनल थेरेपी,
- उपकरण फिटमेंट
जैसी सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं तथा ADIP योजना के अंतर्गत उपकरण वितरण में सहयोग करते हैं।
4. District Disability Rehabilitation Centres (DDRCs)
जिला स्तर पर कार्यरत DDRCs—
- लाभार्थियों की पहचान,
- चिकित्सा परीक्षण,
- पुनर्वास सेवाएँ,
- उपकरण वितरण,
- फॉलो-अप
का कार्य करते हैं।
5. राज्य सरकारों की निगम एवं संस्थाएँ
राज्य सरकारों द्वारा स्थापित दिव्यांग विकास निगम तथा अन्य अधिकृत संस्थाएँ भी ADIP योजना का संचालन कर सकती हैं।
6. पंजीकृत गैर-सरकारी संगठन (NGOs)
भारत सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले पंजीकृत गैर-सरकारी संगठन (NGOs) भी इस योजना के अंतर्गत कार्यान्वयन एजेंसी बन सकते हैं।
इन संस्थाओं को निम्न शर्तें पूरी करनी होती हैं—
- विधिवत पंजीकरण।
- पुनर्वास क्षेत्र में कार्य अनुभव।
- प्रशिक्षित मानव संसाधन।
- आवश्यक आधारभूत संरचना।
- वित्तीय पारदर्शिता।
- सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन।
कार्यान्वयन एजेंसियों की प्रमुख जिम्मेदारियाँ
ADIP योजना के अंतर्गत कार्यान्वयन एजेंसियाँ निम्न कार्य करती हैं—
लाभार्थियों की पहचान
- ग्राम पंचायतों
- विद्यालयों
- अस्पतालों
- जिला प्रशासन
- सामाजिक न्याय विभाग
के सहयोग से पात्र दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान करना।
चिकित्सकीय मूल्यांकन
विशेषज्ञों द्वारा लाभार्थी का परीक्षण करवाना तथा उपयुक्त उपकरण निर्धारित करना।
उपकरण उपलब्ध कराना
लाभार्थी की आवश्यकता के अनुसार सही उपकरण उपलब्ध कराना।
फिटमेंट
उपकरण का सही माप लेकर उसे लाभार्थी के शरीर के अनुसार फिट करना।
प्रशिक्षण
लाभार्थी को उपकरण का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग सिखाना।
फॉलो-अप
- उपकरण की कार्यक्षमता की जाँच।
- आवश्यक मरम्मत।
- पुनः समायोजन।
- आवश्यकता पड़ने पर प्रतिस्थापन।
ADIP मेगा वितरण शिविर (Mega Distribution Camps)
ADIP योजना की एक विशेष विशेषता मेगा वितरण शिविर (Mega Camps) हैं।
इन शिविरों में बड़ी संख्या में पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को एक ही स्थान पर सहायक उपकरण वितरित किए जाते हैं।
इन शिविरों का आयोजन सामान्यतः निम्न संस्थाओं के सहयोग से किया जाता है—
- दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD)
- ALIMCO
- राज्य सरकार
- जिला प्रशासन
- स्थानीय निकाय
- सांसद एवं विधायक
- सामाजिक संस्थाएँ
भारत सरकार समय-समय पर आकांक्षी जिलों एवं आकांक्षी विकास खंडों में भी ऐसे शिविर आयोजित करवाती है।
मेगा शिविरों की कार्यप्रणाली
मेगा शिविर सामान्यतः निम्न चरणों में आयोजित किए जाते हैं—
चरण 1 – सर्वेक्षण
क्षेत्र में दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान की जाती है।
चरण 2 – पंजीकरण
आवेदन एवं दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है।
चरण 3 – चिकित्सकीय परीक्षण
विशेषज्ञों द्वारा लाभार्थियों का मूल्यांकन किया जाता है।
चरण 4 – उपकरण चयन
व्यक्ति की आवश्यकता के अनुसार उपकरण निर्धारित किए जाते हैं।
चरण 5 – उपकरण निर्माण एवं फिटमेंट
जहाँ आवश्यक हो वहाँ व्यक्तिगत माप के अनुसार उपकरण तैयार किए जाते हैं।
चरण 6 – वितरण
निर्धारित तिथि पर लाभार्थियों को उपकरण वितरित किए जाते हैं।
चरण 7 – प्रशिक्षण एवं फॉलो-अप
उपकरण के उपयोग, रखरखाव तथा बाद की सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
ADIP योजना में वित्तीय सहायता (Grant-in-Aid)
ADIP योजना एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है। इसके अंतर्गत भारत सरकार पात्र कार्यान्वयन एजेंसियों को Grant-in-Aid (अनुदान) प्रदान करती है।
इस अनुदान का उपयोग निम्न कार्यों के लिए किया जाता है—
- सहायक उपकरणों की खरीद।
- उपकरणों का निर्माण।
- फिटमेंट।
- लाभार्थियों का मूल्यांकन।
- वितरण शिविरों का आयोजन।
- प्रशिक्षण।
- आवश्यक शल्य चिकित्सा (जहाँ योजना के दिशा-निर्देशों में प्रावधान हो)।
- प्रशासनिक व्यय (निर्धारित सीमा तक)।
ADIP योजना में डिजिटल प्रणाली (ARJUN Portal)
वर्तमान में ADIP योजना के संचालन में ARJUN (ADIP & RVY Joint Interface for Unique Nomination) पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है।
इस पोर्टल के प्रमुख उद्देश्य हैं—
- लाभार्थियों का ऑनलाइन पंजीकरण।
- डुप्लीकेट लाभार्थियों की पहचान।
- राष्ट्रीय स्तर पर डेटा प्रबंधन।
- उपकरण वितरण की ऑनलाइन निगरानी।
- पारदर्शिता बढ़ाना।
- विश्लेषणात्मक रिपोर्ट (MIS) तैयार करना।
इससे योजना का क्रियान्वयन अधिक पारदर्शी, डिजिटल एवं उत्तरदायी बना है।
ADIP योजना एवं दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) का संबंध
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) भारत में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा एवं उनके समग्र विकास के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। ADIP योजना इस अधिनियम की भावना को व्यावहारिक रूप से लागू करने वाली प्रमुख सरकारी योजनाओं में से एक है।
RPwD Act, 2016 का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को—
- समान अवसर प्रदान करना।
- भेदभाव से सुरक्षा देना।
- समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करना।
- रोजगार के अवसर बढ़ाना।
- सुगम वातावरण (Accessibility) उपलब्ध कराना।
- स्वतंत्र एवं सम्मानजनक जीवन जीने में सक्षम बनाना।
इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए केवल कानूनी अधिकार पर्याप्त नहीं होते, बल्कि उपयुक्त सहायक उपकरणों की भी आवश्यकता होती है। ADIP योजना इसी आवश्यकता को पूरा करती है और पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण सहायक उपकरण उपलब्ध कराती है।
RPwD Act, 2016 के उद्देश्यों की पूर्ति में ADIP योजना की भूमिका
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education)
यदि किसी दिव्यांग विद्यार्थी को उसकी आवश्यकता के अनुसार—
- ब्रेल किट,
- लो विज़न डिवाइस,
- श्रवण यंत्र (Hearing Aid),
- व्हीलचेयर,
- विशेष बैठने की व्यवस्था,
- संचार उपकरण
उपलब्ध करा दिए जाएँ, तो वह सामान्य विद्यालय में अन्य विद्यार्थियों के साथ प्रभावी ढंग से अध्ययन कर सकता है।
इस प्रकार ADIP योजना समावेशी शिक्षा को व्यवहारिक रूप से सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
समान अवसर (Equal Opportunity)
उपयुक्त सहायक उपकरण मिलने के बाद दिव्यांग व्यक्ति—
- शिक्षा प्राप्त कर सकता है।
- प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले सकता है।
- रोजगार प्राप्त करने की क्षमता विकसित कर सकता है।
- स्वतंत्र रूप से आवागमन कर सकता है।
- सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर सकता है।
इस प्रकार यह योजना समान अवसर के सिद्धांत को मजबूत बनाती है।
स्वतंत्र जीवन (Independent Living)
ADIP योजना का एक प्रमुख उद्देश्य दिव्यांग व्यक्ति की दूसरों पर निर्भरता को कम करना है।
उदाहरण—
- कृत्रिम पैर की सहायता से स्वतंत्र रूप से चलना।
- व्हीलचेयर द्वारा स्वयं आवागमन करना।
- डिजिटल श्रवण यंत्र से प्रभावी संचार करना।
- ब्रेल उपकरणों के माध्यम से स्वतंत्र अध्ययन करना।
सामाजिक सहभागिता
सहायक उपकरण प्राप्त होने के बाद व्यक्ति—
- विद्यालय जा सकता है।
- कार्यस्थल तक पहुँच सकता है।
- सार्वजनिक स्थानों का उपयोग कर सकता है।
- सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग ले सकता है।
- आत्मविश्वास के साथ समाज में जीवन व्यतीत कर सकता है।
ADIP योजना की प्रमुख विशेषताएँ
यह योजना अनेक विशेषताओं के कारण भारत की सबसे महत्वपूर्ण पुनर्वास योजनाओं में से एक मानी जाती है।
केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme)
यह भारत सरकार द्वारा संचालित केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसके लिए वित्तीय सहायता केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती है।
आवश्यकता आधारित योजना
इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को उसकी वास्तविक आवश्यकता एवं कार्यात्मक क्षमता के आधार पर सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
आधुनिक तकनीक का उपयोग
योजना के अंतर्गत आधुनिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी रूप से उन्नत सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे दिव्यांग व्यक्ति की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।
गुणवत्तापूर्ण उपकरण
योजना के अंतर्गत केवल मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं टिकाऊ उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे उनका सुरक्षित एवं लंबे समय तक उपयोग किया जा सके।
विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन
उपकरण उपलब्ध कराने से पहले संबंधित विशेषज्ञों द्वारा चिकित्सकीय एवं कार्यात्मक मूल्यांकन किया जाता है, ताकि लाभार्थी को उसकी आवश्यकता के अनुरूप उपकरण मिल सके।
व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार उपकरण
प्रत्येक लाभार्थी की—
- आयु,
- दिव्यांगता का प्रकार,
- दिव्यांगता की गंभीरता,
- शारीरिक संरचना,
- कार्यात्मक आवश्यकता
को ध्यान में रखते हुए उपकरण का चयन किया जाता है।
प्रशिक्षण की व्यवस्था
योजना के अंतर्गत केवल उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते, बल्कि लाभार्थी को उनके सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
फॉलो-अप सेवाएँ
उपकरण वितरण के बाद आवश्यकतानुसार—
- निरीक्षण,
- समायोजन,
- मरम्मत,
- प्रतिस्थापन,
- पुनः प्रशिक्षण
जैसी सेवाएँ भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
डिजिटल पारदर्शिता
वर्तमान समय में ADIP योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का पंजीकरण, रिकॉर्ड प्रबंधन तथा उपकरण वितरण की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जाती है, जिससे पारदर्शिता, जवाबदेही एवं कार्यकुशलता में वृद्धि हुई है।
विशेष शिक्षा के क्षेत्र में ADIP योजना का महत्व
विशेष शिक्षा के क्षेत्र में ADIP योजना का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि सहायक उपकरणों के बिना अनेक दिव्यांग विद्यार्थी अपनी पूर्ण क्षमता का विकास नहीं कर पाते।
विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि में सुधार
उपयुक्त सहायक उपकरण उपलब्ध होने पर विद्यार्थी—
- बेहतर ढंग से पढ़ सकते हैं।
- लिखने में सक्षम होते हैं।
- सुनने एवं समझने की क्षमता में सुधार होता है।
- स्वतंत्र रूप से विद्यालयी गतिविधियों में भाग लेते हैं।
विद्यालय छोड़ने (Dropout) की समस्या में कमी
जब विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उपकरण उपलब्ध होते हैं, तो विद्यालय में उनकी उपस्थिति बढ़ती है तथा पढ़ाई बीच में छोड़ने की संभावना कम हो जाती है।
समावेशी शिक्षा को बढ़ावा
ADIP योजना सामान्य विद्यालयों में दिव्यांग विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करती है और समावेशी शिक्षा की अवधारणा को मजबूत बनाती है।
सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाना
ब्रेल, श्रवण यंत्र, संचार उपकरण, व्हीलचेयर तथा अन्य सहायक उपकरण विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाते हैं।
विशेष शिक्षक की भूमिका
ADIP योजना के सफल क्रियान्वयन में विशेष शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
विशेष शिक्षक—
- विद्यार्थियों की आवश्यकताओं का आकलन करते हैं।
- उपयुक्त सहायक उपकरण की पहचान करते हैं।
- अभिभावकों को योजना की जानकारी देते हैं।
- आवेदन प्रक्रिया में सहायता करते हैं।
- उपकरणों के उपयोग का प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
- विद्यालय में उपकरणों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करते हैं।
- विद्यार्थियों की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करते हैं।
- आवश्यक होने पर संबंधित विशेषज्ञों एवं पुनर्वास संस्थाओं से समन्वय स्थापित करते हैं।
ADIP योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ
ADIP योजना के माध्यम से देशभर में लाखों दिव्यांग व्यक्तियों को लाभ प्राप्त हुआ है। इस योजना ने पुनर्वास सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ—
- आधुनिक सहायक उपकरणों की उपलब्धता में वृद्धि।
- दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाओं का विस्तार।
- बड़े स्तर पर उपकरण वितरण शिविरों का आयोजन।
- समावेशी शिक्षा को बढ़ावा।
- दिव्यांग व्यक्तियों की आत्मनिर्भरता में वृद्धि।
- रोजगार के अवसरों में सुधार।
- पुनर्वास सेवाओं का सुदृढ़ीकरण।
- डिजिटल प्रणाली के माध्यम से अधिक पारदर्शी क्रियान्वयन।
ADIP योजना की सीमाएँ एवं चुनौतियाँ
यद्यपि ADIP योजना अत्यंत प्रभावी है, फिर भी इसके क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियाँ देखने को मिलती हैं—
- ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के प्रति जागरूकता का अभाव।
- दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाएँ पहुँचाने में कठिनाई।
- प्रशिक्षित पुनर्वास विशेषज्ञों की कमी।
- कुछ स्थानों पर उपकरण वितरण में विलंब।
- उपकरणों के रखरखाव एवं मरम्मत की सीमित सुविधाएँ।
- समय पर फॉलो-अप सेवाओं का अभाव।
- कई पात्र लाभार्थियों तक योजना की जानकारी नहीं पहुँच पाना।
- आधुनिक एवं उन्नत तकनीकी उपकरणों की बढ़ती लागत।
RPSC प्रथम श्रेणी विशेष शिक्षा परीक्षा हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य
| विषय | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | Assistance to Disabled Persons for Purchase/Fitting of Aids and Appliances (ADIP) Scheme |
| हिन्दी नाम | दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरणों की खरीद एवं फिटमेंट हेतु सहायता योजना |
| प्रारम्भ | वर्ष 1981 |
| संचालित मंत्रालय | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय |
| संबंधित विभाग | दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD) |
| योजना का प्रकार | केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) |
| प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसी | ALIMCO (Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India) |
| मुख्य उद्देश्य | सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर दिव्यांग व्यक्तियों की कार्यक्षमता, आत्मनिर्भरता एवं पुनर्वास को बढ़ावा देना |
| डिजिटल प्रणाली | ARJUN Portal |
| संबंधित अधिनियम | दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) |
| लाभार्थी | पात्र दिव्यांग व्यक्ति |
| सहायता का स्वरूप | सहायक उपकरण, फिटमेंट, प्रशिक्षण, फॉलो-अप तथा आवश्यकता के अनुसार अन्य पुनर्वास सेवाएँ |
ADIP योजना के लाभ
ADIP योजना केवल सहायक उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) में समग्र सुधार करना है। यह योजना शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, पुनर्वास तथा सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
1. आत्मनिर्भरता में वृद्धि
सहायक उपकरण प्राप्त होने के बाद दिव्यांग व्यक्ति अपने दैनिक कार्य अधिक स्वतंत्रता के साथ कर सकता है।
उदाहरण—
- स्वयं चलना-फिरना।
- विद्यालय या कार्यस्थल तक पहुँचना।
- दैनिक जीवन के कार्य करना।
- व्यक्तिगत आवश्यकताओं को स्वयं पूरा करना।
इससे दूसरों पर निर्भरता कम होती है तथा आत्मविश्वास बढ़ता है।
2. गतिशीलता (Mobility) में सुधार
व्हीलचेयर, कृत्रिम पैर, कैलिपर्स, वॉकर, ट्राइसाइकिल एवं अन्य गतिशीलता उपकरणों के माध्यम से व्यक्ति आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जा सकता है।
इसके परिणामस्वरूप—
- विद्यालय में उपस्थिति बढ़ती है।
- रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
- सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ती है।
- स्वतंत्र आवागमन संभव होता है।
3. शिक्षा को बढ़ावा
दिव्यांग विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध होने पर उनकी सीखने की क्षमता में वृद्धि होती है।
उदाहरण—
- दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ब्रेल उपकरण।
- श्रवण बाधित विद्यार्थियों के लिए श्रवण यंत्र।
- चलने-फिरने में कठिनाई वाले विद्यार्थियों के लिए व्हीलचेयर।
- लो विज़न वाले विद्यार्थियों के लिए मैग्निफायर।
इन उपकरणों से समावेशी शिक्षा को प्रोत्साहन मिलता है।
4. रोजगार के अवसरों में वृद्धि
जब दिव्यांग व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ती है तो उसके लिए रोजगार प्राप्त करना और कार्यस्थल पर प्रभावी ढंग से कार्य करना आसान हो जाता है।
इससे—
- आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ती है।
- परिवार पर आर्थिक बोझ कम होता है।
- जीवन स्तर में सुधार होता है।
5. सामाजिक समावेशन
सहायक उपकरणों के माध्यम से दिव्यांग व्यक्ति समाज की मुख्यधारा से जुड़ पाता है।
इससे—
- सामाजिक सहभागिता बढ़ती है।
- आत्मसम्मान में वृद्धि होती है।
- सामाजिक अलगाव कम होता है।
- समान अवसर प्राप्त होते हैं।
6. पुनर्वास सेवाओं को बढ़ावा
ADIP योजना केवल उपकरण उपलब्ध नहीं कराती बल्कि पुनर्वास प्रक्रिया को भी मजबूत बनाती है।
इसमें शामिल हैं—
- चिकित्सकीय मूल्यांकन।
- उपकरणों का फिटमेंट।
- उपयोग का प्रशिक्षण।
- नियमित फॉलो-अप।
- आवश्यक मरम्मत एवं समायोजन।
7. परिवार पर आर्थिक भार कम होना
अनेक सहायक उपकरण अत्यधिक महंगे होते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इन्हें खरीदने में सक्षम नहीं होते।
ADIP योजना के माध्यम से ऐसे परिवारों को आवश्यक सहायता मिलती है, जिससे उनका आर्थिक बोझ कम होता है।
8. जीवन की गुणवत्ता में सुधार
उचित सहायक उपकरण मिलने से व्यक्ति—
- अधिक स्वतंत्र जीवन जी सकता है।
- शिक्षा प्राप्त कर सकता है।
- रोजगार कर सकता है।
- समाज में सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकता है।
इस प्रकार उसकी जीवन गुणवत्ता में व्यापक सुधार होता है।
ADIP योजना के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियाँ
यद्यपि ADIP योजना अत्यंत प्रभावी है, फिर भी इसके क्रियान्वयन के दौरान कुछ चुनौतियाँ सामने आती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता का अभाव
अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को इस योजना की जानकारी नहीं होती, जिसके कारण पात्र लाभार्थी भी योजना का लाभ नहीं ले पाते।
विशेषज्ञों की कमी
कुछ क्षेत्रों में—
- ऑर्थोटिस्ट,
- प्रोस्थेटिस्ट,
- ऑडियोलॉजिस्ट,
- फिजियोथेरेपिस्ट,
- विशेष शिक्षक,
- पुनर्वास विशेषज्ञ
की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होती।
उपकरण वितरण में विलंब
कभी-कभी—
- प्रशासनिक प्रक्रिया,
- उपकरण निर्माण,
- परिवहन,
- दस्तावेज सत्यापन
के कारण वितरण में देरी हो जाती है।
दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँच की समस्या
पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रों में उपकरण पहुँचाना अपेक्षाकृत कठिन होता है।
उपकरणों का रखरखाव
कुछ उपकरणों की समय-समय पर मरम्मत एवं रखरखाव आवश्यक होता है, लेकिन सभी क्षेत्रों में ऐसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होतीं।
नियमित फॉलो-अप का अभाव
उपकरण वितरण के बाद प्रत्येक लाभार्थी तक समय पर फॉलो-अप सेवाएँ पहुँचाना एक बड़ी चुनौती है।
आधुनिक उपकरणों की अधिक लागत
नई तकनीक वाले सहायक उपकरण अपेक्षाकृत महंगे होते हैं, जिससे उनके व्यापक वितरण में अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है।
ADIP योजना को अधिक प्रभावी बनाने के सुझाव
योजना को और अधिक सफल बनाने के लिए निम्न उपाय अपनाए जा सकते हैं—
जन-जागरूकता अभियान
ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि प्रत्येक पात्र दिव्यांग व्यक्ति योजना का लाभ प्राप्त कर सके।
डिजिटल सेवाओं का विस्तार
ऑनलाइन आवेदन, ट्रैकिंग एवं डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली को और अधिक सरल एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाना
देशभर में पुनर्वास विशेषज्ञों, विशेष शिक्षकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
नियमित फॉलो-अप
उपकरण वितरण के बाद समय-समय पर निरीक्षण एवं आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
स्थानीय स्तर पर मरम्मत केंद्र
प्रत्येक जिले में सहायक उपकरणों की मरम्मत एवं रखरखाव की सुविधाएँ विकसित की जानी चाहिए।
विद्यालयों की भागीदारी
विशेष विद्यालयों एवं समावेशी विद्यालयों के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें योजना से जोड़ा जाना चाहिए।
RPSC प्रथम श्रेणी विशेष शिक्षा परीक्षा हेतु वन-लाइनर तथ्य
- ADIP का पूरा नाम Assistance to Disabled Persons for Purchase/Fitting of Aids and Appliances Scheme है।
- ADIP योजना का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराना है।
- यह योजना वर्ष 1981 में प्रारम्भ की गई।
- योजना का संचालन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) द्वारा किया जाता है।
- ADIP एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है।
- योजना की प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसी ALIMCO है।
- योजना के अंतर्गत सहायक उपकरणों के साथ फिटमेंट, प्रशिक्षण एवं फॉलो-अप सेवाएँ भी प्रदान की जाती हैं।
- योजना का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों की कार्यात्मक क्षमता, आत्मनिर्भरता एवं सामाजिक समावेशन को बढ़ाना है।
- उपकरणों का चयन विशेषज्ञों द्वारा चिकित्सकीय एवं कार्यात्मक मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।
- ADIP योजना समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है।
- वर्तमान में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल प्रणाली का भी उपयोग किया जा रहा है।
- योजना का संबंध दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) के उद्देश्यों से है।
परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण तथ्य
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| ADIP योजना का पूरा नाम क्या है? | Assistance to Disabled Persons for Purchase/Fitting of Aids and Appliances Scheme |
| ADIP योजना कब प्रारम्भ हुई? | वर्ष 1981 |
| ADIP योजना किस मंत्रालय द्वारा संचालित की जाती है? | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय |
| ADIP योजना का संचालन किस विभाग द्वारा किया जाता है? | दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) |
| ADIP योजना किस प्रकार की योजना है? | केंद्रीय क्षेत्र की योजना |
| ADIP योजना की प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसी कौन है? | ALIMCO |
| ADIP योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? | दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनकी कार्यक्षमता एवं आत्मनिर्भरता बढ़ाना |
| ADIP योजना का संबंध किस अधिनियम से है? | दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) |
| ADIP योजना में उपकरण देने से पहले क्या किया जाता है? | चिकित्सकीय एवं कार्यात्मक मूल्यांकन |
| ADIP योजना विशेष शिक्षा में क्यों महत्वपूर्ण है? | यह दिव्यांग विद्यार्थियों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाती है। |
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